कर्ज से छुटकारा पाने के अचूक उपाय

कर्ज से छुटकारा पाने के अचूक उपाय

वर्तमान युग में कर्ज लेना सामान्य सी बात हो गई है| विश्व भर की आर्थिक व्यवस्था बैंकिंग के स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है| यदि आपके पास नियमित आय है तो दुनिया भर के ऐशो आराम का साधन आप कर्ज से जुटा सकते हैं| भले ही वेतन का चौथाई हिस्सा ही घर क्यों ना आए दिखावे के लिए लोग कर्ज पर कर्ज लेते चले जाते हैं| समस्या तब आती है जब नियमित आय का साधन समाप्त हो जाता है| भारी भरकम कर्ज से लदी ज़िंदगी वहीं थककर हाँफने लगती है| कई बार मजबूरी में भी इंसान को कर्ज लेना पड़ता है, जैसे व्यापार में नुकसान, बड़ी बीमारी, बेटी-बहन की शादी आदि| प्रत्येक व्यक्ति जो हृदय वास्तव में ईमानदार है, यही सोचता है कि अमुक पैसा आने के बाद चुका दूंगा परंतु बदकिस्मती पीछा नहीं छोड़ती, वह पुराना कर्ज चुकाने की बजाय नया कर्ज लेने पर मजबूर हो जाता है| यह एक ऐसा दलदल है जिसमे एक बार फँसने के बाद इंसान उम्र भर तड़पता रह जाता है|

क़र्ज़ से छुटकारा पाने के उपाय

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में कर्ज से छुटकारे के लिए अनेक निदानों का वर्णन किया गया है| हृदय में विश्वास रखते हुए, इन्हें आजमाने से आय के नूतन स्तोत्र खुलते हैं जिससे इंसान सहज ही कर्ज मुक्त हो जाता है| आप निम्नलिखित में से किसी भी उपाय को अपनी सुविधानुसार अपना सकते हैं –

  • मिट्टी के एक दीये में सरसो का तेल डालकर उसे ढक दें| शनिवार को सूर्यास्त की बेला में किसी नदी तट अथवा तालाब के किनारे उसे गाड़ दें|
  • घर अथवा दफ्तर में गौ के सम्मुख वंशी बजाते श्री कृष्ण का चित्र लगाएँ| इससे कर्ज चढ़ता ही नहीं है तथा पैसा डूबता नहीं है|
  • मंगलवार को कर्ज न लें वरना सरलता से चुकाना संभव नहीं होता| परंतु लिए हुए कर्ज का भुगतान मंगलवार से करना प्रारम्भ करें|
  • सर्व सिद्धि बीसा यंत्र धारण करें|
  • चांदी का एक पत्ता, 5 गुलाब के फूल, अक्षत तथा गुड लेकर श्वेत वस्त्र में बांध लें तथा 21 बार गायत्री मंत्र का पाठ करें, तदुपरान्त उसे बहते हुए जल में बहा दें|
  • प्रति दिन शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएँ|
  • मंगलवार से प्रारम्भ कर प्रतिदिन ऋण मोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें|
  • प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें|
  • शनिवार के दिन किसी श्मशान के कूएँ से जल लेकर आएँ तथा उसे पीपल के पेड़ की जड़ में डाल दें| यह क्रिया निरंतर 6 शनिवार तक दोहराएँ|
  • प्रत्येक मंगलवार को ऋण मुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ करें|
  • मसूर की धुली दाल मंगलवार के दिन दान करें|
  • घर के ईशान कोण को सदैव साफ-सुथरा रखें|
  • दीवाली की रात लक्ष्मी पूजन के समय 21 हकीक के पत्थरों की भी पूजा करें और अपने घर में ही कहीं गाड़ दें|
  • शनिवार के दिन अपनी लंबाई के बराबर धागा लेकर उसे एक नारियल पर लपेट दें, धूप-दीप दिखाएँ तथा बहते हुए जल में बहा दें|

कर्ज उतारने के मंत्र

पूजा-अर्चना तथा मंत्रोच्चारण मन में शांति का संचार करते हैं| परिणामस्वरूप आपके आस-पास सकारात्मक ऊर्जा तरंगे निर्मित होने लगतीं हैं| इससे प्रयत्न के लिए नई दिशा मिलती है, जो शतप्रतिशत सफल होती हैं| अतः नीचे कुछ सरल मंत्रों का विवरण भी दिया जा रहा है-

मंत्र – 1

‘ओम ह्रीं महालक्ष्मी च व‌िद्महे व‌िष्‍णुपत्नीं च धीमह‌ि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ह्रीं ओम,

विधि: कमलगट्टे की माला पर नियमित रूप से उक्त मंत्र का नित्य 1008 बार जाप करें|

मंत्र –-2

ओम आं ह्रीं क्रौं श्रीं श्र‌ियै नमः ममालक्ष्मीं नाशय नाशय ममृणोत्तीर्णं कुरु कुरु संपदं वर्धय वर्धय स्वाहा।’

विधि: 44 दिनों में दस हजार जाप का संकल्प लेकर पूर्ण करें|

मंत्र -3

“ॐ ऋण मुक्तेश्वर महादेवाय नम:”

विधि: मंगलवार के दिन शिव मंदिर में शिवलिंग के ऊपर मसूर डाल अर्पित करते हुए उक्त मंत्र का जाप करें|

आर्थिक तंगी के हटाने उपाय

आर्थिक तंगी से परेशान व्यक्ति ही जरूरत के समय किसी से कर्ज लेता है| इसे अपना दुर्भाग्य मानकर हार मान लेने की बजाय परिश्रम के द्वारा धन उपार्जन करने का प्रयत्न करें साथ ही निम्नलिखित उपाय में से कोई भी उपाय अपनी इच्छानुसार आज़माएँ|

