Aakarshan vashikaran mantra

Aakarshan vashikaran mantra


आपके जीवन में यदि समस्याओं की अधिकता हो रही है और आपको ढूँढनें पर भी इसका कारण नहीं मिल रहा, तो हो सकता है कि इसके पीछे आपके ग्रहों का आपके अनुकूल न होना हो। ज्योतिषशास्त्र का सिद्धान्त है कि जो ग्रह शुभ फल नहीं दे रहे हैं उनका शुभ फल पाने के लिए उन्हें आकर्षित करके अपने लिए शुभ बनाने का प्रयत्न करना चाहिए। इसके लिए ज्योतिषशास्त्र में अनेक उपाय हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार प्रेम और सेक्स का कारक शुक्र ग्रह है और प्रेम के देवता कामदेव हैं।

आकर्षण वशीकरण मंत्र

बहुत से ज्योतिषियों का मानना है कि, यदि व्यक्ति किसी को अपनी ओर आकर्षित करना चाहता है तो उसे शुक्र एवं कामदेव को प्रसन्न करना चाहिए। इसके लिए अनेक ज्योतिषी शुक्र और आकर्षण वशीकरण मंत्र जप करने की सलाह देते हैं।

विश्वास में बड़ी शक्ति होती है, ये पत्थर की प्रतिमा में भी ईश्वर का वास करवाने की शक्ति रखता है। मंत्र और तंत्र भी मन के विश्वास पर ही आजमाए जाते हैं लेकिन माना जाता है कि कुछ मंत्र ऐसे भी होते हैं कि उनका प्रभाव होता है और शीघ्रता से होता है। ऐसे ही कुछ मंत्र और उपाय नीचे दिए जा रहे हैं, जो अपने चमत्कारी प्रभाव के कारण आपकी समस्याओं का निवारण करने की सामथ्र्य रखते हैं –

यह मंत्र जो किसी व्यक्ति विशेष को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिस व्यक्ति को आकर्षित करना हो उसका ध्यान कर 15 दिन तक नित्य इस मंत्र का जाप करें, तो कैसा भी पत्थरदिल प्राणी हो, अवश्य आकर्षित होगा।

– ॐ हुं ॐ हुं ह्रीं।

ॐ नमो भगवते श्रीसूर्याय ह्रीं सहस्त्र-किरणाय ऐं अतुल-बल-पराक्रमाय नव-ग्रह-दश-दिक्-पाल-लक्ष्मी-देव-वाय, धर्म-कर्म-सहितायै ‘अमुक’ नाथय नाथय, मोहय मोहय, आकर्षय आकर्षय, दासानुदासं कुरु-कुरु, वश कुरु-कुरु स्वाहा।”

विधि- सुर्यदेव का ध्यान करते हुए इस मन्त्र का प्रतिदिन 8 दिन तक 108 बार जप करने से ‘आकर्षण’ का कार्य सफल होता है।

“ऐं पिन्स्थां कलीं काम-पिशाचिनी शिघ्रं ‘अमुक’ ग्राह्य ग्राह्य, कामेन मम रुपेण वश्वैः विदारय विदारय, द्रावय द्रावय, प्रेम-पाशे बन्धय बन्धय, ॐ श्रीं फट्।”
आकर्षण वशीकरण मंत्र विधि- पहले इस मन्त्र को पहले त्योहार या शुभ समय में 20000 जप करके सिद्ध कर लें। प्रयोग के समय ‘साध्य’ के नाम का स्मरण करते हुए प्रतिदिन 108 बार मन्त्र जपने से ‘आकर्षण’ उत्पन्न हो जाता है।

यह एक सिद्ध वशीकरण प्रयोग हैं। इस मंत्र का प्रयोग करके आप अपने संबंधियों, मित्रों, सहयोगियों या किसी के भी मन में अपने लिए आकर्षण पैदा कर सकते हैं। इस मंत्र को मात्र 500 बार रुद्राक्ष की माला से पूर्व या उत्तर दिशा में लाल रंग के आसन पर बैठकर जपने से आप किसी को भी अपने आकर्षण में बाँध सकते हं। इसे केवल 500 बार जिसका ध्यान कर या जिसकी तस्वीर के सामने जपा जायेगा वे आपके वशीभूत होगा। जब तक कार्य सिद्ध न हो जपते रहिये।

प्रभावशाली आकर्षण मंत्र – झां झां झां हां हां हां हें हें

यह एक सिद्ध आकर्षण मंत्र है। इस मंत्र से आप किसी का भी आकर्षण कर सकते हैं। इस मंत्र को मात्र 500 बार रुद्राक्ष की माला से पूर्व या उत्तर दिशा में लाल रंग के आसन पर बैठकर जपने से आप किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकतें है। इसे केवल 500 बार जिसका ध्यान कर या जिसकी तस्वीर के सामने जपा जायेगा वे आपके आकर्षण के वश में आ जायेगा। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन केवल इसे 500 बार जपा जाए तो आकर्षण सिद्धि प्राप्त होती है ।

शाबर मंत्र

मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से व्यक्ति में आकर्षण शक्ति और यौन क्षमता में वृद्धि होती है।

ॐ नमो भगवते कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यस्य यस्य मम मुखं पश्यति तं तं मोहयतु स्वाहा।

पानी द्वारा आकर्षण मन्त्र

‘‘ ॐ नमो त्रिजट लम्बोदर वद वद अमुकी आकर्षय आकर्षय स्वाहा ’’

विधि – इस मन्त्र को जल पर 108 बार पढ़ फूंके, फिर अपने सिरहाने की तरफ रखकर सो जाये और मध्य रात्रि में उठकर इस पानी को पी ले ऐसा 21 दिन तक करे तो वह स्त्री स्वयं आपके पास चली आएगी, अमुकी के स्थान पर उस स्त्री का नाम लें जिसका आकर्षण करना हैं

कामदेव मंत्र

‘‘ऊँ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात’’ इस मंत्र के जप से दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है और सुयोग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है। कामदेव का एक शाबर मंत्र है ‘ऊँ नमो भगवते कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यस्य यस्य मम मुखं पश्यति तं तं मोहयतु स्वाहा।’ कहा जाता है कि इस मंत्र के जप से व्यक्ति में आकर्षण बढ़ता है।

शुक्र मंत्र

ओम द्राँ द्रीँ द्रौँ सरू शुक्राय नमरू।

आकर्षण के उपाय

यदि आपके जीवनसाथी का व्यवहार ऐसा हो गया हो कि आपको महसूस होने लगा हो कि उनका प्यार आपके प्रति कम या समाप्त हो रहा है, तो किसी शुक्रवार को भगवान कृष्ण को याद करें करते हुए तीन इलायची अपने शरीरी से स्पर्श कराकर अपने पास रख लें। अब शनिवार सुबह इसी इलायची को पीसकर खाने में या चाय में मिलाकर उन्हें पिला दें, ऐसा तीन हफ्ता हर शुक्रवार को करें तो आपको उनके व्यवहार में अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

किसी को आकर्षित करना हो तो पीली हल्दी, गाय की घी, गौमूत्र, सरसों व पान के रस को मिलाकर एकसाथ पीस लें और फिर इसे शरीर पर लगाएं, इससे स्त्रियां आकर्षित हो जाती हैं।

यदि आपको यह भय सता रहा हो कि कहीं आपका जीवनसाथी आपको छोड़कर न चल दे तो इसके लिए यह टोटका अपनाएं। नारियल, धतूरे के बीज, कपूर को पीसकर इसमें शहद मिला लें। हर रोज इसी लेप से लेकर तिलक करें, वह आपको छोड़कर कभी नहीं जाएंगे।

केला में गोरोचन मिलाकर लेप बनाएं। इस लेप को सिर पर लगाएं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति में आकर्षण शक्ति आ जाती है। नारियल, धतूरे के बीज, कपूर को पीस लें। इसमें शहद मिलाएं। नियमित इसका तिलक करने से जिसे आप प्यार करते हैं वह आपको छोड़कर नहीं जाता है।

पति की रूचि पत्नी में कम हो गयी हो तो दोनों साथ भोजन करें और भोजन के समय चुपके से पत्नी पति के खाने में अपनी थाली से थोड़ा भोजन रख दे। इससे पति फिर से पत्नी में रूचि लेने लगता है।

vashikaran ya sammohan ko khatam karne ka upay

Pati ka pyar pane ka mantra totka


पति का प्यार पाने का मंत्र टोटका- भारत पुरुष सत्तात्मक देश है। यहाँ पर नारी को दुर्गा, लक्ष्मि, सरस्वती रूप में पूजा जाता है। नारी के कई रूपों में से एक रूप है- पत्नी का। पति और पत्नी एक ही गाडी के दो पहिये हैं। वे एक-दूसरे के पूरक हैं. प्रकृति ने स्त्री और पुरुष के स्वभाव के निर्माण में अलग-अलग तत्वों का प्रयोग किया है. आदिकाल से भारत में प्रचलित पत्नी का रूप है :

पति का प्यार पाने का मंत्र टोटका

“कार्येशु दासी, करणेषु मंत्री,
भोज्येशु माता, शयनेषु रंभा,
रूपेच लक्ष्मी, क्षमया धरित्री,
षट्कर्म युक्ता कुळधर्मपत्नी।”

माना जाता है कि एक आदर्श धर्मपत्नी में ये सभी गुण अनिवार्य हैं।

पति-पत्नी का रिश्ता बहुत ही ख़ास होता है। ये रिश्ता प्रेम व विशवास पर आधारित होता है। ऐसा नहीं होने पर दोनों के जीवन में कलह उत्पन्न हो जाती है। बहुत-से लोग इस रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से ऊब जाते हैं। उन्हें विवाह बोझपूर्ण लगने लगता है, और वह इससे छुटकारा पाना चाहते हैं। पति-पत्नी के रिश्ते में उम्मीदें बहुत होती हैं और ये ज्यादातर महिलाओं की ओर से होती हैं। ऐसा न होने पर, रिश्ते में तनाव पैदा हो जाता है। इन्हीं सब वजहों से पति कभी-कभी किसी अन्य स्त्री की ओर आकर्षित होने लगते हैं। पति का प्यार पाने के लिए व उनका दिल जीतने के लिए हर पत्नी जी तोड़ कोशिश करती है। वह चाहती है कि वह अपने पति के साथ अपने रिश्ते की मजबूती को बनाये रख सकें। ऐसे में उसे उन उपायों की ज़रुरत पड़ती है जिससे की वह अपने पति का दिल जीत सके।

