जिन लोगों की कुंडली में होते हैं ये खास योग, उन्हें मिलती है सुंदर पत्नी


किशोरावस्था से ही लड़के भावी जीवनसाथी के लिए सपने बुनने लगते हैं, सुन्दर पत्नी की चाह तो सभी को होती है, शायद ही कोई ऐसा हो जिसे सामान्य रंगरूप वाली पत्नी चाहिए| कल्पना में एक रेखाचित्र होता है जिसमें अपनी मर्जी से शादी होने तक रंग भरने का सिलसिला चलता रहता है| किसी को ऐसी पत्नी चाहिए जो पूरी तरह उसी के प्रति समर्पित हो, किसी को धनी पत्नी चाहिए तो किसी को कुछ और| वास्तविकता इससे परे होती है, यह नियति तय करती है कि किसे कैसी पत्नी मिलेगी| कुंडली के योग, पूर्वजन्म का प्रेम, संचित पुण्य जैसे कई कारक इसमें महत्वपूर्ण योगदान देते हैं|

कुंडली में सुन्दर पत्नी के योग

वैसे वैवाहिक जीवन के प्रारंभ में ही पत्नी का सुन्दर होना मायने रखता है| घर गृहस्थी चल निकलने के बाद यह बात गौण हो जाती है| कई असुंदर लडकियां भी अपने व्यवहार से पति का मन मोह लेती हैं| इसलिए यह बात ध्यान रखें सूरत से कहीं ज्यादा सीरत महत्वपूर्ण है| तथापि कुंडली में कुछ ऐसे योग बनते हैं जिससे पता लगाया जा सकता है कि भावी पत्नी सुन्दर होगी अथवा नहीं| कुछ प्रमुख योग का विवरण इस प्रकार है –

  • पत्नी के सौन्दर्य के सम्बन्ध में जानना हो तो लड़के की कुंडली में सातवें भाव को ध्यान से देखना चाहिए| अगर सातवें भाव का स्वामी कोई शुभ ग्रह हो और वह उसी भाव में उपस्थित हो, उस पर किसी क्रूर ग्रह की दृष्टि भी न हो तो पत्नी सुन्दर सौम्य और सुशील मिलती है|
  • सातवें भाव का स्वामी ग्यारहवें भाव में उपस्थित हो तो इस स्थति में भी रूपवती पत्नी मिलती है|
  • क्शारीरिक सम्बन्ध कैसे रहेंगे यह कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति से तय होता है, यदि वह उच्च भाव में है तो निसंदेह शयनकक्ष का माहौल मधुर और प्रेमिल रहेगा| सप्तम भाव में शुक्र उपस्थित रहे तो पत्नी सुन्दर मिलने की संभावना प्रबल रहती है| अगर सूर्य तुला या मकर राशि का न हो तो सातवें में भाव में शनि, राहू, केतु के होने से भी फर्क नहीं पड़ता| इसके लिए जानकार कुंडली विशेषज्ञ से परामर्श ली जा सकती है|
  • अगर सातवें भाव में वृषभ या तुला राशि हो, तो इस स्थिति में भी सुन्दर पत्नी मिलती है| ऐसा होने पर शादी के बाद किस्मत बुलंद हो जाती है, चमत्कारिक रूप से भाग्योदय होता है| इसके पीछे कारण यह है कि पत्नी सुन्दर होने के साथ चतुर, मधुर वचन बोलने वाली, कला से प्रेम करने वाली और संस्कारी होती है| ऐसा जीवन साथी मिले तो भाग्योदय होना स्वाभाविक ही है|