  • शंकराचार्य द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें|
  • आदत में शामिल करते हुए जब भी बाहर से घर लौटकर आएँ कुछ न कुछ लेकर आएँ, अर्थात हाथ खाली नहीं होना चाहिए|
  • काला तिल लेकर परिवार के सभी सदस्यों के ऊपर से उसारकर उत्तरदिशा में फेंक दें| धनहानि समाप्त होता है|
  • प्रत्येक गुरुवार को सुहागन स्त्री को सुहाग सामग्री दान करें|
  • घर के मुख्य दरवाजे पर सरसो के तेल का दीपक लगाएँ| उस दीपक में बचे हुए तेल को संध्या काल में अगले दिन पीपल के पेड़ पर चढ़ा दें| ऐसा निरंतर 7 शनिवार तक करें|
  • चमकीले वस्त्र में एक नारियल बांधकर पूजा स्थल अथवा तिजोरी में रख दें|
  • घर की दीवारों पर कमल के पुष्प का चित्र लगाएँ|
  • घर के दक्षिण-पूर्व कोण में मोर पंख लगाएँ|
  • यदि घर में एक भी घड़ी बंद पड़ी हो तो उसे तुरंत हटा दें, टपकता हुआ नल यथाशीघ्र ठीक करवाएँ| टूटे जूते चप्पल घर में न रखें, मकड़ी के जाले प्रत्येक शनिवार को साफ करें|
  • देवी लक्ष्मी को कमल गट्टे की माला चढ़ाकर नदी अथवा तालाब में विसर्जन कर दें|
  • ग्रहण काल अथवा दीवाली की रात एक लौंग तथा एक छोटी इलायची को जलाकर भस्म बना लें तथा देवी-देवताओं के चित्र पर लगाएँ|
  • घर के बगीचे में आक(आंकड़ा) का पौधा लगाएँ|
  • तिजोरी में पूजा के सुपारी रखें|
  • मंगलवार के दिन लाल गाय को रोटी खिलाएँ|
  • बहेड़ा वृक्ष की जड़ तथा पत्ता रवि पुष्य के दिन घर लेकर आएँ तथा उसकी पंचोपचार विधि से पूजा करें| तदुपरान्त लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी अथवा पूजा स्थल पर रखें|
  • सुबह उठकर गृह लक्ष्मी घर के मुख्य द्वार पर एक लोटा जल डालें|
  • काली मिर्च के पाँच दाने लेकर अपने सिर पर से 7 बार उसार लें, पुनः किसी चौराहे अथवा सुनसुसान स्थान पर जाकर चारो दिशा में चार दाने फेंकर पांचवा दाना आसमान की तरह फेंक दें| यह अत्यंत लाभकारी उपाय है| इससे यदि ऊपरी बाधा, नज़र दोष, ग्रह दोष के कारण धनहानि हो रही हो, आर्थिक तंगी की स्थिति लगातार बनी हुई हो तो इससे छुटकारा मिल जाता है|
अपार धन प्राप्ति के सरल उपाय, एक बार अवश्य आजमाएं

अपार धन प्राप्ति के सरल उपाय, एक बार अवश्य आजमाएं

आकस्मिक धन प्राप्ति साधना, आकस्मिक धन प्राप्ति का मंत्र, धन प्राप्ति के अचूक टोटके- जब बात धन की हो तो इसमे कोई संदेह नहीं रह जाता है की आज जीवन मे इसकी अवश्यकता कितनी बढ़ चुकी है। धन हमेशा से ही जरूरी रहा है। जीवन मे जरूरी रोटी-कपड़ा व मकान जैसी मूलभूत अवश्यकताओ को भी धन द्वारा ही हम पूरा कर सकते है। हर इंसान ज्यादा से ज्यादा पैसा कमा के अपने जीवन मे हर खुशियो को पा लेना चाहता है। आपके पास कितना पैसा है, ये आपके status को दिखाता है। जिस इंसान के पास पैसा नहीं होता समाज उसकी इज्जत भी नहीं करता। उसे बेकार इंसान समझ लिया जाता है। अब इन पारिस्थतियों से निपटने के लिए इंसान दिन रात मेहनत करके ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना चाहता है, ताकि दुनिया के हर ऐसो-आराम खरीद सके।

आकस्मिक धन प्राप्ति के उपाय

तो चलिये आज हम आपको बताते है धन प्राप्ति के कुछ ऐसे उपाय जिनहे अपनाकर आप आकस्मिक रूप से धन प्राप्त कर सकते है। इस उपाय के लिए आपको इस मंत्र का जप करना होगा, मंत्र – ऊँ ह्रीं ह्रीं ह्रीं स्वर्णावती मम् गृहे आगच्छ आगच्छ ह्रीं ह्रीं ह्रीं ऊँ नमः। बुधवार के दिन रात के वक़्त, उत्तर दिशा की ओर मुख करके इस विधि को शुरू करे। आपके वस्त्र पीले रंग के होने चाहिए और जिस आसन पर बैठ रहे है वो भी पीला ही हो। इसके बाद सामने लक्ष्मी जी का चित्र बना ले व देशी घी से दीप जला ले और सफ़ेद रंग वाली माला उन्हे चड़ाये। ध्यान रहे सफ़ेद रंग के खोए या लड्डू का ही भोग लगाए। साथ मे सियार सिंगी को किसी तांबे के बर्तन/पात्र मे रख ले, फिर माथे पर केसर का तिलक लगा ले। आपको इस मंत्र का जप 21 बार स्फटिक की माला से करे यानि 21 माला जप करना होगा। 3 दिन तक इस विधि को करने के बाद आप सियारसिंगी को एक डिब्बी में बंद करके घर मे पूजा स्थल या अपनी तिजोरी में रख दे। इसके बाद आप देख सकेंगे माँ लक्ष्मी की कृपा आपके पास आने लगेगी।

ॐ श्रीं शीघ्र सिद्धिं तीव्र फलं पूरय पूरय देहि देहि श्रीं श्रीं श्रीं नमः। ये एक अन्य मंत्र है, जिसका जाप आप किसी भी शुक्रवार के दिन शुरू कर सकते है। इस मंत्र को भी आप रात के वक़्त 10 बजे के बाद करे। इसी विधि के अंतर्गत आपका आसन और वस्त्र दोनों लाल रंग के होने चाहिए व दिशा वही उत्तर की होगी। ध्यान रहे की ये साधना पलाश वृक्ष के निचे बैठकर करे और अगर ये संभव नहीं तो पलाश वृक्ष की लकड़ी को लाल कपड़े पर रख दे। पहले के जैसे यहां भी आपको अपने आसन के सामने माँ लक्ष्मी का चित्र बनाना होगा, फिर कमलगट्टे की माला से 21 माला जप करना होगा ऊपर बताए मंत्र का। मंत्र जप पूरा होने के बाद साधक के लिए जरूरी है की वो अग्नि मे 101 बार गाये के घी से आहुति समर्पित करते हुए भी मंत्र पढे। 3 दिन तक इस विधि को करने के बाद आप उस पलाश की लकड़ी को पानी मे प्रवाहित कर आए। ऐसा करने से जल्दी धनप्राप्ति होती है। एक और मंत्र हम आपको बताते है: ओं ह्रीं ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं श्रीं क्रीं क्री क्रीं स्थिरां स्थिरां ओं। इस मंत्र का जप आपको 110 बार प्रतिदिन 41 दिनों तक करना होगा। ध्यान रहे की जप आप मोती की माला से करे और काले मृग का आसन रखे। इस विधि को आप कांचनी वृक्ष के नीचे करे तो लाभ मिलता है।

मंत्र साधना के अलावा कुछ टोटके भी आपको धन प्राप्ति मे मदद करते है। जैसे की एक टोटके के अनुसार आप 5 काली मिर्च के दाने ले और उसे अपने सिर पर से 7 बार फेर ले, फिर 4 दानों को चारों दिशाओं में फेंक दें। ध्यान रहे बचे हुए उस पांचवें दाने को आकाश की ओर उछाल दें। इस टोटके को करने से आपको भी आकस्मिक धन लाभ होगा। धन न जमा होने की सूरत मे आप एक बेहद साधारण तरीका अपना सकते है, जिसके लिए आप अपनी तिजोरी मे सिर्फ लाल रंग का कपड़ा बिछा दे। ऐसा करने से धन जमा होने लगता है। ऐसा ही एक बेहद सरल उपाय है जिसके अंतर्गत अगर प्रतिदिन सुबह उठकर गृह लक्ष्मी अगर घर के मुख्य द्वार पर रोज एक लोटा जल चड़ाती है तो इस विधि से भी माँ लक्ष्मी घर मे दर्शन देती है और धन प्राप्ति का मार्ग खुल जाता है।