पत्नी की इसी परेशानी को सुलझाने के लिए, अपने पति का प्यार वापस पाने के लिए कुछ तरीके निम्नलिखित हैं :

  • पति के प्रति नकारात्मक सोच बदल दें। उन पर बेवजह शक करना बंद कर दें। उन पर बेवजह गुस्सा न हों। उनसे प्यार से पेश आएं।
  • आपके पति अच्छे या बुरे जैसे भी हैं उन्हें वैसे ही स्वीकार करें।
  • शादी के तीन-चार सालों बाद पत्नी अपने बच्चों, परिवार आदि में व्यस्त हो जाती है, जिससे वह अपने और अपने पति के सेक्स जीवन पर भी ध्यान नहीं दे पाती। इससे भी रिश्तों में तनाव उठता है। पत्नी को चाहिए कि जिस प्रकार वह बच्चों और परिवार पर ध्यान देती है। उसी प्रकार पहले की तरह अपने पति के साथ भी समय बिताए और सेक्स का भी आनंद उठायें अपने पति के साथ बहार घूमने जाएँ, उनके साथ वक्त बिताएं।
  • आपके पति को आपकी कोई आदत न पसंद हो तो उसे छोड़ दें। ऐसा कोई काम न करें, जिससे आपके वैवाहिक जीवन पर बुरा असर पड़े।
  • इत्र को रुई के फोम में लगाकर अपनी नाभि और कानों के पीछे लगाएं और खुशबू का कमाल देखिये। आपके पति आपसे दूर रह ही नहीं पाएंगे।
  • मस्तिष्क में मौजूद पियूष और पीनियल ग्रंथियों का सीधा सम्बन्ध पैर के अंगूठे को सहलाएं, तन मन मस्ती में झूम उठेगा, आपके पति आपमें ही खोये रहेंगे।
  • बादाम या केनोला के तेल की कुछ बूंदे, लेवेंडर तेल में मिला कर पति के बदन की मालिश करें। सम्भोग से पहले तन की मालिश ऊर्जा बढाती है। इससे प्रेम बढ़ता है।

इन सभी उपायों को अपनाकर पति के दिल में अपने लिए जगह बनाई जा सकती है। उनका प्रेम पाया जा सकता है। उन्हें सिर्फ और सिर्फ अपना बनाया जा सकता है।

प्राचीन समय में बड़े बुज़ुर्गों की वजह से, हर रिश्ते की अपनी गरिमा होती थी। लोग उस गरिमा को लांघने से डरते थे, इसलिए रिश्ते बहुत कम टूटते थे। परंतु आधुनिक काल की इस भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में जबकि पति-पत्नी दोनों ही कामकाजी हैं तो एक-दुसरे के लिए वक्त निकालना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कई बार पति किसी अन्य स्त्री के साथ सम्बन्ध बनाने लगता है। इन सभी बातों की वजह से हर पत्नी चाहती है की उसका पति उसके वश में रहे और अपने पति को अपने वश में करने के लिए वह कई तरह के उपाय ढूंढती है।

पति को वश में करने के लिए कुछ टोटके निम्नलिखित हैं :

  • किसी सप्ताह के शुक्रवार का इंतज़ार करें और उस दिन भगवान् श्री कृष्ण की पूजा करें। रात को जब आपके पति सोने के लिए जाएँ तो आप तीन इलायची को अपने शरीर से स्पर्श करके उनके पास रख दें। अगले दिन सुबह उठकर आप जब उनके लिए चाय या कहना बनाएं तो इन इलायचियों को पीसकर उनके खाने में मिला दें। इस उपाय को चार सप्ताह तक अवश्य करें। पति वश में हो जायेंगे।
  • नारियल, कपूर और थोड़े धतूरे के बीज को पीसकर उसका पावडर तैयार कर लें। इसके बाद आप इसमें थोड़ा शहद मिलाकर उसका लेप तैयार करें। इस लेप को प्रतिदिन खुद पर व अपने पति पर लगाएं। इस प्रकार आपके पति सदैव आप ही से आकर्षित रहेंगे।
  • अगर किसी को लगता है कि उनका पति किसी और के वश में है तो ” गुरूवार को रात के १२ बजे का इंतज़ार करें और सोते हुए अपने पति के कुछ बाल काट लें। फिर इन बालों को जल दें और उन्हें अपने पैरों के नीचे बुरी तरह मसल दें। कुछ दिन में आपके पति फिर से आपकी ओर आकर्षित होने लगेंगे।
  • शनिवार के दिन सुन्दर आकृति वाली एक पुतली बनाकर उसके पेट पर ‘पति’ का नाम लिखकर उसी को दिखाएँ। फिर उस पुतली को छाती से लगाकर रखें। इससे आपके पति फिर से आपके पति आकर्षित हो जायेंगे।

यदि किन्हीं कारणों से पति-पत्नी के बीच प्यार समाप्त होने लगता है तो निम्नलिखित मन्त्र के माध्यम से पत्नी अपने पति का प्यार वापस प्राप्त कर सकती है –

“अमुक (पति का नाम) जय जय सर्वव्यानमः स्वाहा।”

इस मन्त्र का सिद्ध योग में ११०० जप कर प्रेमपूर्वक अपने पति को पान खिलाएं, इससे आपके पति जीवन भर आपके वश में रहेंगे।

अंततः मैं यही कहूँगी टोने-टोटके, वशीकरण सब तभी फलीभूत होते हैं, जब आपके दिल में अपने शादी-शुदा रिश्ते के प्रति सच्चाई व अपने पति के प्रति सच्चा प्यार हो। कहते हैं की ” प्यार को प्यार से राह होती है। ” तो अपने पति को प्यार से जीतिए वो आपको छोड़कर कहीं जा ही नहीं पाएंगे।

vashikaran ya sammohan ko khatam karne ka upay

Vashikaran ya sammohan ko khatam karne ka upay


वशीकरण से छुटकारा, वशीकरण से मुक्ति, वशीकरण हटाने के उपाय – वशीकरण या सम्मोहन को खतम करने से पहले जरूरी है की आप जान ले की आखिर वशीकरण है क्या!! वशीकरण एक ऐसी विद्या है, जिसके प्रयोग से एक इंसान किसी दूसरे इंसान को अपने वश मे करने की कोशिश करता है। ऐसा करके वो दूसरे वाले के मन-बुद्धि पर नियंत्रण करता है, ताकि उसे अपने अनुसार चला सके, वो अपने मन की करवा सके। कोई किसिकों अपनी ओर सम्मोहन द्वारा खिचना चाहता है क्यूकी वो उससे प्यार करता है, तो कोई वशीकरण द्वारा अपने दुश्मन पर कंट्रोल रखना चाहता है, या कोई अपने बॉस पर कंट्रोल रखना चाहता है, तो कोई टोटके व तंत्र-मंत्र द्वारा अपने घर को बुरी नज़र से बचाना चाहता है। इसी तरह इंसान की जरूरत ही उसे बताती है की उसे आखिर इस विद्या का इस्तेमाल कब, कैसे और किस हालात मे करना है।

वशीकरण या सम्मोहन को खत्म करने का उपाय

वशीकरण विद्या का प्रयोग इंसान अच्छे व बुरे दोनों तौर पर करता है। पर क्यूकी इसमे जादू-टोटके, तंत्र-मंत्र भी जुड़े है, तो अक्सर आम लोग इसे नकारात्मक दृष्टि से देखते है, उन्हे इसमे खतरा महसूस होता है। तो अगर आपको भी कभी लगे की आप पर किसी ने वशीकरण कर दिया है, और उससे मुक्ति पाना चाहते है, तो आज हम आपको वशीकरण व सम्मोहन को खतम करने के तरीके बताएंगे। अक्सर वशीकरण के प्रभाव के अंदर मनुष्य को लगता है की वो अपनी मर्जी से नहीं जी पा रहा, जैसे की वो किसी ओर की मर्जी से चलाया जा रहा है, या फिर आप सोचते कुछ और है, करते कुछ और है। आपके विचार आपके कंट्रोल मे नहीं रह जाते, मन विचलित रहता है और हर वक़्त एक दुविधा बनी रहती है। तो कुछ इसी प्रकार की हालात मे इंसान महसूस करता है की शायद उसपर किसी ने वशीकरण किया है।

तो पहले हम आपको बताते है की अगर कभी लगे की कोई इंसान बिना वजह ही आपको परेशान कर रहा है, तो आप सुबह शौच जाते वक़्त शौचालय में ही बैठे- बैठे इस तरीके को अपनाए। वही बैठकर पानी से उस व्यक्ति का नाम लिख दे, जो परेशान कर रहा है और फिर बाहर निकलने से पहले उस जगह अपने बाएं पैर से तीन बार ठोकर मार दे (जहां उसका नाम लिखा है)। ऐसा करके आपको उसके प्रभाव से छुटकारा मिल जाएगा।

आपको हम अब दूसरा तरीका बताते है, जोकि एक विशेष मंत्र है। मंत्र: “ॐ हां हां हां ह्लीं बज्र कवचाय हुम”। जब भी लगे की आप पर किसी की बुरी नज़र लग चुकी है या आप किसिके वशीकरण का शिकार हो चुके है तब इस मंत्र का रुद्राक्ष की माला से 1 माला जाप प्रतिदिन करे। जप करने से पहले पूर्व की ओर मुख करे। इसके बाद आप देवी बगलामुखी को पान, मिठाई व फल अर्पित करने के साथ पंच मेवा भी दे और छोटी कन्याओं को प्रसाद व दक्षिणा देकर इस मंत्र साधना को सिद्ध करे। माना गया है की ये मंत्र आपके लिए एक सुरक्षा कवच का काम करते हुए आपको वशीकरण से मुक्त करता है। अगर आपको ये बात पर पूर्ण विश्वास हो गया है की आप किसी के सम्मोहन या वशीकरण के शिकार हो चुके है, जिसका बड़ा बुरा प्रभाव आपकी जीवन पर हो रहा है तो आप अमावस्या या पूर्णिमा मे से किसी भी दिन अपने घर और कार्यस्थल पर पवित्र गंगा जल का छिड़काव करले। इसमे संदेह नहीं की गंगा जल कितना पवित्र माना जाता है, जिसमे हर नकारात्मक ऊर्जा को खतम करने की ताकत है। ये उपाय भी काफी सरल है जिसका प्रयोग आप कर सकते है।

