Dattatreya vashikaran mantra


भगवान दत्तात्रेय की मंत्र साधना से हर कार्य में सफलता मिलती है भगवान दत्तात्रेय का साबर मंत्र और वशीकरण मंत्र बहुत ही शक्तिशाली है इन मंत्रों से हर कार्य की पूर्ति की जा सकती है भगवान दत्तात्रेय को शिव जी का अवतार माना जाता है जबकि वैश्य समुदाय में भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है बाकी हिंदू धर्म में सभी तथ्यों को बराबर स्थान प्राप्त है माना यह भी जाता है कि यह माता अनसूया की संतान है और इनकी साधना करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है तथा मनवांछित फल प्राप्त होता है .

दत्तात्रेय सधना

भगवान दत्तात्रेय की साधना अत्यंत सरल है एवं इस साधना को करने से आपकी की सभी इच्छाएं पूर्ण होती है इस साधना के लिए सर्वप्रथम उठकर स्नान कर सफेद वस्त्र धारण कर भगवान दत्तात्रय की प्रतिमा को स्थापित कर एवं यंत्र को लाल कपड़े में स्थापित कर विधि पूर्वक चंदन धूप फूल नवेद से आरती करनी चाहिए तथा मंत्र जाप एवं स्रोत का पढ़ा जाना आवश्यक है मंत्र जाप अत्यंत ही प्रभावी होता है निरंतर जाप करने से शीघ्र ही साधक को एक दिव्य प्रकाश दिव्य सुगंध का आभास होने लगता है और यह सा प्रतीत होता है कि उनके समझ कोई देव आत्मा आ गई है और लगातार जप करने से साधक की मनो इच्छाएं पूर्ण हो जाती है

दत्तात्रेय साधना विधि

भगवान दत्तात्रय की आराधना करने से पहले उनका आवाह्न किया जाता है

आवाह्न विधि

भगवान का आवाह्न करने के लिए सर्वप्रथम एक साफ बंद बर्तन में पानी लेकर अपने पास रखना चाहिए और अपने बाएं हाथ में एक गुलाब का पुष्प लेकर उसमें चावल के दाने रखकर मंत्र जाप करना चाहिए मंत्र जाप के पश्चात भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा पर फूल अर्पित करना चाहिए तथा पास में रखें जल से हाथों को धो लेना चाहिए और आप दोनों हाथ जोड़कर भगवान से मंत्रोच्चारण के साथ प्रार्थना करनी चाहिये।

मंत्र-

ॐ अस्यः श्री दत्तात्रेयः स्तोत्रयः मंत्रस्यः नारदः ऋषि: अनुष्टुप छन्द: श्री दत्तः परमात्मा देवता:
श्री दत्तः प्रीत्यर्थे जपे विनोयोग:
जप स्तुति – जटाधरः पाण्डुरंग्न शूलहस्तं कृपानिधिमः सर्व रोग हरं देवः दत्तात्रेयमहं भजः

वशीकरण साधना

यह वशीकरण बहुत ही प्रभावी होता है एवं इस वशीकरण के द्वारा जातक अपनी इच्छाओं की पूर्ति दूसरे जातक से करा सकता है इस वशीकरण के प्रयोग से जातक की आकर्षण शक्ति मैं वृद्धि होती है वह कोई भी व्यक्ति उसको देखकर उसकी तरफ सम्मोहित होने लगता है पर इसका उपयोग हमें द्वेष की भावना से नहीं करना चाहिए