माँ लक्ष्मी को प्रस्स्न करने की दिशा मे अपने पीपल के पत्ते के प्रयोग के बारे मे जरूर सुना होगा। माना गया है की पीपल मे भगवान विष्णु का वास होता है। ऐसे मे उनका ध्यान करने से भी आप धन की प्राप्ति कर सकते है। जिसके लिए एक बेहद सरल उपाय करना होता है। उपाय के लिए आप किसी भी शुभ मुहूर्त में एक पीपल का पत्ता तोड़कर, उसे गंगाजल से धो ले। इसके बाद उस पत्ते पर केसर से श्रीं लिख ले और अपने पर्स मे नोटों के बीच इस तरह से रख दे की किसिकों वो नज़र ना आए। ऐसा करके आप देख सकेंगे की लक्ष्मी आपके पास आकार ठहरने लगेगी।

हम उम्मीद करते है कि धन प्राप्ति को लेकर ऊपर बताए गए मंत्र व साधना को आप जरूर आजमा कर देखेंगे। क्यूकी भला ऐसा कौनसा व्यक्ति है जो पैसा नहीं चाहता, हर एक की जरूरतों की पूर्ति का साधन कही-न-कही ये धन ही है। ऐसे मे हर कोई एक आराम दायक जीवन के लिए माँ लक्ष्मी को प्रस्स्न करना चाहता है। सब कुछ के बावजूद भी धन भी उतना मांगे जिससे आप सुखी रह सके, क्यूकी जीवन मे कोई भी वस्तु हद से ज्यादा हो जाये तो वो भी परेशान का सबब बन जाती है। आशा करते है की आपको बताए गए उपायो से मदद अवश्य मिलेगी।

किस्मत का ताला खोलने के लिए करें ये उपाय

किस्मत का ताला खोलने के लिए करें ये उपाय

भाग्य जगाने के टोटके/ मंत्र, किस्मत का ताला खोलने का उपाय, किस्मत बदलने के उपाय- कहते हैं, भगवान जब देता है, छप्पड फाड़ के देता है और जब वसूलने पर आ जाए तो चैखट किवाड़ भी उखाड़ लेता है। यानि अगर आपकी किस्मत अच्छी है तो नौकरी हो या अपना व्यवसाय हर जगह सफलता कदम चूमेगी। अगर किस्मत रूठ जाए तो आप कितने भी पढ़े लिखे हों, मेहनती हों उन्नति नहीं होती। वैसे कर्मवाद और भाग्यवाद का झगड़ा बहुत पुराना है। फिल्म विधाता के एक गीत में खूबसूरती से व्यक्त किया गया है, इसमें एक मित्र कहता है हाथों की चंद लकीरों का सब खेल है बस तकदीरों का, इसके जवाब में दूसरा मित्र कहता है -तकदीर भला मैं क्या जानूं मैं आशिक हूं तदबीरों का। अभिप्राय यह कि सिफ भाग्य अर्थात तकदीर या सिर्फ कर्म अथवा तदबीर के सहारे जिंदगी नहीं चलती। इसमें दोनो का संतुलन आवश्यक है।

किस्मत का ताला खोलने का उपाय

तथापि, जो किस्मत के धनी हैं वह कम कुशल होते हुए भी शीर्ष पर पहुंच जाते हैं। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे लोगों को हम साधारण बोलचाल की भाषा में ‘तकदीर का सांड’ कहते हैं। परंतु प्रत्येक व्यक्ति तकदीर का सांड नहीं होता। परंतु इसका यह अर्थ नहीं कि हम हार मान कर बैठ जाएं और तकदीर को कोसते रहें। कई बार ऐसा भी होता है कि मनुष्य अपने प्रयास तथा आध्यात्मिक बल, सकारात्मक सोच आदि से अपनी किस्मत को पलट देता है। धर्मशास्त्रों में ऐसे लोगों को पुरूषार्थी कहा गया है। इसके अलावा ज्योतिष विद्या में कुछ ऐसे टोटकों का वर्णन भी है जिसकी सहायता से किस्मत पर पड़ी धूल साफ किया जा सकता है।

यहाँ यह भी ध्यान दिये जाने की जरूरत है कि जब आप कहते हैं ‘मेरी तो किस्मत ही खराब है’ तो इसका आशय क्या है| क्योंकि, किस्मत का कहर जीवन के किसी भी हिस्से पर टूट सकता है| इसलिए आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य, शिक्षा, परीक्षा में सफलता, प्रेम, दाम्पत्य जीवन, संतान सुख आदि जहां भी आपको दुर्भाग्य का कुचक्र प्रतीत हो, फौरन योग्य ज्योतिषी से कुंडली की जांच करवाकर ग्रह दोषों की शांति करवाएँ| अधिकांश समस्या का हल तभी हो जाएगा|

किस्मत बदलने के उपाय

घर तथा अपने आस-पास सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए कुछ टोने आजमाए जा सकते हैं। इन में से कुछ को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लेना श्रेष्ठ रहता है। स्मरण रखें, टोटके गणित के नियम पर आधारित नहीं होते न कार्य कारण सिद्धांत पर होते हैं। टोटके मात्र आपके मनस को व्योम में घूमने वाली सकारात्मक अथवा नकारात्मक तरंगों से जोड़ देती है, जिसका अच्छा या बुरा परिणाम आपके सामने होता है। परिणाम कब कितने दिन में निकलेगा यह आपकी मानसिक शक्ति, एकाग्रता तथा लक्ष्य के प्रति एकनिष्ठ झुकाव पर निर्भर करती है। इसलिए किसी टोटके को आजमाने से पूर्व कुछ मानसिक तथा व्यावहारिक तैयारी आवश्यक है। उदाहरण के लिए –