चलिये आगे एक अन्य उपाय आप ये भी कर सकते है की माँ काली के मंदिर मे जाकर वहां सच्चे मन से पूजा करने के साथ वशीकरण के प्रभाव से मुक्त होने की याचना करे व माँ काली को गुलाब का ताजा फूल अर्पित करें । यहां आकर आप चामुंडा मंत्र का जाप 108 बार करे। जाप पूर्ण होने के बाद उस लाल गुलाब की सात पंखुड़ियां उस व्यक्ति को खिला दे जिसपर वशीकरण या काले जादू हुआ है। इसे खाने से उस व्यक्ति को इसके प्रभाव से निजात मिलेगा। ये एक और ऊपर बड़ा ही साधारण व असरदार रहेगा अगर आप इसे करते है तो। इसके लिए बस आप गायत्री मंत्र: “ओम भुर्भुवः स्व तत्स वितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धी मही धीयो यो न प्रचोदयात” का 108 बार जाप हर दिन सुबह स्नान के बाद करे। कुछ ही दिनों मे आप देखेंगे की आपके घर व मन से नकारात्मक ऊर्जा खतम होती जा रही है और आप स्वस्थ्य महसूस करने लगेंगे। जाप के वक़्त बस मंत्र के उच्चारण के स्पष्टता पर ध्यान रखे।

हम आपको एक अन्य मंत्र का प्रयोग बताते है। वो मंत्र है: “ॐ ह्लीं श्रीं ह्लीं पीताम्बरे तंत्र बाधाम नाशय नाशय”। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके, इस मंत्र का रुद्राक्ष की माला से 7 माला जाप करना होगा। इसके बाद आप आटे के तीन दीपक बनाकर, उसे देसी घी से जला ले। इसके उपरांत आप कपूर से देवी बगलामुखी की आरती जरूर करे। ऐसा करके आप अपने ऊपर पड़ी बुरी नज़र व वशीकरण के प्रभाव को नष्ट कर सकते है।

अंत मे हम आपको वशीकरण हटाने के उपाय के तौर पर ये सलाह भी देंगे कि आप को जिस भी व्यक्ति पर संदेह है की उसी ने आप पर सम्मोहन किया है या कर सकता है, तो ऐसे आदमी से दूरी बनाए रखे व उसके द्वारा दी जाने वाली कोई भी खाने-पीने की चीज़ न ले क्यूकी वो चीज़ या भोजन उसके द्वारा अभिमंत्रित किया हो सकता है। यहां आपकी सतर्कता ही आपकी रक्षा करती है।

Dattatreya vashikaran mantra

Dattatreya vashikaran mantra


भगवान दत्तात्रेय की मंत्र साधना से हर कार्य में सफलता मिलती है भगवान दत्तात्रेय का साबर मंत्र और वशीकरण मंत्र बहुत ही शक्तिशाली है इन मंत्रों से हर कार्य की पूर्ति की जा सकती है भगवान दत्तात्रेय को शिव जी का अवतार माना जाता है जबकि वैश्य समुदाय में भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है बाकी हिंदू धर्म में सभी तथ्यों को बराबर स्थान प्राप्त है माना यह भी जाता है कि यह माता अनसूया की संतान है और इनकी साधना करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है तथा मनवांछित फल प्राप्त होता है .

दत्तात्रेय सधना

भगवान दत्तात्रेय की साधना अत्यंत सरल है एवं इस साधना को करने से आपकी की सभी इच्छाएं पूर्ण होती है इस साधना के लिए सर्वप्रथम उठकर स्नान कर सफेद वस्त्र धारण कर भगवान दत्तात्रय की प्रतिमा को स्थापित कर एवं यंत्र को लाल कपड़े में स्थापित कर विधि पूर्वक चंदन धूप फूल नवेद से आरती करनी चाहिए तथा मंत्र जाप एवं स्रोत का पढ़ा जाना आवश्यक है मंत्र जाप अत्यंत ही प्रभावी होता है निरंतर जाप करने से शीघ्र ही साधक को एक दिव्य प्रकाश दिव्य सुगंध का आभास होने लगता है और यह सा प्रतीत होता है कि उनके समझ कोई देव आत्मा आ गई है और लगातार जप करने से साधक की मनो इच्छाएं पूर्ण हो जाती है

दत्तात्रेय साधना विधि

भगवान दत्तात्रय की आराधना करने से पहले उनका आवाह्न किया जाता है

आवाह्न विधि

भगवान का आवाह्न करने के लिए सर्वप्रथम एक साफ बंद बर्तन में पानी लेकर अपने पास रखना चाहिए और अपने बाएं हाथ में एक गुलाब का पुष्प लेकर उसमें चावल के दाने रखकर मंत्र जाप करना चाहिए मंत्र जाप के पश्चात भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा पर फूल अर्पित करना चाहिए तथा पास में रखें जल से हाथों को धो लेना चाहिए और आप दोनों हाथ जोड़कर भगवान से मंत्रोच्चारण के साथ प्रार्थना करनी चाहिये।

मंत्र-

ॐ अस्यः श्री दत्तात्रेयः स्तोत्रयः मंत्रस्यः नारदः ऋषि: अनुष्टुप छन्द: श्री दत्तः परमात्मा देवता:
श्री दत्तः प्रीत्यर्थे जपे विनोयोग:
जप स्तुति – जटाधरः पाण्डुरंग्न शूलहस्तं कृपानिधिमः सर्व रोग हरं देवः दत्तात्रेयमहं भजः

वशीकरण साधना

यह वशीकरण बहुत ही प्रभावी होता है एवं इस वशीकरण के द्वारा जातक अपनी इच्छाओं की पूर्ति दूसरे जातक से करा सकता है इस वशीकरण के प्रयोग से जातक की आकर्षण शक्ति मैं वृद्धि होती है वह कोई भी व्यक्ति उसको देखकर उसकी तरफ सम्मोहित होने लगता है पर इसका उपयोग हमें द्वेष की भावना से नहीं करना चाहिए

सधना विधि

यह साधना जातक को बुधवार की रात्रि में करनी चाहिए इसके लिए सर्वप्रथम जातक स्नान कर स्वच्छ होकर पीले वस्त्र धारण कर उत्तर पूर्व दिशा में भगवान दत्तात्रय की चौकी स्थापित करें और उस चौकी पर पीला वस्त्र बिछाए एवं मूर्ति और यंत्र स्थापित करें जातक को पीले आसन का प्रयोग करना चाहिए फिर भगवान दत्तात्रेय के यंत्र के पास सिंदूर रखें और घी का दीपक जलाकर हाथ जोड़ कर भगवान दत्तात्रय के मूल मंत्र का 11 बार जप करना चाहिए और भगवान से अपनी मनोकामना पूर्ण की प्रार्थना करते हुए उस सिंदूर को किसी चांदी के डिब्बी में रख लेना चाहिए और उस सिंदूर का प्रयोग आप जब भी करेंगे आपको देखने वाला व्यक्ति मोहित हो जाएगा यदि आप किसी कार्य हेतु या किसी व्यापार संबंधित कार्य में जा रहे हैं और इस सिंदूर से आपने मस्तक में तिलक किया है तो आपको देखने वाला व्यक्ति वशीभूत हो जाएगा और आपका कार्य सर्वप्रथम पूर्ण होगा यदि किसी स्त्री का पति उस से प्रेम नहीं करता है और अन्य स्त्रियों के संपर्क में रहता है तो उस स्त्री को सुबह स्नान कर स्वच्छ होकर इस सिंदूर से अपनी मांग को भरना चाहिए इससे आपका पति गलत संगत को छोड़कर आपको पुनः प्राप्त हो जाएगा और अन्य स्त्रियों से उसके संबंध विच्छेद हो जाएंगे

मंत्र – ॐ श्रीह् हृीं क्लिंनः ग्लौं द्रामः दत्तात्रेयायः नमहः

दत्तात्रेय तंत्र साधना

ब्रह्मा विष्णु महेश की शक्तियों से संपन्न भगवान दत्तात्रय की तंत्र विद्या से सभी कार्य पूर्ण हो जाते हैं और मनोकामना पूर्ण होती है यह साधना मध्य रात्रि को प्रारंभ करनी चाहिए और इसका विधि पूर्वक समापन करना चाहिए

साधना विधि

भगवान दत्तात्रेय की इस साधना को साधक किसी भी शुभ दिन प्रारंभ कर सकता है इसके लिए साधक को रात्रि में स्नान कर स्वच्छ होकर लाल वस्त्र धारण कर लाल आसन पर उत्तर दिशा की तरफ मुख कर बैठ जाना चाहिए और भगवान दत्तात्रेय का ध्यान करते हुए एक बजोट की स्थापना करनी चाहिए और अपने समझ इसको शुद्ध घी से निर्मित करें तथा मंत्रों द्वारा उसमें प्राण प्रतिष्ठा करें तथा पारद शिवलिंग को स्थापित करना चाहिए तथा इस शिवलिंग के पास भगवान दत्तात्रय की प्रतिमा या यंत्र को स्थापित करें और पूर्ण विधि विधान से पूजन करें जतक को यंत्र और चित्र की पूजा सर्वप्रथम करनी चाहिए तत्पश्चात आप शिवलिंग की आराधना करें|

तेल का दीपक जलाकर गूगल की धूप से से शिवलिंग की पूजा करें एवं भोग लगावे भोग में आप किसी भी वस्तु का प्रयोग कर सकते हैं शिवलिंग की पूजा के पश्चात आप रुद्राक्ष की माला से 21 बार भगवान दत्तात्रय के मंत्रों का जाप करें और उनसे मनोकामना को पूर्ण करने की स्तुति करें इस आराधना में केवल आपके द्वारा गुरु मंत्र का ही उपयोग करना चाहिए या आप अपने गुरु से परामर्श ले सकते है मंत्र जाप पूर्ण होने के पश्चात साधक को भगवान दत्तात्रेय की वंदना करते हुए उनको अपने स्वप्न में प्रकट होने की प्रार्थना करनी चाहिये तथा साधना में प्रयोग की गई माला को अपने सिरहाने रख कर सो जाएं भगवान दत्तात्रेय आपको रात्रि में स्वप्न में स्त्री के रूप में दर्शन देंगे और आप की हर मनोकामना पूर्ण करेंगे तथा प्रयोग की गई माला को आप कई बार उपयोग कर सकते हैं एवम् अपनी हर इच्छा की पूर्ति कर सकते हैं

