जानें आपकी कुंडली में राजयोग है या नहीं


राजयोग कुंडली, महर्षि पंतांजलीद्वार बताये गए अष्टांग योग को ही राजयोग कहा जाता है. इन आठ अंगों में सभी तरह के योगों का समावेश पाया जाता है.यह माना गया है की भगवन बुद्ध द्वारा बताया गया अष्टांगिक मार्ग भी इन आठ अंगों का हिस्सा है. परन्तु अष्टांग योगों की रचना बुद्ध के काल के बाद की है.

राजयोग कुंडली

यही कारण है की अष्टांग योग बुद्ध द्वारा बतए गए योग से ज्यादा प्रचलित एवं महत्पूर्ण है महर्षि पतंजलि द्वारा बताये गए योग को लिखित रूप में संगृहीत कर योग-सूत्र की रचना की गयी. योग सूत्र की रचना ने पतंजलि को योग पिता के रूप में प्रचलित करवाया.

राजयोग कुंडली

अष्टांग योग जो की समावेश है यम, नियम, आसान, प्राणायाम, प्रत्याहार , धारणा,ध्यान और समाधी . इन सभी अंगों के अपने-अपने उप अंग हैं. वर्तमान काल में जिन अंगों का प्रचलन है वो इस प्रकार से हैं ध्यान, प्राणायाम और आसान.

राज योग को अलग अलग संधर्वों में अलग अलग अर्थों से जाना जाता है. यदि हम ऐतिहासिक काल की बात करें तो योग की अंतिम अवस्था अर्थात समाधी को राजयोग माना गया है. परन्तु आधुनिक काल में इसे हिन्दुओं के छः दर्शनों का अभिन अंग माना गया है .

राजयोग कुंडली

राजयोग को सभी योगों का राजा माना गया है.क्यूंकि इसमें सभी योगों की कुछ न कुछ समामिग्री होती है. इसमें महर्षि पतंजलि द्वारा रचित अशांगों का वर्णन पाया गया है.यह माना गया यह विषय चित्तवृत्तियों के निरोध करने का है,यह मनुषय को ज्ञान, ख्याति,धन, आदि की प्राप्ति कराता है.

मनुषय में आपर शक्ति और ज्ञान का आवास होता है.राजयोग इन शक्तियों को जागृत करने का मार्ग प्रदर्शित करता है.,इसमे समाहित चित वालों के लिए अभ्यास तथा वैराग्य चित वालों के लिए क्रियप्रयोग का सहारा लेते हुये आगे बढ़ने का मार्ग बताया गया है .

राजयोग कुंडली

मनुषय स्वभाव चंचल होता है वह एक वास्तु पर स्थिर नहीं रहता है .राजयोग इस चंचलता को काबू कर मन को ेकागर करता है.

ज्योतिष में राजयोग के ३२ प्रकार बताये गयें हैं . यदि आपकी कुंडली में ३२ प्रकार के सभी योग पूर्ण रूप से घटित होजाते हैं तोह आप सम्पूर्ण सुख की प्राप्ति करते हैं..

राजयोग प्राप्ति के मंत्र कुछ इस प्रकार से हैं

घरकेउत्तर-पश्चिमकोणमेंमिट्टीकेपात्रमेंकुछसोने-चांदीकेसिक्केलालवस्त्रमेंबांधकररखें।फिरपात्रकोगेहूंयाचावलोसेभरदें।इससेधनकाअभावनहींरहेगा।

बुधवारकेदिनगायकोअपनेहाथोंसेहरीघासखिलायेतोआर्थिकस्थितिकीअनुकूलताकायोगबनेगा।

पीपलकेपांचपत्त्ोलेकरउन्हेंपीलेचंदनसेरंगकर,बहतेहुएजलमेंछोड़दें।यहउपायशुक्लपक्षसेआरंभकरें।गुरुपुष्पनक्षत्रहोतोबहुतअच्छाहै।

राजयोगकेलक्षणमनुषयकेशारीरअथवाकुंडलीदोनोंपरहीहोतेहैंपुरुषकेदाहिनेअथवास्त्रीकेबांयेअंगपरराजचिन्हकाहोनाउनकेराजयोगकोदर्शाताहै .

यहमानगयाहैकीजिनलोगोंकेपाँवकेतलवोंपेअकुंश, कडुंलयाचक्रकानिसानहोताहैवहकिसीबड़ेराष्ट्रकेशासकबनतेहैंतथाऐसेलोगोंकोसर्वश्रेष्ठशासकभीमनजाताहै.

मनुषयकीकुंडलीमेंनवेंऔरदसवेंस्थानकाबड़ामहत्वहोताहै.नवीनस्थानपरउसकाभाग्यतथादसवेंस्थानपरउसकेकर्महोतेहैं.

यदिजन्मकुंडलीकेनौवेंअथवादसवेंस्थानपरसहीग्रहमौजूदरहतेहैंतोऐसीपरिस्थितियोंमेंराजयोगकानिर्माणहोनासंभवहोजाताहै।

यहएकऐसायोगहैजोप्रत्यक्षअथवाअप्रत्यक्षराजाकेसमानसुखप्रदानकरवाताहै।इसयोगकीप्राप्तिमनुषयकोसभीसुखोंकीप्राप्तिकरवाताहै.

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