  • अपने स्वभाव का विश्लेषण करें। क्या आप चिड़चिड़े, घर तथा दफ्तर में लोगों को दबाकर रखते हैं। उन पर गरजते बरसते हैं। यदि ऐसा है तो यकीन मानिये जितने लोग आपसे पीड़ित हैं, वह सभी दुखी आत्माएं आपको कोसते हुए बद्दुआएं दे रही हैं। इसलिए अपना व्यवहार संयमित रखें। बिना बुरा बर्ताव किये हुए अधीनस्थ को नियंत्रित करने की कोशिश करें। प्रसन्नचित्त रहने की कोशिश करें। पहले यह सायास करना होगा। फिर बादा में इसकी आदत बन जाएगी। मन प्रसन्न तो नए अवसर की समझ, समस्या-समाधान के तरीके अपने आप निकल आएंगे।
  • स्वच्छता रखें: कार्य स्थल तथा घर दोनों स्थानो पर साफ सफाई रखें| इससे मन अवसादग्रस्त नहीं होता, ध्यान रखें आपकी दुकान, फैक्ट्री के द्वार के सामने कोई थूके नहीं अथवा मल-मूत्र त्याग न करे|
  • खुद पर भरोसा रखते हुए प्रयास करें तथा यह होकर रहेगा विचारते रहें| लगातार मिल रही असफ़लताओं से इंसान इतना टूट जाता है कि काम मिलने से पहले ही सोचने लगता है कि वह कर पाएगा या नहीं| यह काम मिलेगा या नहीं| यह संशय की स्थिति होने वाले काम को भी बिगाड़ देती है|
  • प्रति दिन स्नानादि से निवृत होकर उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प तथा कुमकुम आदि लेकर अध्र्य दें।
  • गृहणियां प्रतिदिन स्नान के बाद तांगे के लोटे में जल लेकर मुख्यद्वार पर उढेल दें तथा लक्ष्मीजी को अपने यहां पधारने के लिए, स्थायी वास के लिए प्रार्थना करें।
  • एक लोटे में जल तथा कच्चा दूध मिश्रित कर रात को अपने सिरहाने रख सो जाएं, प्रातः काल किसी बबूल के जड़ में उस जल को चढ़ां दें।
  • मछलियों को प्रति दिन आटे की गोली बनाकर खिलाएं।
  • एकादशी का व्रत तथा दान-पुण्य करें।
  • अमावास्या को तिथि में गौ अथवा गरीब को भोजन करवाएं।
  • फूल वाली लौंग तथा कपूर, दोनो मिलाकर जला लें तथा उसका भस्म चुटकी में लेकर दो तीन दिन खाएं।
  • भैरव मंदिर में भैरव चालीसा का पाठ करें।
  • शुक्रवार के दिन दुकान से ताला खरीदें। स्मरण रखें खरीदते वक्त वह बंद होना चाहिए। उसे दुकानदार द्वारा खोलने से मना कर दें तथा खुद भी न खोलें। उस रात उसे अपने बिस्तर के पास रखकर सो जाएं। अगले दिन यानि शनिवार को प्रातः उठकर स्नान पूजा के बाद उस ताले को किसी मंदिर या धर्म स्थल पर रख दें तथा पीछे पलटकर देखे बिना वापस घर आ जाए।
  • कई बार बदकिस्मती का कारण वास्तु दोष भी होता है| नए घर में प्रवेश करने से पूर्व सुंदर कांड पाठ करवाएँ| यदि न करवाया हो प्रत्येक मंगलवार खुद यह पाठ करें|

भाग्य जगाने के टोटके/ मंत्र

  • होली से एक दिन पहले पलाश के वृक्ष को धूप दीप, नेवेद्य अक्षत आदि अपिर्तत कर निमंत्रित कर आएं। उनसे कहें कि अमुक-अमुक कष्ट के समाधान हेतु कल मैं आपकी टहनी लेकर जाउंगा/जाउंगी। अगले दिन यानि होली के दिन वह टहनी सूरज उगने से पहले ही तोड़कर ले आएं तथा पंचोपचार विधि से पूजा करें। पूजन के बाद ‘ओम वृक्षराज! वमृद्धस्त्वं त्रिषु लोकेशु वर्तसे। करू धान्य समृद्धि त्वंए क्षेत्रे कौटोधवर्जिते।। मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • अमावास्या के दिन किसी शांत स्थान पर दक्षिण दिशा की ओर मुख कर के बैठें। अपने सम्मुख मिट्टी के बर्तन में काला तिल और जल रखें। इसके बाद ओम पितः देवाय नमः। ओम शांति भवाह।। मंत्र का जाप 51 बार करें।
इन उपाय से मिलती है श्रेष्ठ और मनचाही संतान

इन उपाय से मिलती है श्रेष्ठ और मनचाही संतान

भारतीय समाज में ग्रहस्थ आश्रम को सभी अवस्थाओं में सबसे उपर रखा गया है। यही तो सीढ़ी है जहां से समाज की संरचना की शुरुआत होती है। इस व्यवस्था में दो अंजान व्यक्ति समाज के नियमों के अनुसार, सामाजिक आशीर्वाद से अपने परिवार को आगे बढ़ाते हैं। परिवार के आगे बढ्ने से ही समाज भी आगे बढ़ता है। लेकिन कभी -कभी इस प्रवाह में रुकावट आ जाती है। कभी -कभी कोई दंपति भाग्य वश माता-पिता होने का लाभ नहीं ले पाते हैं। जब बहुत उपाय करने के बाद भी संतान नहीं होती है तो फिर वो मनचाही संतान के उपाय करने लगते हैं। तो आइये देखें संतान प्राप्ति के लिए उपाय के लिए क्या किया जा सकता है:

मनचाही संतान प्राप्ति के उपाय टोटके

मदार की जड़:
बहुत बार शादी के काफी लंबे समय तक पति-पत्नी संतान का सुख नहीं उठा पाते हैं। आज के वैज्ञानिक युग में हर असंभव को संभव किया जा सकता है। लेकिन कुछ बातें ऐसी होती हैं जहां विज्ञान भी हार मन लेता है। तब पति-पत्नी ज्योतिष का सहारा लेते हैं। संतान प्राप्ति के लिए उपाय है जिससे निःसंतान स्त्री को संतान सुख मिल सकता है। मदार पौधे की जड़ को संतान की इच्छा करने वाली स्त्री की कमर में बांध दें। इससे वो स्त्री संतान लाभ ले सकती है।

पीपल की पूजा:
संतान सुख हर स्त्री के लिए सबसे बड़ा सुख होता है। इस सुख को प्राप्त करने के लिए वो कुछ भी कर सकती हैं। पुराने जमाने में अपनाए जाने वाले संतान प्राप्ति के टोटके आज भी उतने ही कारगर हैं। पीपल की पूजा ऐसा ही एक टोटका ही जो संतान की इच्छा को पूरा कर सकी है। इसके लिए संतान की कामना करने वाली स्त्री रोज पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाएँ । रविवार को छोड़कर यह दिया रोज जालना चाहिए। दिया जलाकर पेड़ की परिक्रमा करें और अपनी कामना मन में दोहराती रहें । संतान प्राप्ति के उपाय के रूप में की गयी यह पूजा जल्द ही अपना प्रभाव दिखाती है।