मंत्र – ॐ द्रां द्रिं द्रुं दत्तात्रेयायः स्वप्ने प्रकटहः प्रकटहः अवतरम् अवतरम् नमहः

Gorochan se vashikaran

Gorochan se vashikaran


त्राटक साधना सिद्धि/लाभ/नुकसान, त्राटक से सम्मोहन, त्राटक साधना कैसे करे- जिस प्रकार आम जीवन में इंसान तरक्की के लिए विभिन्न क्षेत्रों को अपनाता है उसी प्रकार आध्यात्मिक जीवन के उत्थान हेतु भी इंसान अपनी रुचि के अनुसार क्षेत्र चुनता है| जैसे – तंत्र-मंत्र, ज्योतिष, भक्ति, योग| त्राटक सिद्धि योग का एक हिस्सा है जो विशेष प्रकार की ध्यान विधि पर आधारित है| यद्यपि आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने के लिए सभी क्षेत्रों में ध्यान पर बल दिया गया है| जैसे भक्ति में भी भक्ति ईश्वर के ध्यान में लीन रहता है| तंत्र मंत्र में मंत्र सिद्धि हेतु किसी निश्चित विषय पर ध्यान केन्द्रित करना होता है| ध्यान की अवस्था में मनुष्य की समस्त ऊर्जा एक दिशा में प्रवाहित होने लगती है और वही साधना को परिणाम तक पहुंचाती है|

त्राटक सम्मोहन साधना

त्राटक साधना पूरी तरह ध्यान पर ही आध्रारित है| शब्द व्युत्पत्ति की दृष्टि से किसी विषय पर एकटक दृष्टि रखना त्राटक कहलाता है| अष्टांगिक योग के आठ चरणों में सबसे अंतिम ध्यान है| ध्यान के कई प्रकार बताए गए हैं, इनमे त्राटक सर्वोत्कृष्ट माना जाता है क्योंकि आम जीवन जीने वाले भी इस विधि से अनेक विशेष गुणो से सम्पन्न हो सकते हैं| ध्यान नेत्र खोलकर भी की जा सकती है और नेत्र बंद करके भी| बंद नेत्र द्वारा किए जाने वाले ध्यान में किसी आराध्य छवि की कल्पना होती है| परंतु नेत्र खोलकर किए जाने वाले ध्यान में किसी आराध्य को होना आवश्यक नहीं है| बल्कि अपने सामने किसी वस्तु को एकटक देखते हुए उसके द्वारा मूर्त से अमूर्त तक पहुँचते हैं| सांख्य-योग दर्शन शास्त्र के अनुसार मनुष्य के शरीर में ही ब्रम्ह का वास है, जिन्हें प्राप्त करने के लिए योग क्रिया की जाती है| कुंडली जागृत होते ही इंसान ‘अहम ब्रम्हास्मि’ का बोध कर लेता है| ठीक उसी प्रकार त्राटक द्वारा साधक उस दिव्य दृष्टि को प्राप्त करता है, जो सूक्ष्म रूप से प्रत्येक मनुष्य में है परंतु सुप्त रूप में|

त्राटक साधना अत्यंत सरल है परंतु साधक में कुछ विशेष गुणो का होना आवश्यक है जैसे –

  • साधना के प्रति निष्ठा हो
  • शारीरिक रूप से स्वस्थ हो
  • व्यभिचारी न हो
  • यम, नियम का पालन करने वाला हो
  • तामसिक भोजन का रसिक न हो
  • त्राटक साधना कैसे करें

इस साधना के कई प्रकार है| कुछ प्रमुख प्रकारों का वर्णन नीचे दिया जा रहा है| आप अपनी रुचि के अनुसार इनमे से कोई एक चुन सकते हैं| एक बार मे एक ही विधि चुने| उक्त विधि कष्टप्रद हो तो कुछ दिन विश्राम करें| पुनः अन्य विधि से प्रारम्भ करें|

  • एकान्त कक्ष में एक ऐसा कैनवास रखें जिसमे काले पृष्ठभुमि पर लाल अथवा सफ़ेद बिन्दु हो| स्नान के बाद प्रातः काल स्वच्छ आसन पर बैठें तथा उस बिन्दु पर अपना ध्यान केन्द्रित करें| कुछ देर बार वह बिन्दु चमकीली नज़र आएगी| आपको अपने शरीर का भान समाप्त हो जाएगा| प्रारम्भ में एक मिनट का लक्ष्य रखें| फिर इसे धीरे धीरे बढ़ा दें|
  • दूसरी विधि में ध्यान के लिए दीपक का सहारा लिया जा सकता है| आकार में बड़े दीपक को जलाकर उसके समक्ष बैठ जाएँ तथा उस पर ध्यान केन्द्रित करें| ध्यान से पहले कक्ष की बत्ती बुझा दें| ध्यान रखें लौ में किसी प्रकार का कंपन न हो| प्रारम्भ में ध्यान भटकते ही छोड़ दें| अगले दिन पुनः प्रयास करें|
  • तीसरी विधि में आईने की सहाता से त्राटक साधना की जा सकती है| आईना कम से कम 6 इंच चौड़ा तथा 8 इंच लंबा हो तो अतिउत्तम| एकांत कक्ष में बैठकर आईना अपने सामने रखें तथा खुद से नज़र मिलाएँ| धीरे-धीरे अपनी ही आँखों की पुतलियों पर ध्यान केन्द्रित करें| एक स्थिति ऐसी आएगी जिसमे आपको खुद का चेहरा दिखाई देना बंद हो जाएगा| अंत में वह पुतली भी नहीं दिखेगी|
  • चौथी विधि में सूर्य को अर्घ्य देने के बाद उगते हुए सूर्य पर ध्यान केन्द्रित करें| स्मरण रखें ध्यान केन्द्रित करें का आशय उसे एक तक देखते रहने से हैं| इस त्राटक विधि से सूर्य की लालिमा साधक को कान्ति प्रदान करती है तथा स्वाभाविक ऊर्जा से भर देती है|
  • इसके अलावा सरलता से उपलब्ध किसी भी वस्तु को एकटक देखते हुए यह साधना की जा सकती है| जैसे दीवार पर टंगी कोई तस्वीर, गमला आदि|

सावधानी

  • किसी भी विधि से यह साधना करें लेकिन ध्यान रखे साधना के लिए बैठते वक्त पेट न तो पूरी तरह खाली हो ना पूरी तरह भरा हो| खाली पेट गैस बनाता है, पेट दर्द की शिकायत हो सकती है| इसलिए थोड़ा बहुत खाकर बैठना नुकसान नहीं करता| परंतु पूरी तरह भरे पेट से बैठना और एकाग्र होना भी संभव नहीं होता|
  • यदि परिवार के मध्य रहते हो तो घर के सभी सदस्यों को पता होना चाहिए कि इस वक्त आपको आवाज नहीं देना है| फोन अलार्म आदि बंद रखें| यहाँ तक कि दरवाजे पर दस्तक होने पर कौन द्वार खोलेगा यह भी सुनिचित कर लें|
  • जल्दी जल्दी साधना विधि न बदले| जिस विधि का चुनाव करें उस पर कम से कम छह महीने परिश्रम करें|

त्राटक साधना से लाभ

त्राटक साधना तंत्र मंत्र से सर्वथा भिन्न मार्ग है| इसे किसी निश्चित दिन, निश्चित रंग के कपड़े प्रसाद धूप दीप अगरबत्ती से कुछ भी लेना देना नहीं है| इसकी सफलता सड़क के आत्म शक्ति पर निर्भर करती है| जिसे अंग्रेजी में विल पावर कहा जाता है| यह एक सतत प्रक्रिया है| इसलिए दो-माह चार माह की सीमा में बांधने के बजाय इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें| जिस प्रकार बैटरी कुछ दिन बाद फ्यूज हो जाती है, उसी प्रकार इस साधना के बाद प्राप्त हुआ ओज धीरे धीरे मद्धम पड़ जाता है| यह ओज बनी रहे इसलिए प्रतिदधि थोड़ी ही देर के लिए सही त्राटक अवश्य करें| ध्यान रखने योग्य बात यह है कि किसी भी विधि से यह साधना करने पर लाभ और नुकसान एक समान ही है|

  • इस साधना से चेहरे पर कान्ति आती है| व्यक्तित्व में आकर्षण उत्पन्न होता है| नेत्र में इतना तेज आ जाता है कि किसी को देखते ही वह सम्मोहित हो जाता है| यह सम्मोहन तंत्र-मंत्र से प्राप्त सम्मोहन शक्ति से पृथक है| इसे सौम्य सम्मोहन कह सकते हैं जो आपमे आई सकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से उत्पन्न होता है|
  • स्वभाव में आमूल चूल परिवर्तन हो जाता है| पहले बात बात पर उत्तेजित होने वाला इंसान इस साधना के बाद धीर गंभीर और सोच समझकर निर्णय लेने वाला बन जाता है|
  • इस साधना के बाद एकाग्रता अत्यधिक बढ़ जाती है| छात्रों के लिए यह साधना रामबाण है| त्राटक अभ्यास के बाद कठिन से कठिन विषय पर ध्यान केन्द्रित करना सरल हो जाता है|

त्राटक साधना से नुकसान

विश्व में जितनी भी वस्तु अथवा विषय है उसके दो पहलू होते हैं| इन्हें अपनाने से पूर्व दोनों पहलुओं पर विचार कर लेना जरूरी होता है| यद्यपि यह साधना अत्यंत सरल है| मात्र इच्छा शक्ति के दम पर साधक अनेक विशिष्ट गुणो का स्वामी बन सकता है| तथापि त्रुटि होने पर कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जैसे –

