भूत-प्रेत बाधा हेतु


यह भूत प्रेत की बाधा दूर करने के लिए इस यन्त्र का प्रयोग किया जाता जो विधि के अनुसार प्रयोग किया जाना है

प्रयोग विधि

यन्त्र बनाने के बाद यन्त्र पर देशी पान गुलाब के फूल चढ़ायें तथा धूप-दीप देकर पूजा करें, फिर उसे सफेद कपड़े में लपेटकर फलीता बना लें तथा दीपक में सुगन्धित चमेली का तेल भरकर उसमें वह बत्ती डालकर मिट्टी द्वारा लीपे गए स्थान पर रखें। दीपक के सामने हिना का इत्र गुलाब के फूल तथा मिठाई को रखें। जब दीपक जल जाये तब भूत-प्रेत बाधा से ग्रस्त रोगी को अपनी निगाह टीक की लौ पर रखने के लिए कहें। इस प्रयोग से शैतानी बाधा शान्त हो जाती है।

भूत-प्रेत बाधा हेतु

After making the yantra, offer native paan roses on the machine and offer incense-lamp, then wrap it in a white cloth and make it a pod, and fill it with fragrant jasmine oil in the lamp and put that light in it and keep it in a place covered by soil. Put rose flower and sweets in front of the lamp. When the lamp burns, then ask the patient suffering from ghosts and hindrances to keep their eyes on the flame of the teak. Satanic hindrance is calmed by this use.

भूत-प्रेत का गण्डा

“ओम नमो आदेश गुरु को लड़गढ़ी सों मुहम्मद पठाण
चढया श्वेत घोड़ा श्वेत पलाण भूत बाँधि प्रेत बाँधि
चौसठ जोगिनी बाँधि अड़सठ स्थान बाँधि, बाँधि,
बाँधिरे चोखी तुरकिनी का पूत बेगि बाँधि जोतू न
बाँधे तो अपनी माता की शैया पर पांव धरे,
मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा।”

तांत्रिक को चाहिए वह थोड़ी मिठाई तथा दीपक को सामने रखकर लोबान की धूनी दे तथा रोगी के सिर से लेकर एड़ी तक सात रंग का डोरा नाप कर उक्त मन्त्र को पढ़ते हुए उसमें 31 गाँठें लगायें। फिर उसे रोगी के गले में बाँध दे। इस गण्डे को पहनने से भूत-प्रेत का दोष दूर हो जाता है।

पीर का मन्त्र

“ओम नमो हाकान्त जुगराज फाटंत काय जिस कारण
जुगराज में तोकों ध्याया, हंकारत जुगराज आया धारत
आया सिर के फूल बखेरत आया और की चौकी उठावन्त
आया, अपनी चौकी बैठावंत आया और का मिवाड़
तोड़ता आया, आपना किवाड़ भेड़ता आया, बांधि
बाँधिकिसको बांधि, भूत को बाँधि प्रेत को बाँधि,
देव-दानव को बाँधि, उड़न्त गड़न्त योगिनी को बाँधि,
चीर-चिरणागार को बाँधि, तिरसठ कलुवा को बाँधि,
चौसठ जोगिनी को बाँधि, बावन वीर को बाँधि,
आकाश की परियों को बाँधि, डाकिनी-शाकिनी को बाँधि,
चेटक को बाँधि, छल को बाँधि, विद्र को बाँधि, द्वार
को बाँधि, हाट को बाँधि, गली को बाँधि, गिरारे को
बाँधि, किया को बाँधि, कराये को बाँधि, अपनी को बाँधि,
पराई को बाँधि, लीली को बाँधि, पीली को बाँधि,
स्याह को बाँधि, सफेद को बाँधि, लाली को बाँधि,
बाँधि-बाँधि रे गढ़ गजनी के मुहम्मदापीर चलै
तेरे संग सत्तर सौ बीर, जो बिसरि जाय तो सौ
राजा हलाल जाय, उल्टी मार, पछाड़ मार, धाड़ मार,
कजा चढ़ाय, सुड़िया हलाय, शीश खिलाय,
शब्द साँचा पिंड काँचा फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा।”

उपरोक्त मन्त्र को पहले सिद्ध कर लें। भूत-प्रेत बाधा ग्रस्त व्यक्ति को सामने बिठाकर 108 बार झाड़े। भोग में कच्चा मांस, कच्ची मदिरा, हिना का इत्र, गुलाब के फूल और मीठा रखें। इस प्रयोग से भूत-प्रेत बाधा शान्त होती है। इस भोग को चौराहे पर रख दें।

बला दूर करने का मन्त्र

“याहि सार सार जिन्न देय परी जबर कुफार एक खाई दसरी
गिर्द पसार बगिव मलायक असचार दायें दस्त रखे जिब्राईल,
बायें दस्त रखे मीकाईल, पीठ रखे इस्त्राफील, पेट रखे इज्राईल,
दस्त चपटसन दस्त रास्त हुसैन पेशवा मुहम्मद गिर्द बगिर्द
अली ला इलाह कोट इल्लिल्लाह की खाई हजरत अली की
चौकी बैठी मुहम्मद रसूलिल्लाह की दुहाई।”

उपरोक्त मन्त्र को 31 बार पढ़कर चारों ओर हाथ फिराकर ताली बजाने से दिशा बन्धन होता है। मसान आदि का प्रकोप होने पर इस मन्त्र से झाड़ा करने पर रोगी तुरन्त स्वस्थ होता है।

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