संतान प्राप्ति मंत्र:
सभी वेदों में आयुर्वेद का संबंध व्यक्ति के रहन-सहन और जीवन शैली से रहा है। अगर कोई व्यक्ति आयुर्वेद में बताए नियमों और उपायों का पालन करे तो कुछ भी असंभव नहीं है। यही बात संतान प्राप्ति के लिए भी है। इसमें मनचाही संतान प्राप्त करने के उपाय बताए गए हैं। इसमें उन नियमों को बताया गया हैं जिनके पालन से दंपति पुत्र या पुत्री जो भी चाहें हो सकता है। गर्भधारण कब और कैसे करना चाहिए, सब विस्तार से बताया गया है। शांत चित और प्रसन्न मन से संतान कामना से किया गया सहवास जरूर फलता है। जिस दिन आप यह कार्य करें उसके बाद इस मंत्र का निरंतर जाप करें:

||ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौंदेवकीसुतगोविन्द वासुदेव जगत्पतेदेहिमेतनयं कृष्ण त्वामहंशरणंगतः||

संतान प्राप्ति के मंत्र को 108 दिन तक लगातार करना चाहिए। आपको निश्चय ही सफलता मिलेगी।

कुम्हार का धागा:
अगर आप किसी कारणवश गर्भ धारण नहीं कर पा रही हैं तो घबराएँ नहीं । ज्योतिषी अगर आपकी कुंडली में संतान प्राप्ति का योग बताते हैं तो यह उपाय करें। आप अपने पति के साथ मंगलवार के दिन किसी कुम्हार के घर जाएँ । उससे प्रार्थना करके जिस धागे को वह बर्तन बनाने के लिए इस्तेमाल करता है उसको अपने घर ले आयें । अब एक गिलास में पानी लेकर यह धागा उस गिलास में डाल दें। एक सप्ताह बाद यह डोरे वाला पानी आप खुद भी लें और अपने पति को भी दें। याद रहे यह मंगल को ही करना है । जिस दिन यह पानी पीएँ उस दिन अपने पति के साथ संबंध स्थापित करें। जल्द ही आप गर्भवती हो सकती हैं। गर्भ ठहरते ही यह धागा हनुमान जी के चरणों में रख कर अपने परिवार की सुख कामना की प्रार्थना करें । संतान प्राप्ति के लिए यह उपाय बहुत सरल और कारगर है।

गुड़ दान :
जब पति-पत्नी हर ओर से निराश हो जाते हैं तो हर उपाय को संतान प्राप्ति का उपाय मानते हैं। एक बहुत सरल टोटका है जिसे सिर्फ वीरवार को ही करना होता है । आप वीरवार को थोड़े से गुड़ को आस-पास के गरीब व्यक्ति को दान दें। संतान प्राप्ति का यह टोटका बहुत कारगर है और आपको निश्चय ही सफलता मिलेगी।

गणेश पूजा :
श्री गणेश विघ्न हर्ता और संकट निवारक भी हैं। माता पार्वती और गणेश का संबंध जग जाहिर है। संतान प्राप्ति के उपाय के लिए गणेश पूजा अत्यंत लाभकारी है । इस उपाय के लिए संतान प्राप्ति की इच्छुक महिला गणपति की पूजा करे तो उसे बहुत लाभ होता है। रोज स्नान करके इस मंत्र का जाप गणेश जी की मूर्ति के सामने करे।

‘ॐ पार्वतीप्रियनंदनाय नम:’

गणेश जी की पूजा करने के लिए बेल पत्र चड़ाएँ और अपनी कामना को दोहराएँ । रोज 11 माला का जाप करें और अपनी मनोकामना जल्द ही पूरा करें

आम की जड़:
पति-पत्नी लाख उपायों के बाद भी माँ -बाप न बन पा रहे हों तो संतान प्राप्ति के टोटके अपनाते हैं । पूर्वजों द्वारा बताए गए उपायों में से एक बहुत सरल उपाय आपको बताते हैं। इसके लिए संतान की इच्छुक स्त्री को आम की जड़ लाकर उसे सूखा कर पीस लें। यह उपाय पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में करना चाहिए। पीसी जड़ को दूध में मिलकर इसका सेवन कर लें । मनचाही संतान का उपाय इससे सरल और कोई नहीं है ।

चावल का मांड :
निःसंतान दंपति वैज्ञानिक उपायों के साथ संतान प्राप्ति के उपाय के लिए घरेलू उपाय भी अपनाते हैं। सबसे सरल घरेलू उपाय है चावल के माँड़ का पानी। जब महिला का मासिक धर्म पूरा हो उस दिन चावल के मांड में एक नींबू का रस निचोड़कर पी लें । उस रात पति के साथ संबंध बनाएँ तो निश्चय ही संतान प्राप्ति का योग बनेगा ।

संसार में संतान सुख न मिले तो सब सुख फीके लगते हैं। इसलिए पति-पत्नी अपने हर संभव प्रयास करते हैं और संतान का सुख लेते हैं । यह उपाय इसी क्रम में आपकी मनोकामना पूरी करें में सहायता करते हैं ।

विवाह में अगर हो रही है देरी, तो करें ये उपाय जल्दी होगी शादी

विवाह में अगर हो रही है देरी, तो करें ये उपाय जल्दी होगी शादी

शादी सबकी ज़िंदगी के सबसे मुख्य कार्यों में से एक होती है। शादी के लिए हम लोग छोटी उम्र से ले कर बड़ी उम्र तक बड़े उत्साह से बात करते हैं। हमारे समाज के मुताबिक शादी करना एक पुण्य का काम है। छोटी उम्र में हम इस की चर्चा हँसी-मज़ाक से करते हैं, बड़े होने पर शादी करने की आशा रखते हैं और उसके बाद की उम्र में लोगों की शादी कराने में ख़ुशी और रूचि रखते हैं।

जल्दी शादी करने के टोटके

शादी करने के लिए हम लोग किशोर अवस्था यानी अंग्रेजी की टीनएज से उत्सुक हो उठते हैं। शादी हमें जीवन के चार लक्ष्यों में से दो लक्ष्यों तक पहुँचने में मदद करती है – काम यानी शादी-शुदा जीवन भोगना और अर्थ यानी धन की वृद्धि करना, जो की सुख-मैं जीवन होने पर धन वृद्धि करने में आसान हो जाता है।

शादी हर धर्म में अलग विधि -विधान से होती है, हिन्दू धर्म में अलग, मुसलमानों में अलग, ईसाईयों में अलग और पारसियों में भी अलग। इन की विधि शादी के बाद भी अलग रहती है और इसीलिए सब धर्मों के कानून इस समय तक अलग-अलग हैं (कुछ दिन में सब धर्मों के क़ानूनों को एक में परिवर्तित करने की सोच है)

देर से शादी के ज्योतिष कारण

ज्योतिष के हिसाब से शादी के लिए कुंडली के सातवें भाग को देखा जाता है। प्रत्येक कुंडली के बारह खाने किये जाते हैं, और उसमें से सप्तम भाव जया यानी शादी से संबंधित हर चीज़ के लिए होता है।