साधना काल में अचानक तेज ध्वनि होने पर साधक अचेत हो सकता है| यहाँ तक कि हृदय गति रुक भी सकती है|
लगातार एकटक देखने से कभी-कभी आंखो में समस्या आने लगती है| आँसू निकल आते हैं या साधना के तुरंत बाद देखने में समस्या आने लगती है| दो चार दिन साधना करने के बाद नेत्रा चिकित्सक से इसके प्रभाव की जांच करवाएँ| यदि पहले से नेत्र संबंधी समस्या हो तो यह साधना न करें|

Gorakhnath vashikaran totke

Gorakhnath vashikaran totke


गुरु गोरखनाथ मंत्र साधना, गोरखनाथ वशीकरण सिद्धि, गोरखनाथ शाबर मंत्र, गुरु गोरखनाथ के मंत्र- ग्यारवहीं शताब्दी के प्रसिद्ध गुरू गोरखनाथ नाथ सम्प्रदाय के पर्वतक थे। उनके द्वारा रचित प्रसिद्ध शाबर मंत्र तंत्र मार्गियों के लिए किसी थाती से कम नहीं। महान योगियों की श्रृंखला में उनका नाम अत्यधिक सम्मान से लिया जाता है। उनका मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित है तथा उन्ही के नाम पर उस शहर का नाम रखा गया। इसके अलावा नेपाल में भी एक जिले का नाम गोरख है। वहां एक गुफा में गुरू गोरखनाथ के चरण चिन्ह है तथा वहां उनकी प्रतिमा भी स्थापित है। यहां प्रतिवर्ष वैशाख पूर्णिमा का मेला लगता है।

गोरखनाथ वशीकरण टोटके

वशीकरण हेतु आज उनके द्वारा रचित मंत्र ही ज्यादातर प्रयोग में लाए जाते हैं। इन मंत्रों की विशेषता है कि ये स्वतः सिद्ध हैं। इन्हें खास विधि-विधान से सिद्ध करने की जरूरत नहीं पड़ती। इन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है। यथा कुछ मंत्र के अंत में गुरू गोरख नाथ का नाम होता है, परंतु कहीं सिर्फ फुरौ मंत्र इश्वरी वाचा कहा जाता है। उनके मंत्रों का इस्तेमाल करने से पूर्व स्मरण रखें इनकी रचना उस महान पुरूष द्वारा की गई है, जो स्वयं विषय-वासना से कोसो दूर था। इसलिए इनका इस्तेमाल किसी को कठपुतली की तरह नचाने के लिए न करके अपने जीवन को उन्नत व खुशहाल बनाने के लिए ही करें। मान्यता है, कि गुरू गोरखनाथ मंत्रों का उच्चारण रात में करना चाहिए।

गोरखनाथ के शाबर मंत्र

गुरू गोरखनाथ ने अपने जीवनकाल में हजारो मंत्रों की रचना की। परंतु उनका शाबर मंत्र अत्यधिक प्रसिद्ध है। इसके पीछे संभवतः यह भी कारण हो सकता है कि सभी शाबर मंत्र जन साधारण की बोली में रचे गए हैं। धर्मग्रन्थों के कठिन शब्द मात्र प्रकाण्ड विद्वान ही समझ सकते हैं। परंतु शाबर मंत्र में कही गई बात हर कोई आसानी से समझ सकता है। इसके अलावा इन्हें सिद्ध करने के लिए भारी भरकम अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं पड़ती। गुरू गोरखनाथ द्वारा रचित कुछ प्रसिद्ध शाबर मंत्रों का विवरण तथा उपयोग विधि निम्नलिखित है-

बज्र में कोठा बज्र में ताला, बज्र में बंध्या दस्ते द्वारा
जहां बज्र का लगे किवाड़ा, बज्रमें चौखट बज्र में कील
जहां से आए , वहीं को जाए , जिसने भेजा, उसी को खाए
हमको फिर न मुंह दिखाए, हाथ को, नाक को, सिर को
पीठ को , कमर को , छाती को , जो जख्म पहुँचाए
तो फुरे गुरू गोरखनाथ की आज्ञा
मेरी भक्ति, गुरू की शक्ति, फुरौ मंत्र इश्वरो वाचा।

यदि कोई लंबे समय से बीमार चल रहा हो तो उस पर यह मंत्र प्रयोग करें,वह शीघ्र ही स्वस्थ हो जाएगा।

गोरखनाथ प्रयोग विधि: सात कूएं से अथवा सात नदी से अथवा सात तालाब से जल लेकर आएं, इस मंत्र को पढ़ें तथा उक्त जल से पीड़ित को स्नान करवा दें। ऊपरी बाधा, भूत-प्रेत, वशीकरण आदि का समस्त प्रभाव समाप्त हो जाएगा।

जती गोरख मच्छेंदर का चेला, शिव अवतार दिखे अलबेला
कानन कुण्डल गले में नादी, हाथ त्रिशूल नाथ है आदि|
अलख पुरूष को करूं आदेश, सात के काटो क्लेश
भगवा भेष औ हाथ में खप्पर,
भैरव शिव का चेला, जहां-जहां जाए
वहाँ लगे मेला
गोरख तापे शिव का धुना, काल-कंटक थरथर कांपे
मेरी रक्षा करे नवनाथ
राम-दूत हनुमान ऋिद्धि सिद्धि आंगन विराजे
माता अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा, पिंड काँचा
फुरौ मंत्र इश्वरी वाचा

गोरखनाथ वशीकरण विधि: यह सर्व मनोकामना सिद्धि मंत्र है। इसका जाप नित्य 11 बार करने से सभी लौकिक सुख प्राप्त होते हैं। इस मंत्र के पाठ करके हृदय से कामना करने पर मनोवांछित नौकरी, आर्थिक सुख समृद्धि, परिवार में शांति प्राप्त की जा सकती है|

ओम नमो आदेश गुरु की

इश्वर वाचा अजरी बजरी बाड़ा/बजरी में बजरी बांधा/दसो द्वार छावा और के घालो तो पलट वीर उसी को मारय/ पहली चौकी गणपति की/दूसरी हनुमंत/तीसरी चौकी भैरव/चौथी चौकी रक्षा करण आवे नरसिंह देव/शव्द साँचा पिंड काँचा/ है बचन गुरु गोरखनाथ का जुग जुग साचा/ फुरौ मंत्र ईश्वरी वाचा|

प्रयोग विधि : उपर्युक्त मंत्र में वर्णित देवी देवताओं में से किसी एक के मंदिर अथवा उनके विग्रह के समक्ष अथवा उनके चित्र के समक्ष प्रतिदिन 108 माला जाप 21 दिनों तक करें| इस प्रकार यह शाबर मंत्र सिद्ध हो जाता है| यह एक बहु उपयोगी मंत्र है| इस मंत्र का निम्नलिखित परिस्थितियों में उपयोग किया जा सकता है –

  • भूत-प्रेत से बचाव हेतु रात को सोने से पहले यह मंत्र पढ़ने के बाद बिस्तर के चारो ओर महीन सी रेखा खींच दें और उसके भीतर आराम से सो जाए| अभिमंत्रित रेखा कवच का काम करती है|
  • यदि किसी बच्चे को नज़र लग जाए तो इस मंत्र को पढ़ते हुए मोरपंख से झाड़ने पर नज़र दोष उतर जाता है|
  • यदि ऊपरी हवा के कारण कोई लंबे समय से बीमार हो, कारोबार मंदा चल रहा हो, भूत-प्रेत बाधा हो तो पीड़ित व्यक्ति के घर में जितने दरवाजे हों उतनी कीलें ले ले, उस पर सिंदूर और तेल मिलाकर लगा दें, इसके बाद जितने कमरे हो प्रत्येक कमरे के लिए दस-दस ग्राम उड़द लेकर सभी पर सात-सात बार उपर्युक्त मंत्र को पढ़कर फूँक मारें| अब सभी कमरे में अभिमंत्रित उड़द के दाने छींट दें तथा दरवाजों पर कील ठोंक दें| वह घर ऊपरी बाधा से मुक्त हो जाएगा|

गुरु गोरखनाथ के मंत्र/टोटके/उपाय

  • पान के पत्तों में डंठल होता है, उसे तोड़कर घिस लें तथा तिलत लगांए। ऐसा करने से सम्बंध में मधुरता आती है।
  • यदि पति दूसरी स्त्री के फेर में फंस गया हो, तो ओम काम मालिनी ठः ठः स्वाहा! म्ंात्र का जाप करें।
  • यदि नौकरी के लिए साक्षात्कार का बुलावा हो तो जाने से पहले ख् सहदेवी के पौधे का रस निकाल लें तथा उसमें तुलसी के बीच का चूरा मिलाकर तिलक लगाएं।
  • हरताल और सफेद दुर्वा को पीसकर तिलक लगाएं। ऐसा करने से कारोबार में वृद्धि होती है।
  • केले के रस में कपूर और मैन्सिल मिलाकर तिलक करें तथा बॉस के समक्ष जाएं। वह वशीभूत हो जाएगा तथा आपके हित में फैसले लेगा।
  • 6- गोरख नाथ के शाबर मंत्र ही नहीं उनका स्मरण भी अनेक समस्याओं से मुक्ति देता है|‘ओम चेतन्य गोरखनाथ नमः’ छोटे बच्चो को नज़र दोष से बचाने के लिए यह मंत्र ग्यारह बार पढ़कर उसके पालने के चारो ओर छींट दें| उसे नज़र नहीं लगेगी| घर में कलह मची हो, बरकत नहीं हो रही हो तो इस मंत्र को 108 बार पढ़कर जल अभिमंत्रित कर लें तथा पूरे घर में सिक्त कर दें| घर में शांति स्थापित हो जाएगी|
Tratak sammohan sadhana