सधना विधि

यह साधना जातक को बुधवार की रात्रि में करनी चाहिए इसके लिए सर्वप्रथम जातक स्नान कर स्वच्छ होकर पीले वस्त्र धारण कर उत्तर पूर्व दिशा में भगवान दत्तात्रय की चौकी स्थापित करें और उस चौकी पर पीला वस्त्र बिछाए एवं मूर्ति और यंत्र स्थापित करें जातक को पीले आसन का प्रयोग करना चाहिए फिर भगवान दत्तात्रेय के यंत्र के पास सिंदूर रखें और घी का दीपक जलाकर हाथ जोड़ कर भगवान दत्तात्रय के मूल मंत्र का 11 बार जप करना चाहिए और भगवान से अपनी मनोकामना पूर्ण की प्रार्थना करते हुए उस सिंदूर को किसी चांदी के डिब्बी में रख लेना चाहिए और उस सिंदूर का प्रयोग आप जब भी करेंगे आपको देखने वाला व्यक्ति मोहित हो जाएगा यदि आप किसी कार्य हेतु या किसी व्यापार संबंधित कार्य में जा रहे हैं और इस सिंदूर से आपने मस्तक में तिलक किया है तो आपको देखने वाला व्यक्ति वशीभूत हो जाएगा और आपका कार्य सर्वप्रथम पूर्ण होगा यदि किसी स्त्री का पति उस से प्रेम नहीं करता है और अन्य स्त्रियों के संपर्क में रहता है तो उस स्त्री को सुबह स्नान कर स्वच्छ होकर इस सिंदूर से अपनी मांग को भरना चाहिए इससे आपका पति गलत संगत को छोड़कर आपको पुनः प्राप्त हो जाएगा और अन्य स्त्रियों से उसके संबंध विच्छेद हो जाएंगे

मंत्र – ॐ श्रीह् हृीं क्लिंनः ग्लौं द्रामः दत्तात्रेयायः नमहः

दत्तात्रेय तंत्र साधना

ब्रह्मा विष्णु महेश की शक्तियों से संपन्न भगवान दत्तात्रय की तंत्र विद्या से सभी कार्य पूर्ण हो जाते हैं और मनोकामना पूर्ण होती है यह साधना मध्य रात्रि को प्रारंभ करनी चाहिए और इसका विधि पूर्वक समापन करना चाहिए

साधना विधि

भगवान दत्तात्रेय की इस साधना को साधक किसी भी शुभ दिन प्रारंभ कर सकता है इसके लिए साधक को रात्रि में स्नान कर स्वच्छ होकर लाल वस्त्र धारण कर लाल आसन पर उत्तर दिशा की तरफ मुख कर बैठ जाना चाहिए और भगवान दत्तात्रेय का ध्यान करते हुए एक बजोट की स्थापना करनी चाहिए और अपने समझ इसको शुद्ध घी से निर्मित करें तथा मंत्रों द्वारा उसमें प्राण प्रतिष्ठा करें तथा पारद शिवलिंग को स्थापित करना चाहिए तथा इस शिवलिंग के पास भगवान दत्तात्रय की प्रतिमा या यंत्र को स्थापित करें और पूर्ण विधि विधान से पूजन करें जतक को यंत्र और चित्र की पूजा सर्वप्रथम करनी चाहिए तत्पश्चात आप शिवलिंग की आराधना करें|

तेल का दीपक जलाकर गूगल की धूप से से शिवलिंग की पूजा करें एवं भोग लगावे भोग में आप किसी भी वस्तु का प्रयोग कर सकते हैं शिवलिंग की पूजा के पश्चात आप रुद्राक्ष की माला से 21 बार भगवान दत्तात्रय के मंत्रों का जाप करें और उनसे मनोकामना को पूर्ण करने की स्तुति करें इस आराधना में केवल आपके द्वारा गुरु मंत्र का ही उपयोग करना चाहिए या आप अपने गुरु से परामर्श ले सकते है मंत्र जाप पूर्ण होने के पश्चात साधक को भगवान दत्तात्रेय की वंदना करते हुए उनको अपने स्वप्न में प्रकट होने की प्रार्थना करनी चाहिये तथा साधना में प्रयोग की गई माला को अपने सिरहाने रख कर सो जाएं भगवान दत्तात्रेय आपको रात्रि में स्वप्न में स्त्री के रूप में दर्शन देंगे और आप की हर मनोकामना पूर्ण करेंगे तथा प्रयोग की गई माला को आप कई बार उपयोग कर सकते हैं एवम् अपनी हर इच्छा की पूर्ति कर सकते हैं

मंत्र – ॐ द्रां द्रिं द्रुं दत्तात्रेयायः स्वप्ने प्रकटहः प्रकटहः अवतरम् अवतरम् नमहः

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