सब से पहले यह देखें की क्या सातवें भाव में शनि है? शनि सातवें भाव में काम में देरी प्रदान करता है एवं रुकावटें पैदा करता है, सप्तम भाव का स्वामी किस भाव में है यह देखना भी बहुत ज़रूरी है क्यूंकि उससे सप्तम भाव के हर निर्णय पर फर्क पड़ेगा। सप्तम भाव की राशि का ग्रह कौन से भाव में है? यह देख लें, उस राशि का (जिस राशि में सप्तम भाव का स्वामी हैं) का स्वामी कौन है एवं उसका कारक कौन है यह भी पता कर लें। इस सब को पता करने के बाद आपको ये समझ में आने लगेगा की सप्तम भाव की राशि और किसी और राशि के बीच में आदान-प्रदान हो रहा है या नहीं।

विवाह जल्दी हो, इसके टोटके

अगर आपको अपना विवाह जल्दी करना हो या किसी और को इस बारे में बताना हो तो यह करें की नहाने से पहले पानी में एक चुटकी हल्दी मिला दें। हल्दी मिला देने से शादी के आने का समय धीरे-धीरे कम होने लगेगा और कुछ ही दिनों में आपको आपका मन चाहा वर या वधू मिल जाएगी।

जो व्यक्ति शादी योग्य हो उसे शादी के वक़्त जो पोशाकें पहनी जाती हैं वह घर में एक जोड़ी खरीद कर रखनी चाहिए।

तीन गुरुवार के दिनों पर एक हरी इलाइची के जोड़े के साथ केले के पेड़ पर जल चढ़ायें, इस कार्य को करने के ठीक बाद में उस पेड़ के नीचे एक घी का दीप जला दें। आपकी मनोकामना को पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता, आपका काम बन जायेगा, आप बस यह काम निष्ठा पूर्वक करें, फल देना ऊपर वाले के हाथ में छोड़ दें।

कुंडली में किस दोष को ढूंढें?

यह एक लिखी-पढ़ी बात है की जब किसी कुंडली में मांगलिक दोष हो तो मांगलिक लड़का ही ढूंढें या फिर मांगलिकता के हटने तक – यानी २८ साल की उम्र तक इंतज़ार करना पड़ता है। अगर यह दोष न हो तो फिर नाड़ी दोष नहीं होना चाहिए नहीं तो और तरह की दिक्कतें आती हैं। अगर यह सब न हो तो फिर अगर शनि और मंगल साथ मिल कर या अलग अलग कुंडली में हड़कंप नहीं मचा रहे तब आपका काम बन जायेगा।

यह कहना की इतनी साड़ी चीज़ें आपकी कुंडली में न हो मुश्किल है, कुछ तो निकल ही आता है, आपको कुछ उपाय मैंने ऊपर के पैराग्राफ में बताये हैं, बाकी जब तक आप किसी अच्छे ज्योतिषी से परामर्श नहीं कर लेते कहा नहीं जा सकता की क्या होगा। चूंकि कुंडली को देखना और परखना भी एक जटिल कला है – कभी कहीं से कुछ बढ़ता है तो किसी और कारण घटता है। कुंडली को समझने के लिए सिर्फ एक या दो चीज़ें ढूंढ़ना ही पर्याप्त नहीं है – अगर हो सके तो पूरी दिखानी चाहिए – किसी अच्छे ज्योतिषी को।

कुछ और उपाय

शीघ्र विवाह के लिए एक और तरीका यह है की आप गुरुवार के दिन गौ माता को दो आँटा के पेड़े हल्दी लगा के खिला दें, हो सके तो थोड़ा गुड़ और चने की दाल भी खिला दें, आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी। उचित दूल्हा या दुल्हन का रिश्ता आ जायेगा और आप जिस वजह से परेशान हैं, वह परेशानी दूर हो जाएगी।

एक और तरीका है सोमवार की शाम को १२०० ग्राम चने की दाल लेकर इसके साथ आधा लीटर दूध दान कर दें – ध्यान रहे दूध कच्चा हो। यह कार्य हर सोमवार तब तक करें जब तक मनचाही शादी का रिश्ता न आ जाए।

अगर शादी के लिए चिंतित लड़की है तो फिर आप के लिए सबसे सीधा उपाय है शिव भगवन की पूजा करना, ऐसा करिए की शिव भगवन की प्रतिमा के सामने पांच नारियल रख दें, उसके पश्चात् निम्नलिखित मंत्र उच्चारित करें –

ॐ श्रीं वर प्रदाय श्री नमः

इस मंत्र को एक रुद्राक्ष की माला लेकर उस पर पांच बार जपें – यानी १०८ बार जपने पर एक माला और इस तरह पांच माला। यह कार्य करने पर लड़की की शादी के लिए रिश्ते ज़रूर आएंगे और आपकी मनोकामना पूर्ण होगी।

हर वक़्त कुछ न कुछ पीले रंग का ज़रूर पहने रहे इससे शादी जल्दी होती है।
जब लड़का लड़की को देखने जाये तो उसे गुड़ खिला देना चाहिए, इससे अच्छा असर पड़ता है।
शादी में अगर विघ्न आ रहे हों तो श्री गणेश जी को पीले प्रसाद का भोग लगाएं इससे आपको तुरंत राहत मिलेगी।
अगर शादी मांगलिक दोष के कारण नहीं हो रही है तो रोज़ चंडी पाठ पढ़ें।

इस तरह मैंने आपके समक्ष कुछ ऐसे उपाय रखें हैं जो कारगर हैं और सरलता से करे भी जा सकते हैं, अगर आप इन का प्रयोग करते हैं, तो आपको लाभ अवश्य मिलेगा, और आपकी परेशानिया दूर होंगी। शादी कब होगी और कहाँ होगी ये सब किसी अच्छे ज्योतिषी से निकलवा लेने से आपको संतुष्टि मिलेगी इस लिए मेरी राय है की अगर आपकी परेशानी ज़्यादा है तो किसी ज्योतिषी से परामर्श करें।

जीवन में मान-सम्मान पाने के लिए करें ये उपाए

जीवन में मान-सम्मान पाने के लिए करें ये उपाए

इस दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो लज्जित रहते हैं। मान सम्मान यश आदर उनके पास नहीं हैं और कोई चारा इसलिए नहीं रह जाता क्यूंकि उन्होंने अपने जीवन में कुछ गलत कदम उठा लिए होते हैं, अब वापस नहीं जा सकते, तो फिर पुराने गल्तियों की सज़ा उन्हें भुगतनी पड़ती है। हमारे समाज में कोई भी गलत नहीं बनना चाहता सब किसी परिस्थिति का शिकार हो जाते हैं, कोई पैसे की कमी से कोई किसी और चीज़ की कमी से मान और सम्मान छोड़ कर किसी और तरफ चलता है। पर यह बात हर जगह लागू होती है की मान सम्मान सबको प्रिय है और सब उसकी आशा करते हैं।