Tratak sammohan sadhana


गोरोचन का तिलक, गोरोचन का उपयोग/पहचान, गोरोचन तंत्र टोटके- अगर आपने गोरोचन शब्द को पहले कभी नहीं सुना तो सबसे पहले हम आपको इसके बारे मे बताते है। ऐसा कहां गया है कि गोरोचन का इस्तेमाल पूजा-पाठ मे किया जाता है और ये हमे मर चुकी गाय के शरीर से मिलता है। ये मरी गाय के मस्तक मे एक खास जगह मिलता है, जोकि गोल,चपटे,तिकोने,लम्बे या चौकोर अकार का हो सकता है। गोरोचन का रंग हल्का सा लालिमा लिए हुए पीले रंग का एक सुगन्धित पदार्थ होता है। इसे देख लगता है जैसी कि ये एक मोम की तरह जमा हुआ है, जो बाद मे कंकड़ की तरह सख्त हो जाता है। सुनने मे ये काफी अजीब लगता है पर पूजा-पाठ से लेकर तंत्र-मंत्र मे इसके इस्तेमाल का एक अलग स्थान है। इसके बारे मे ये भी कहा जाता है कि ये जिस जगह भी होता है, या जिस भी व्यक्ति के पास होता है उसके पास देवी शक्ति रहती है और इसकी गंध या स्पर्श से नकारात्मक शक्ति या अन्य दोष दूर रहते है।

गोरोचन से वशीकरण

तो अब गोरोचन के इस्तेमाल के बारे मे और जानते है की कैसे इसकी मदद से आप किसिके ऊपर वशीकरण कर सकते है। किसिकों वश मे करने के लिए रवि पुष्य के दिन अगर जो व्यक्ति गोरोचन को केसर, सिंदूर व आंवले के साथ पीसकर, साधना के उपरांत मंत्रों के जप से अभिमंत्रित करके उसका का तिलक लगाता है, तो उस व्यक्ति को जो भी देखता है, वो उससे वशीभूत हो जाता है। हम आपको गोरोचन मंत्र भी बताते है, जोकि इस प्रकार है: “ॐ शांति शांतः सर्वारिष्टनाशिनिस्वाहः”। दूसरा है: “ॐ ऐं ह्रिं क्लीं नमः योगमायायः मम् वश्यः कुरु कुरु स्वाहः”।

आप गोरोचन को अपने घर में किसी पवित्र जगह रख दे और जैसे किसी देवी-देवता की रोज पूजा करते है, वैसे ही गोरोचन की रोज आराधना करें। ऐसा करने से आप गोरोचन की मदद से अपने घर के सभी वास्तु दोष को निकाल सकते है और साथ ही घर मे सुख-शांति भी बने रहेगी। यही नहीं घर मे अगर कोई सदस्य बीमार है तो रविवार या मंगलवार के दिन गुलाब जल मे थोड़ा सा गोरोचन मिलाकर उस व्यक्ति को पिलाने से ना सिर्फ उसका स्वास्थ्य सही होगा बल्कि गोरोचन के तिलक लगाने से नकारात्मक उर्जा भी दूर होती है और व्यक्ति मे सकारात्मक ऊर्जा आ जाती है।

जैसे की हम जानते है की हर इंसान को ज्यादा से ज्यादा धन कमाने की लालसा रहती है, पर मेहनत करने पर भी धन जमा नहीं हो पता। ऐसे मे अगर आप गुरु पुष्य योग में गोरोचन को अभिमंत्रित करके चांदी या फिर सोने के कवच के साथ अपने घर के किसी सुरक्शित जगह पर रख दे, या स्थापित कर उसकी रोज पूजा करे तो माँ लक्ष्मी की कृपा होती है। आपके पास धन आने लगता है। यही नहीं अगर आपको कभी लगे की आपके घर मे कोई प्रेत बाधा है तो भी गोरोचन एक कारगर उपाय बनकर सामने आता है। इसे समस्या को दूर करने के लिए आप गोरोचन से भोजपत्र के ऊपर दुर्गा सप्तशती का बीज मंत्र लिख दे। जिस व्यक्ति के ऊपर प्रेत-बाधा है यदि वो ऐसा करता है तो उसे समस्या से निजात मिल जाएगा। अगर कोई सफ़ेद अपराजिता की जड़ को गोरोचन के साथ पीसकर उसका तिलक लगाता है तो इससे भी उस व्यक्ति की वशीकरण शक्ति बढ़ती है।

अब हम आपको गोरोचन का वशीकरण मंत्र भी बताते है। मंत्र: “ॐ श्रीं श्रीयै नमः”। हर रोज पूजा करने के बाद गोरोचन की भी धूप या दीपक से से पूजा करे, फिर एक चांदी के ताबीज में भर ले। फिर इसको बंद करने के बाद इसका पंचोंपाचन तरीके से पूजन कर ले और साथ ही रुद्राक्ष की माला से 1 माला जप करके उस ताबीज को अपने हाथ पर धारण कर ले। आप रोज ही नहाने के बाद पूजा कर लेने के बाद गोरोचन का तिलक लगाए। जल्द आपको मंत्र व गोरोचन का लाभ नज़र आने लगेगा।

यही नहीं अगर आप शुद्ध गोरोचन के साथ शुद्ध सिन्दूर व शुद्ध केसर को बराबर मिलाकर एक चांदी की डिबि मे रख दे व प्रात काल सूर्योदय के समय इसी डिबि मे से निकालकर तिलक करते है तो भी आप गोरोचन के विशेष लाभ को देख पाएंगे। ध्यान रहे की तिलक लगते समय आपको ये एक मंत्र पढ़ना होता है: “ऊँ नमः सर्व लोक वशंकराय कुरु कुरु स्वाहा”।

तो उम्मीद करते है की गोरोचन शब्द के बारे मे ना सिर्फ आपको आज पता चला होगा, बल्कि ऊपर बताए इसके तमाम फ़ायदे व उपायों के साथ-साथ तंत्र व मंत्र विद्या को जानकर आप हैरान भी होंगे। गोरोचन बेशक दुर्लभ है, पर इसके असर व उपायों को जानकार हर कोई हैरान हो सकता है, साथ ही ऊपर बताए नुसके बेहद सरल है, जिनहे हर कोई करके इसका लाभ प्राप्त कर सकता है।

Gomti chakra ka tantrik prayog

Gomti chakra ka tantrik prayog


गोमती चक्र एक दुर्लभ प्राकृतिक और आध्यात्मिक उत्पाद, शैल पत्थर का एक रूप है। यह भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र का दिव्य हथियार है| गोमती चक्र गोमती नदी में पाया जाता है| गोमती चक्र भाग्य लाने के लिए माना जाता है और विशेष रूप से आध्यात्मिक और तांत्रिक अनुष्ठानों में प्रयोग किया जाता है। गोमती चक्र के एक ओर खोल की तरह ऊंचा होता है, जबकि दूसरी तरफ चक्कर की तरह जो दिखता है एक सांप की तरह वृत्ताकार डिजाइन के साथ फ्लैट है। इसलिए इसे नाग चक्र भी कहा जाता है । वैदिक ज्योतिष के अनुसार जिन लोगो की कुंडली में ‘नाग दोष’ या ‘सर्प दोष’ है उनके लिए गोमती चक्र फायदेमंद है।

गोमती चक्र के तांत्रिक प्रयोग

आजकल हर व्यक्ति अपने या अपने घरेलू या पेशेवर जीवन में समस्याओं का बहुत सामना करना पड़ रहा है। गोमती चक्र इस तरह की समस्याओं से निपटने में बहुत उपयोगी साबित होते हैं। यहां तक कि अगर एक व्यक्ति अपने जीवन में किसी भी प्रमुख समस्याए नहीं है लेकिन वह अपने जीवन में वृद्धि को प्राप्त करने और भविष्य की समस्याओं से बचना चाहते हैं, तो गोमती चक्रों का उपयोग अत्यधिक की सिफारिश की है। उनका उपयोग कर व्यक्ति को सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। हालांकि यह है कि आवश्यक अभिमंत्रित उपयुक्त मंत्र के साथ वे अपने उद्देश्य की सेवा कर सकते हैं।

गोमती चक्र का महत्व एवं लाभ-

गोमती चक्र वास्तु दोष को नष्ट कर देता है: 11 गोमती चक्र दक्षिण पूर्व दिशा में इमारत की नींव में दफन कर दीजए जिससे वास्तु दोष के बुरे प्रभाव दूर हो जाएगे और घर के निवासियों को लंबे जीवन और समृद्धि का आशीर्वाद भी मिलेगा।
7 गोमती चक्र लाल कपड़े में लपेटकर , लॉकर या कैश बॉक्स में रख दीजिए| इससे देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है और कारोबार में बरकत आती है| एसा भी मानना है कि वो लोग जो गोमती चक्र के अधिकारी है वह हमेशा धन, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के साथ धन्य होते है। गोमती चक्र को बच्चों की रक्षा करने के लिए भी माना जाता है। कुछ क्षेत्रों में, ग्यारह गोमती चक्र एक लाल कपड़े में लपेटकर , इसको चावल या गेहूं कंटेनरों में भी रखा जाता है। यह खाद्य सुरक्षा के लिए होता है।

गोमती चक्र के लाभ –

  • समृद्धि
  • सुख
  • अच्छा स्वास्थ्य और पर्याप्त धन
  • बुरी शक्तियों से बचाता है
  • रोगों से मुक्त करता है
  • व्यवसाय विकास
  • बेहतर भक्ति
  • मन की शांति
  • बच्चो की सुरक्षा
  • समाज में प्रतिष्टा
  • गोमती चक्र का उपयोग –

यह एक यंत्र के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह मंत्र के लिए प्रयोग किया जाता है।