पतिव्रता पत्नी योग

सबसे पहले पतिव्रता शब्द के अर्थ को समझे, इसे हम प्राचीन मान्यता के अनुसार ग्रहण नहीं कर सकते| प्राचीन काल में स्त्रियाँ अपने को पतिव्रता सिद्ध करने के लिए पति की मृत्यु के बाद उसकी चिता पर बैठकर आत्मदाह कर लेती थीं| आज यह संभव नहीं है| वर्तमान में इसका अर्थ व्यापक है अर्थात ऐसी पत्नी जो अपने पति को समझे, उसकी परेशानी को समझे, विवाहेत्तर सम्बन्ध बनाने की कुप्रवृत्ति न हो, कठोर वचन न बोलती हो और किसी भी परिस्थिति में पति को त्यागने का विचार मन में न लाती हो| इसके साथ ही पतियों की जिम्मेदारी होती है कि सहचरी की भावनओं को समझे, उसके साथ हिंसक व्यवहार न करे, उसे नीचा न दिखाए आदि| कुछ लड़कियों के कुंडली में ही यह दर्ज होता है कि वह पति के प्रति समर्पित रहेगी चाहे कुछ भी हो जाए वह साथ नहीं छोड़ेगी| उदाहरण के लिए कुछ प्रमुख योगों का विवरण इस प्रकार है –

  • अगर सप्तम भाव का स्वामी चौथे भाव में या दसवें भाव में उपस्थित हो तो वह लड़की अपने पति से बहुत प्यार करती है|
  • सप्तम भाव का स्वामी गुरु के साथ हो या फिर सातवें भाव में ही उपस्थित हो साथ ही गुरु पर शुक्र या बुद्ध की दृष्टि हो तो लड़की जीवन भर अपने पति से बंधी रहती है|
  • लग्नेश और शुक्र एक साथ रहे साथ ही उन पर गुरु की दृष्टि हो तो लड़की अपने पति के अलावा किसी अन्य के बारे में सोच भी नहीं सकती|
  • सप्तमेश उच्च स्थिति में गुरु के साथ हो, और चौथे भाव का स्वामी किसी भी दो शुभ ग्रह के बीच उपस्थित हो तो यह स्थति भी आदर्श है| जन्मकुंडली में ऐसा योग होने का अर्थ है कि लड़की जीवन भर अपने पति के प्रति ईमानदार रहेगी और उसी से प्रेम करेगी|
  • अगर सातवें भाव में मंगल शुक्र के नवांश और उन पर किसी शुभ गृह की दृष्टि भी हो तो ऐसी लड़की अपने पति से बहुत प्रेम करती है|

मनचाही पत्नी पाने के उपाय

कहते हैं –हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले| यानी बात बात जीवनसाथी की हो तो लड़कों का मन अनंत कल्पनाओं से भर जाता है| इसलिए सबसे पहले अपने स्वाभाव का, जीवन शैली, आर्थिक स्थिति आदि के बारे में विचार करते हुए सोचें कि किस प्रकार की स्त्री के साथ आप निभा पाएंगे, एक तरफ़ा अपेक्षा जीवन को दुखो से भर देता है| इसलिए व्यावहारिक सोच रखते हुए तय करें आपको कैसी पत्नी चाहिए और निम्नलिखित उपाय करें –

एक पीढ़े पर नया लाल कपड़ा बिछा दें, उस पर देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें या चित्र रखे, पंचोपचार विधि से पूजा करें, लाल गुलाब इत्रादि अर्पित करें और मंत्र का जाप करें –

पत्नीं मनोरमां देहि, मनोवृत्तानुसारिणीम
तारिणी दुर्ग संसारसागरस्य कुलोद्भावाम||

मनचाही पत्नी पाने के लिए सुन्दर काण्ड का पाठ भी लाभकारी होता है| किसी पीढ़े को धो कर उस पर नया लाल कपड़ा बिछा लें उस पर हनुमानजी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें और लगातार नौ दिनों तक पाठ करें| इसमें भी पहले दिन एक बार दूसरे दिन दो बार तीसरे दिन तीन बार, इसी क्रम से नौवें दिन नौ बार पाठ करें| गुड़ चने का भोग लगाएं| इस पूजा से बार बार सगाई टूट रही हो तो भी सुन्दर सुशील पत्नी मिलती है|
अंततः कुछ बातों का ध्यान रखें कि असंभव गुणों से युक्त स्त्री पत्नी के रूप कल्पना न करें निराशा होगी तथा खुद को भी परखें| तालमेल सहयोग और प्रेम अपनी तरफ से भी रखें जीवन सुखमय रहेगा|

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