मान सम्मान यश आदर प्राप्ति के उपाय

तो फिर क्या तरीक़ा है मान और सम्मान प्राप्त करने का ? किस ढंग से हम काम करके अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सम्मान ला सकते हैं? इन सवालों के सहज और सरल जवाबों का सिलसिला आज हम शुरू करेंगे। आखिर किस तरह से आप मान और सम्मान की ओर बढ़ सकते हैं? और क्या करके इनका आना बढ़ा सकते हैं? अगर आप अपना आदर और सत्कार बढ़ाना चाहते हैं तो फिर पश्चिम दिशा में बैठकर उस कार्य को करें जिसमें आप सम्मान की कामना करते हैं। यह करने से आप शुभ और मंगलदायी दिशा की ओर सर करके बैठेंगे, इस स्थिति में आपके और अच्छी कल्पनाएेँ और कार्य आकर्षित होंगे और आप इनके हक़दार बनेगे।

ऐसा माना जाता है की गुरु ग्रह सौभाग्य, शुभ कार्य और समृद्धि तथा सम्मान बना देता है। नवग्रहों में यह ग्रह सबसे अच्छा माना जाता है और इसपर ख़ासा ध्यान रखा जाता है। ज्योतिष के बनाये हुए शास्त्रों में गुरु ग्रह से जुड़े दोषों के निवारण के लिए बहुत से उपाय लिखे गए हैं। इनमें से सबसे कारगर और अच्छा तरीक़ा है इस विधि का। आप नहाते वक़्त निम्नलिखित सामान को नहाने के पानी में मिला दें – मीठा गुड़, सोने की बनी हुई कोई वस्तु, चीनी, शहद, हल्दी, मुलेठी, नमक, पीले फूल और सरसों के दाने।

इस कार्य को करने में आपको थोड़ी तक्लीफ तो उठानी पड़ेगी क्यूंकि यह सारा सामान रोज़ इक्कट्ठा करके आपको नहाते वक़्त इस्तेमाल करना पड़ेगा। पर यह काम होगा ज़रूर, आप पाएंगे की लोग आप से प्रभावित होने लगे हैं और आपकी तूती बोलने लगी है। एक इस कार्य से सरल उपाय है, जिसमें इतना काम नहीं करना पड़ता और आपका कार्य सिद्ध भी हो जाता है। आप यूँ करें की रात को सोने से पहले एक ताम्बे का गिलास या लोटा लें, यह किसी भी पूजा की बड़ी दुकान या बर्तनों की बड़ी दूकान पर मिल जायेगा।

अब इसे आप पानी से भर लें और इसमें थोड़ा सा, करीबन दो या तीन चम्मच शहद मिला दें। फिर इसे सर के पास रखकर सो जाएं रात भर के लिए। सवेरे उठने के बाद आप सबसे पहले भगवन का स्मरण करें और बिना कुल्ला आदि करे उस पानी और शहद के मिक्स को ताम्बे के लोटे से पी जाएं। आप यह कार्य अगले एक-दो महीने तक करते रहेँ। आप पाएंगे की आपका यश और कीर्ति बढ़ती जा रही है।

एक और इससे मिलता-जुलता और कारगर उपाय है की आप रोज़ जब सोने के लिए जाएं तो फिर ऐसा करें की एक थाल या चौड़े बर्तन में पानी भर लें। अब इस बर्तन को जहाँ आप सोयेंगे उसके नीचे रख दें, आप उसके बाद आराम से अपने बिस्तर पर लम्बी नींद सो लें। सवेरे उठने के बाद आप उस सारे पानी को लें और घर के बाहर फेंक आएं, यह रोज़ करेंगे तो आप पाएंगे की लोग आपकी तारीफ करेंगे, आपकी कभी बेज़्ज़ती नहीं होगी और मान,सम्मान बना रहेगा।

दुर्गा सप्तशती जिसे चंडी पाठ भी कहा जाता है खरीद लाएं, यह आपको किसी भी धार्मिक विक्रेता के यहाँ गीता प्रेस से प्रकाशित ३० रुपये तक में मिल जाएगी। इसे लेकर आप इसका १२वा अध्याय खोले और उसका रोज़ाना पाठ करना शुरू कर दें। आप पाएंगे की आप काम बनता जा रहा है और आप दिन-ब-दिन एक अच्छे और यश पूर्ण व्यक्ति बन रहे हैं।

मान सम्मान यश आदर प्राप्ति के उपाय

अगर आप समाज में मान और सम्मान चाहते हैं और इसके लिए कोई प्रयोग ढूंढ रहे हैं तो सबसे पहला और सरल उपाय यह अपनाएं की शनिवार के दिन बाजरा खरीद लें – एक किलो या आधा किलो, फिर उसे घर लाकर कहीं सूखे स्थान पर रख लें। हर रोज़ सुबह आप बाजरा कबूतरों और अन्य पक्षियों को खिलाएं, आप पाएंगे की आपका सम्मान आपके समाज में बढ़ता जा रहा है और आप एक अच्छे व्यक्ति की तरह जाने जा रहे है।

एक अत्यंत कारगर विधि जिससे आप आराम से कर सकते हैं है सूर्य को अर्घ देना। यह बहुत सी परेशानियों का निवारण करता है और आपके जीवन में किसी भी बड़ी रुकावट को दूर करता है। आपको इसे करने के लिए यह करना होगा की आप एक दिन सवेरे सूर्योदय से पहले उठें, यानी ब्रह्ममुहूर्त पे, ३:३० बजे सवेरे, अब आप नहा-धो लें और पूजा कर लें, इसके पश्चात आप एक कलश में जल भरें, जहाँ तक हो सके कलश ताम्बे का रखें।

जल जो पूरा ऊपर तक भर दें की ताम्बे के लोटे में जगह नहीं बची हो। अब आप इसे लेकर बाहर जाएं जहाँ सूर्योदय हो रहा हो, वहां जाकर आप सूर्य के सामने अपने शरीर को सीधा खड़ा करें, पाँव जोड़ लें, दोनों हाथ सीधा सामने कंधे तक की ऊंचाई तक उठा लें। अब आप कलश से पानी को इस तरह छोड़ें की जल सूर्य के गोलाकार पे गिरे और आपके हाथों से गिरे कंधे और धड़ और पाँव सीधे रहे। जल से अर्घ देते वक़्त आप मन्त्रों का प्रयोग करें – “ ओम सूर्याय नम: ओम भास्कराय नम: ओम रवये नम: ओम आदित्याय नम: “ या कहते-कहते अर्घ पूरा कर दें। इसके पश्चात कोई और पूजा करनी चाहें तो पूजा कक्ष में जा के कर लें।

आप पाएंगे की लोग आपकी तरफ अच्छी नज़र से देखने लगेंगे और आपका सम्मान और कीर्ति इस दुनिया में बढ़ने लगेगा। समय के अर्घ अगर आप रोज़ देंगे तो लाभ अवश्य देखने को मिलेगा। आप आस्था के साथ यह कार्य करें। और कोई शंका आये तो किसी अच्छे ज्योतिषी से परामर्श कर लें या फिर किसी तांत्रिक से दीक्षा ले लें, आपके किसी भी संदेह को वह दूर कर देंगे।