  • कई जैन साध्वी लोग, पूजा के दौरान एक विशेष यंत्र के रूप में, गोमती चक्र का उपयोग करते है।
  • बार-बार गर्भपात होना , दो गोमती चक्र लाल रंग के कपड़े में रख दीजिए और गर्भवती महिला के कमर में बाँध दीजिए इससे गर्भावस्था में पल रहे बच्चे की रक्षा होगी|
  • अगर आप किसी भी अदालत/कानूनी मुद्दों पर है, तो एक गोमती चक्र अपने दरवाजे के प्रवेश द्वार की ओर रखे और सफलता प्राप्त करने के लिए गोमती चक्र पर दाहिने पैर रखकर बाहर कदम रखे।
  • अगर आप दुश्मनों से पीड़ित हैं, तो गोमती चक्र के साथ पत्रों में अपने दुश्मनों का नाम लिखे और उसे जमीन पर गाड़ दे इससे आप शत्रुओ को पराजित करने में सफल हो जाएगे |
  • यदि पति-पत्नी वैवाहिक मतभेद में है, तो 3 गोमती चक्र ले और उन्हें हलूं ब्ल्जद जप करते हुए घर की दक्षिण दिशा में फेंक दे, इससे मतभेद समाप्त हो जाएगा और वैवाहिक जीवन में प्रेम भडेगा।
  • अगर आपके व्यापार में पदोन्नति नहीं मिल रही हैं, तो एक गोमती चक्र शिव मंदिर में शिवलिंग पर प्रदान कीजिए और ईमानदारी से प्रार्थना करते रहिए।
  • व्यापार/समृद्धि बढ़ाने के लिए, दो गोमती चक्र मुख्य प्रवेश द्वार पर लटका दीजिए|
  • यदि 11 गोमती चक्र लाल सिंदूर बॉक्स में रखे, तो यह घर में शांति बनाए रखता है|
  • 11 गोमती चक्र एक लाल कपड़े में लपेटे और चावल या गेहूं कंटेनरों में रखा जाए। तो यह खाद्य सुरक्षा के लिए अच्छा होता है।
  • अगर आप कुछ साक्षात्कार और सफलता पाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण व्यापार सौदों में शामिल हो रहे है तो 3 गोमती चक्र अपने जेब में रखे। इससे आपके व्यापार को मुनाफा होगा |
  • गोमती चक्र की देवी लक्ष्मी के साथ दीवाली पर पूजा की जाती है। ताकि घर में समृधि आ सके |
  • गोमती चक्र भाग्यशाली आकर्षण के रूप में माना जाता हैं और उसे घर, दुकानें, कार्यालय आदि के लिए शांति, सुख और समृद्धि के लिए शुभ भी माना जाता है इसलिए गोमती चक्र को दरवाजे पर एक कपड़े में बांध कर लटकाना चाहिए|
  • यदि घर पर किसी व्यक्ति को अक्सर बीमारी का सामना करना पड़ रहा है तो अभिमंत्रित गोमती चक्र को व्यक्ति के चारो ओर घुमाए और उसको बीमार व्यक्ति के पलंग के साथ बांध दीजिए|
  • गोमती चक्र भय को खत्म कर देता है , निर्णय एवं इच्छा शक्ति को बढ़ाता है। व्यक्ति को गोमती चक्र एक हार के रूप में पहनना चाहिए, यह आपको ऊर्जावान महसूस कराता है और आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
  • गोमती चक्र आपके बच्चे पर बुरी नजर के प्रभाव को निकालता है – अगर बच्चे अक्सर बुरी नजर से प्रभावित है, तो फिर एक सुनसान जगह पर जाए और 3 अभिमंत्रित गोमती चक्र बच्चे के सिर पर सात बार घुमाए (विरोधी दक्षिणावर्त) और उन्हें फेंक दीजिए और वापस देखे बिना अपने घर के लिए आ जाए | यह चार से पांच गुना करते हैं और आप पाएंगे कि आपके बच्चे के लिए काफी हद तक बुरी नज़र से सहेजा गया है।
  • अगर आपको लगता है कि गलत या बुरी नजर किसी भी व्यक्ति के कारण अपने व्यवसाय में विकास बाधित होता है, तो आप 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र 3 नारियल (पूजा के लिए इस्तेमाल किया) के साथ लेना चाहिए यह सबसे महत्वपूर्ण है क्युकी इससे आपके व्यवसाय के विकास में होगा। इसके लिए आप गोमती चक्र और नारियल की पूजा कीजिए| और फिर उन्हें एक पीले कपड़े में बाँध कर उसे अपने द्वार पर लटका दीजिए। यह आपके व्यवसाय को बुरी नजर से बचाने के लिए सबसे अच उपाय है।
  • अभिमंत्रित गोमती चक्र को दीवाली और अन्य शुभ अवसरों के समय मां लक्ष्मी के साथ पूजा करने के बाद स्थापित किया जाता हैं, इससे आपको प्रचुर मात्रा में धन की प्राप्ति होगी और भी तरीके से अपनी हार्ड अर्जित आय को स्थिर करने के लिए रास्ते खुल जाएगे।
  • तो यह है गोमती चक्र के कुछ निम्नलिखित लाभ एवं उपाय जिससे हर कोई अपने जीवन को खुशहाल बना सकता है |
Mithai khila kar kisi ko bhi vash mein kare

Mithai khila kar kisi ko bhi vash mein kare


मिठाई एक ऐसी चीज़ है जो हर मौके पर काम आती है| ख़ुशी जाहिर करने का इससे बढ़िया तरीका हो नहीं सकता| किसी शुभ काम की शुरुआत करनी हो तो वह मिठाई से की जा सकती है| किसी को बधाई देना देना हो तो मिठाई का डब्बा पकड़ा दीजिये, कोई शुभ सूचना देनी हो तो परिजनों को मिठाई खिला दीजिये| यहाँ तक कि गमी में भी भोज के दौरान दरिद्र नारायण और ब्राम्हणों को जिमाने के लिए घर पर हलवाई को बुलाना ही पड़ता है| यानी कोई भी मौक़ा हो हम कह बैठते हैं ‘कुछ मीठा हो जाए| इस मिठाई से एक और काम हो सकता है, वह है किसी को वश में करना| यूं तो वह कोई भी हो आप मिठाई खिलाएंगे तो वह मुस्कुराकर ही देखेगा लेकिन असर थोड़ी देर में चला जाता है| लेकिन अगर उसे विधि सम्मत तरीके से अभिमंत्रित कर दिया जाए तो वह उम्र भर आपसे बंधा रह सकता है|

मिठाई वशीकरण मंत्र/टोटके

वशीकरण के लिए मिठाई इसलिए उपयोग किया जाता है ताकि इसे किसी को देना सरल होता है| किसी बहाने से खिलाया जा सकता है| हर किसी को दाल चावल या सब्जी रोटी नहीं खिला सकते न यह अभिमंत्रित करने में सहज है| सबसे पहले जिसे वश में करना चाहते हैं उसके पसंद की कोई मिठाई ले आए| इसमें ध्यान रखने की बात यह है कि मिठाई ऐसी गाय की दूध का हो जो अपने बछड़े को दूध पिला रही हो| अब अनुष्ठान के लिए शुक्रवार की मध्य रात्रि एकांत कक्ष को पवित्र कर लें| लाल आसन बिछाएं| किसी छोटी चौकी पर कामाख्या देवी की प्रतिमा अथवा चित्र लगाएं| गंगाजल सिक्त कर आस पास का वातावरण पवित्र करें| पूजा स्थान पर जिसका वशीकरण करना हो उसकी तस्वीर भी रखें| अब देवी कि पंचोपचार विधि से पूजा करें| पूजन संपन्न करने के बाद हाथ में जल लेकर 21 हजार मंत्र जाप का संकल्प लें| संकल्प हेतु अपना नाम गोत्र वशीकरण का उद्देश्य आदि स्पष्ट उच्चारित करें| इसके बाद स्फटिक की माला पर निम्नलिखित शाबर मंत्र का जाप करें –

ओम नमो आदेश कामाख्या देवी को!
जल मोहूँ/थल मोहूँ/ वन की हिरनी मोहूँ
बात चलत बटोही मोहूँ/सिंहासन बैठा राजा मोहूँ
नाम मेरो मोहिनी/ मोहूँ सकल संसार
तरीला तारा तोतला/ बिराजै तीनों कपार
सर चढ़े दुश्मन को करू पामाल
दुहाई माता मोहिनी की/ शब्द साँचा पिंड कांचा
फुरौ मंत्र इश्वरी वाचा|

21 हजार जाप सवा महीने में पूर्ण कर लें| प्रतिदिन पूजा के बाद जिसका वशीकरण करना हो उसे प्रसाद अवश्य खिलाएं| सवा महीने पूर्ण होते होते वह आपके वश में आ जाएगा| फिर भी आपको कुछ संशय हो तो सवा महीने के बाद ताज़ी मिठाई खरीदकर हाथ में एक टुकडा रखें, सात बार मंत्र का जाप करें फिर उस प्रिय पात्र को खिला दें| वह वशीभूत हो जाएगा| यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि यदि वशीकरण का उद्देश्य प्रेम हो तो अनुष्ठान हेतु शुक्रवार का दिन चुनें यदि किसी शत्रु का शमन करना हो तो शनिवार का दिन चुने| शत्रु को अभिमंत्रित करने के एक घंटे के भीतर मिठाई खिला दें| वह शांत हो जाएगा| आपके खिलाफ षड़यंत्र रचना बंद कर देगा|

चॉकलेट से वशीकरण करे प्रेम पाए

यह हैरान करने वाली बात हो सकती है, आज तक लौंग, काली मिर्च, तस्वीर आदि की सहायता से वशीकरण की बात कही सुनी जाती रही है| दरअसल प्रक्रिया वही है सामग्री बदल गई है| सामग्री भी ऐसी जिसे हर कोई पसंद करता है| आज ऐसा कौन होगा जिसे एक टुकडा चाकलेट खाना पसंद नहीं होगा| लेकिन इसमें भी ध्यान रखा गया है कि चाकलेट काजू या बादाम वाली हो| बाज़ार में आसानी से मिल जाते हैं| प्रयोग के लिए किसी शुक्रवार की आधी रात को एकांत कक्ष में बैठें हाथ में चाकलेट पकड़कर निम्नलिखित मंत्र का जाप 51 बार करें –

ओम प्रिकालनी धर्तूम दृष्टि अन्न नाग आगमम सिंच्यानी

इस मंत्र का जाप 51 बार करने के बाद 5 बार फूंक मारे| इसके बाद चाकलेट को दीप फ्रीज़र में रख दें ताकि वह पिघल न जाए| अगले दिन स्नान के बाद उस चाकलेट को हाथ में लेकर पुनः 11 बार उक्त मात्र का जाप करें और उस व्यक्ति को खिला दें| वह हमेशा के लिए आपके वश में हो जाएगा| जीवन चाकलेट के सामान मधुर हो जाएगा| प्रिय को वश में करने के बाद उसका मन प्रेम और सम्मान से प्रसन्न रखें| वशीकरण का असर समाप्त होने के बाद भी वह कहीं नहीं जाएगा|

