Powerful Maa Kali Raksha Mantra


This is such a mantra that this mantra is prevalent till Madari and Road Chhapi Bazigro, but no one has a law for this and today with this mantra all are giving legislation, but you should do this only with your Guru Agya without the instructions of the Guru no mantra should do this legislation, it is good for you and for your own

Very Powerful Maa Kali Raksha Mantra

ॐ काली महाकाली इन्द्र की बेटी बह्मा की साली,
उड़ बैठी पीपल की डाली दोनों हाथ बजावै ताली,
जहाँ जाय वज्र की ताली वहाँ ना आवे दुश्मन हाली,
दुहाई कामरू कामाक्षा नैना योगिनी की ईश्वर महादेव,
गौरा पार्वती की दुहाई वीर मसान की,

This mantra has to be chanted for eleven thousand times on the day of Ashwin Dussehra (Dashami).
Time kept on invoking Guggul in the fire of condo and on the day that mantra has to be proved
Fasting should be fruit or milk, and in the chanting time, the seeker should complete his posture or
Should be descending, make a square machine made of flour and draw a line from vermilion in the middle.Take and install the urn in the middle and fill it with barley till the lid is placed on it.
Put a lamp in it, and with chanting the mantra, the ghee goes on giving smoke to Google and camphor like this Mantra effectively provides protection to the seeker and then uses it elsewhere If you want to, then read the mantra three times instead of clapping and chanting the mantra around you, the security circle Make it gives you protection.

बहुत पावरफुल माँ काली रक्षा मंत्र

ये एक मंत्र ऐसा है जो मदारी ओर सड़कछाप बाजीगरो तक ये मंत्र प्रचलित है पर इसका विधि विधान किसी के पास नही है ओर आज आपको इस मंत्र के साथ पुरा विधि विधान दे रहे है पर आपको ये अपने गुरु आग्या लेकर ही करे बिना गुरु के दिशा निर्देश के कोई भी मंत्र विधान ना करे यही अच्छा है आपके लिए ओर आपके अपने के लिये

|| मंत्र ||

ॐ काली महाकाली इन्द्र की बेटी बह्मा की साली,
उड़ बैठी पीपल की डाली दोनों हाथ बजावै ताली,
जहाँ जाय वज्र की ताली वहाँ ना आवे दुश्मन हाली,
दुहाई कामरू कामाक्षा नैना योगिनी की ईश्वर महादेव,
गौरा पार्वती की दुहाई वीर मसान की,

विधि

इस मंत्र को आश्विन दशहरे (दशमी )के दिन ग्यारह हजार बार जप हवन करना है जप क्रिया करते समय कंडो की अग्नि मे गुग्गुल की आहति देते रहे ओर जिस दिन मंत्र सिद्ध करना है उस दिन उपवास रखे फल फूट या दुध का सेवन करे ओर जपकाल मे साधक अपने आसन को पुर्वमुखी या उतरमुखी ही होना चाहिए एक चौकोर यंत्र आटे से बना ले ओर उसके बीच मे सिन्दूर से लाइन खीचे ले ओर उसके बीच मे कलश स्थापित करे ओर उस पर ढक्कन लगने तक जौ से भर दिजिये ओर उसमे दीपक लगा दिजिये ओर मंत्र जप के साथ घी गूगल ओर कपूर की धुनी देते जाये इस तरह मंत्र प्रभावी होकर पूणेतया साधक को सुरक्षा प्रदान करता है फिर किसी जगह इसको इस्तेमाल करना है तो मंत्र पढते हुये तीन बार ताली बजाये ओर अपने चार ओर मंत्र को जपते हुये सुरक्षा घेरा बना लिजिये इससे आपको सुरक्षा प्रदान होती है

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