जिस प्रकार किसी अस्त्र शस्त्र से मनुष्य खुद का बचाव करता है उसी प्रकार अपने जीवन में खुशियों को बचाएं रखने के लिए इन मंत्रो या टोटको का प्रयोग करें| किसी को हानि पहुंचाने के लिए ऐसा करना प्राणघातक है| यहाँ एक उदहारण रखना समीचीन है| एक स्त्री को किसी अपनी पड़ोसन से झगडा हो गया| झगड़े की वजह भी कुछ ख़ास नहीं थी| वह खुद अपनी पड़ोसन के सुखी जीवन से मन ही मन जलती भुनती रहती थी| हर दो एक दिन पर पति के साथ सज संवर का पड़ोसन का घूमने जाना देखते हुए उसके तन बदन में आग लग जाती| क्योंकि उसका पति कभी भी उस पर ध्यान नहीं देता था| उस स्त्री ने अपने पति पर वशीकरण प्रयोग करने की बजाय पड़ोसन के पति पर कर दिया| कुछ ही दिन में उसकी हंसती खिलखिलाती गृहस्थी मुरझा गई| अब उसका पति दिन भर उस स्त्री के घर बैठा रहता| अकारण बेचैन रहता| बहाने बना बनाकर मिलने आता| कुछ दिन तक उस स्त्री को लगा वह अपने पडोसी की मालकिन बन बैठी है लेकिन तगड़ा झटका उसे तब लगा जब उसके पति ने उसे तलाक का नोटिस दे दिया| वह पड़ोसी से प्रेम नहीं करती थी बस पड़ोसन को दुःख पहुंचाना चाहती थी| अंततः तलाक कोर्ट कचहरी के चक्कर में ऐसी फंसी की बिना इलाज के बच्चे तक खो बैठी| दरअसल वशीकरण हेतु उसने देवी कामख्या की विधि का सहारा लिया था| देवी देवता शैतान नहीं है जिनसे गुलामों की तरह काम कर सकें| उधर उस पड़ोसन से योग्य पण्डित को बुलाकर जान लिया कि ‘ जो कुछ भी हो रहा वह किसी का किया है| उसने यथायोग्य अनुष्ठान करवाया और अपने पति को वापस पा लिया जबकि दुष्ट स्त्री अपना पति बच्चा दोनों खो बैठी| अतः ऐसे प्रयोगों को सोच समझकर ही करें|

Kali vashikaran shabar mantra for love

Kali vashikaran shabar mantra for love


मां काली के मंत्र के द्वारा एक सफल वशीकरण होता है यह मंत्र इतना सिद्ध होता है कि इसके द्वारा किया गया वशीकरण कभी नाकाम नहीं होता तथा व्यक्ति शीघ्र अति शीघ्र वश में हो जाता है आप अपने प्रेमी यह अपने प्रेमिका को इसके द्वारा वश में किया जा सकता है तथा अपना शीघ्र विवाह तथा मन की इच्छाएं पूर्ण कराई जा सकती हैं।

वशीकरण विधि

यह वशीकरण अत्यंत सरल एवं कार्य सिद्धि करने वाला है इसके लिए आपको किसी मंगलवार के दिन यह कृष्ण पक्ष की अष्टमी को करने से इस वशीकरण का प्रभाव दुगना हो जाता है I इस वशीकरण के लिए सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर मां काली के समक्ष आसन लगा कर बैठ जाना चाहिए तथा अपने समाने एक सफेद पान कत्था लगा हुआ रख लेना चाहिए तथा १०८ बार मंत्र जाप करके पान में फूंक मारकर उसे अब अभिमंत्रित करना चाहिए तत्पश्चात उसको धीरे-धीरे चबाते हुए मंत्र का जाप करना चाहिए यह मंत्र जाप तब तक करना चाहिए जब तक पान पूरी तरह घुल ना जाए उसके बाद थोड़ा सा पानी पीकर १०८बार क्लीं क्री हूं क्रो स्फ्रो कालीकामकला स्फ्रो क्रो क्ली स्वाह: मंत्र का जाप करना चाहिए यह साधना बहुत ही चमत्कारी प्रभाव वाली होती है इसके लिए किसी भी तरह की माला की जरूरत नहीं होती लेकिन प्रयोग के समय वातावरण शांतिमय होना चाहिए तथा किसी एकांत स्थान पर ही यह प्रयोग करना चाहिए। तथा यहव शीकरण साधना के समय मंत्र उच्चारण में विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि कोई भी त्रुटि होने से यह साधना पूर्ण नहीं होगी तथा व्यक्ति आपके वश नहीं होगा।

मंत्र

ॐ ह्री क्लि अमुकी क्लेदय क्लेदय आकर्षय आकर्षय मथ मथ पच पच द्रावय द्रावय मम सन्निधि आनय आनय हुं हुं ऐ ऐ श्री श्री स्वाह:

सावधानियां

तांत्रिक क्रिया अत्यंत तीव्र होती है तथा इससे अत्यंत तीव्र वशीकरण होता है तो इस क्रिया को करने के लिए आप को पूरी तरह शुद्ध होना आवश्यक है तथा आपके मन में कोई भी दोषपूर्ण विचार को निरर्थक माना जाता है जो इस वशीकरण को पूर्ण नहीं करता अपितु आपको कष्ट कारी हो सकता है।

श्मशान काली वशीकरण मंत्र

यह वशीकरण मंत्र अत्यंत ही शक्तिशाली मंत्र है इसके द्वारा किया वशीकरण तुरंत सफल होता है तथा शीघ्र फल देने वाला होता है यह शमशान की तांत्रिक विधि है इसमें तांत्रिक विधि द्वारा शमशान में वशीकरण किया जाता है एवं व्यक्ति को वश में किया जाता है उसके द्वारा अपनी सभी समस्याओं को हल कराया जा सकता है शक्तियां भी प्राप्त की जा सकती है

मंत्र प्रयोग

इस मंत्र प्रयोग के द्वारा अद्भुत शक्ति प्राप्त की जा सकती है तथा एक प्रमुख वशीकरण किया जा सकता है यह वशीकरण साधना के लिए अमावस की रात को उत्तम माना गया है तथा इस साधना को करने के लिए साधक को मरण वशीकरण आकर्षण मोहन उच्चाटन आदि विधियों में निपुणता प्राप्त होती है श्मशान में महाकाली की साधना करने के लिए तांत्रिक यह साधक को शव पर बैठकर साधना करनी होती है तथा मां को शराब ईतर लॉग एक तेल का दीपक जलाकर १०८ बार मंत्र जाप कर सिद्ध किया जाता है एवं प्रमुख वशीकरण किया जाता है अत्यंत शक्तिशाली वशीकरण होता है एवं यह संपूर्ण इच्छाओं को पूर्ण करता है यह मंत्र पूर्ण होते ही इच्छुक व्यक्ति आपके वश में हो जाएगा तथा आपकी समस्त इच्छाएं पूर्ण करेगा इस क्रिया को करने से पहले अपने गुरु की आज्ञा लेना अनिवार्य है तथा इस क्रिया के गलत होने पर इसके दुष्परिणाम आपको प्राप्त हो सकते हैं अतः इसे करने से पहले इसके विषय में पूर्ण रुप से जान लें।

मंत्र:-

शवारुढाम्महाभीमा घोर दृष्टम हँसमुखीम चतुर्भुजाखडक़ मुंड वराभ्यकरा शिवयम
मुंडमाला धारी देवी ललज्जितह्वादिगम्बराम सचिंय्येकत्काली श्मशानालयवासिनीमः

सावधानियां

यह प्रयोग अत्यंत कठिन एवं सिद्धि कारक होता है इसमें की गई कोई त्रुटि का कोई उपाय नहीं है इसके द्वारा किया गया प्रयोग पूर्ण फल देने वाला होता है तथा इसमें मंत्र उच्चारण में विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है एवं यह क्रिया किसी को हानि पहुंचाने के लिए नहीं करनी चाहिए ऐसा करने से यह सिद्ध नहीं होती अपतु आपको इसके दुष्परिणाम प्राप्त हो सकते हैं श्मशान में यह क्रिया करते समय आपको भय लग सकता है तो आप मंत्र यह अपने गुरु की आज्ञा के बगैर ना करें। इस मंत्र साधना के मध्य में आपको भय लग सकता है पर आप पूर्णता अपने मंत्र ध्यान पर लगे रहे किसी अन्य चीज पर ध्यान ना दें।

काली मंत्र टोटके

:- यदि आपके दुश्मन आपको परेशान करते हैं तथा आप को मृत्यु का भय है आपके कार्यों में उनके द्वारा बाधा उत्पन्न की जाती है तो आप मां काली सरण में जाकर एक छोटा सा उपाय कर ले जिससे आपके दुश्मन समाप्त हो जाएंगे तथा आपके दोस्त बन जाएंगे इसके लिए आपको सुबह स्नान कर स्वच्छ होकर लाल वस्त्र धारण कर लाल आसन में बैठकर मां काली की प्रतिमा अपने समक्ष रखें तथा गूग्गल की धूप और एक तेल का दीपक जलाएं और लौंग चढ़ाएं इसके बाद मंत्र जाप करें और अपने शत्रु से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें जप करने के पश्चात १५मिनट तक जल को स्पर्श ना करें यह अर्चना आपको लगातार २७ दिनों करनी होगी ऐसा करने से मां काली प्रसन्न होती हैं तथा आशीर्वाद देती हैं एवं आपके शत्रुओं का नाश कर धन ऐश्वर्य विद्या प्रदान करती है।

मंत्र: ॐ क्री कालिकायै नमः

:-यदि आप के घर में धन की कमी है तथा आपके पास धन नहीं रुकता जिस कारण आपके घर में अशांति है तथा गृह क्लेश होता रहता है और आपका जीवन कष्टमय में हो गया है तो आपको मां काली की शरण में जाना चाहिए तथा माता के मंदिर जाकर २१ दिनों तक लौंग तथा कपूर जलाना चाहिए ऐसा करने से मां प्रसन्न होती हैं तथा मन की इच्छा अनुसार वरदान देती है तथा आपकी समस्त इच्छाओं को पूर्ण कर देती हैं और घर में शांति पुनः स्थापित हो जाती है मां काली को क्रोध का देवी माना जाता है पर उनके प्रसन्न होने पर वह आपकी समस्त इच्छाओं को पूर्ण कर देती हैं एवं अपने भक्तों की हर मनोकामना को शीघ्र अति शीघ्र पूर्ण करती हैं।