करें ये उपाय, तुरंत परेशानी संकट से निजात पाएं

करें ये उपाय, तुरंत परेशानी संकट से निजात पाएं

जीवन में उतार चढ़ाव तो आते ही रहते हैं | कभी-कभी जीवन रूपी यह गाड़ी हंसी-खुशी सुचारु रुप से आगे बढ़ती है तो कभी-कभी यह मानसिक, शारीकिक व आर्थिक परेशानियों में भंवर में डूबने लगती है | व्यक्ति तरह- तरह की परेशानी से घिर जाता है और संकट से मुक्ति पाने के लिए छटपटाने लगता है | अगर आप भी कुछ इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं तो यह लेख आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा | इसमें आपको परेशानी दूर करने के उपाय मिलेंगे | इसे आजमाकर आप अपनी परेशानियों से छुटकारा पाने में सफल होंगे | नीचे दिए गए हैं परेशानी दूर करने के उपाय जो निश्चित है आपके लिए फायदेमंद होगा | ये उपाय हैं-

परेशानी संकट दूर करने के उपाय

  • एक छोटा सा दिया बनाएं गोबर से | आप इसमें रूई की बत्ती बनाकर डालें और ऊपर से तेल डालें | इस दीए को दरवाजों के बीचो-बीच जला कर रखने से बुरी नजर द्वारा रक्षा की जा सकती है अपने घर की |
  • अगर आपके घर में प्रतिदिन झगड़े या क्लेश हो जो आपके मन को भी अशान्त कर देता है तो इस मानसिक परेशानी को दूर करने के उपाय में आप यह कार्य करें -एक सकोरा (कुल्लड़) ले मट्टी का | इसमें आप अल्प मात्रा में दूध डाल ले और उसमें कुछ शहद की बूंद भी डाल दे | अब इसे आप अपने घर के आंगन, कमरों और छत के ऊपर थोड़ा थोड़ा छिड़क दें | लेकिन ध्यान करें इस टोटके को करते वक्त मौन रहें |
  • पिसी हुई चीनी मिला ले गेंहू के आटे में | अब इसे रोज बिखेर दें चिंटियों के बिल के पास | संकट दूर करने के उपाय यह बहुत ही सरल उपाय है |
  • एक नारियल ले | इसे आप वारले अपने ऊपर से किसी भी मंगल या शनिवार के दिन | अब इस नारियल को आप अग्नि में अर्पित करे किसी देवस्थान की | इस क्रिया को आप पांच बार करें | ऐसा करने से सभी तरह के संकट दूर हो जाएगें
  • प्रतिदिन कौआ को रोटी दे चीनी या गुड़ मिलाकर |
  • नित्य खाना बनाते समय पहली एक रोटी कुत्ते के लिए और एक गाय के​ लिएबनाकर उन्हें खिलाए |
  • हर रोज कबूतर को दाना डाले |
  • प्रतिदिन बजरंगबली की पूजा करें | साथ ही साथ पाठ करें हनुमान चालीसा का |
  • किसी दरिद्र को दान दे अपनी व्यवहार की हुई एक जोड़ी पुरानी चप्पल |
  • शनि देव को तेल चढ़ाने से भी मानसिक परेशानियों से मुक्ति पाई जा सकती है | तेल शनिवार के दिन ही चढ़ाएं |
  • अपनी उम्र के वर्ष के समान संख्या में पक्षियों को खरीदने और फिर उन्हें स्वतंत्र कर दे | आपके ऊपर आया हुआ संकट कहां फुर्र हो गया आप जान भी नहीं सकेंगे |
  • किसी भी महीने के पहले वाले बुधवार को रात्रि के समय कच्ची हल्दी की गांठ ले ले और इसे पीले कपड़े में बांधकर श्री कृष्ण भगवान को अर्पित करें | अब दूसरे दिन अर्थात गुरुवार को इसे पीले रंग की डोरी में बांधकर बांध ले अपने दाई भुजा में | यह उपाय आर्थिक परेशानी दूर करने के उपाय में अत्यंत ही सरल उपाय है |
  • प्रतिदिन सुबह प्रातः एक रोटी निकाले श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों के निमित्त | इसे किसी गाय को खिला दें सुबह ही | इस चमत्कारिक उपाय का प्रभाव तुरंत पड़ता है और अल्प समय में ही आपकी मानसिक, आर्थिक एवं शारीरिक परेशानी दूर हो सुख- शांति और धन- संपत्ति की प्राप्ति होती है |
  • आर्थिक परेशानी दूर करने के उपाय में आप यह भी अपना सकते हैं –इसके लिए आप एक सिक्का ले तांबे का और साथ में लक्ष्मीकारक कौड़ियां ले जिनकी संख्या ९ हो | अब इन दोनों चीजों को अगर आप अपने गल्ले या तिजोरी में रखते हैं तो आपको कभी भी आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा |
  • प्रतिदिन बिना नागा जल अर्पित करें केले के वृक्ष में और साथ ही साथ दीपक जलाए धी का | इससे दरिद्रता दूर होती है घर की |
  • सरसों का तेल किसी बर्तन में लेकर नीचे रखें अपने पलंग के शनिवार के दिन | अब दूसरे दिन अर्थात रविवार को गुलगुले बनाए उड़द की दाल के उसी तेल द्वारा | इन गुलगुलों को दरिद्रनारायण को खिलाने से घर में लक्ष्मी का आगमन होता है और दरिद्रता दूर होती है |
  • दही, सिंदूर और उड़द की दाल के कुछ दाने लें | अब इन दानों पर सिंदूर तथा दही डालकर किसी पीपल के वृक्ष के नीचे रख दे | लौटते वक्त भूलकर भी पीछे ना देखें | इस क्रिया को आप किसी भी शनिवार के दिन शाम को आरंभ करें और सात शनिवार को लगातार दोहराए | निश्चित रूप से धन की प्राप्ति होगी |
  • बार-बार की आने वाली परेशानी से बचने के लिए हर मंगलवार को बजरंगबली के मंदिर जाएं | धूप- दीप से उनकी पूजा कर चने और गुड़ का प्रसाद अर्पित करें | इस प्रसाद बांट दे वहीं पर |
  • तीन गोमती चक्र लें | अब इनका चूर्ण बना लें तथा बिखेर दें हुए अपने घर के आगे | दुर्भाग्य और संकट दूर करने के उपाय में यह एक अचूक उपाय/टोटका है |
  • कभी भी भूलकर भी कूड़ेदान को अपने घर के मुख्य द्वार के सामने न रखें | अन्यथा आपके घर के द्वार से ही आती हुई लक्ष्मी लौट जाएगी |
  • अपने घर के पूजा स्थल या मंदिर में एक कलश रखें हरदम साफ पानी का | इसे आप एक आध दिन में बदलती रहें | ऐसा करने से धन की प्राप्ति होती है और लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है |
  • रात्रि को सोने पूर्व अपने बाथरुम और रसोई घर में पानी भरकर रखें एक बाल्टी में | इससे निश्चित ही आपको लाभ होगा धन का |
  • हर गुरुवार के दिन कोई मीठा किसी दरिद्र नारायण को खाने के लिए दे |
  • हर शनिवार एक गरीब/भिखारी को भोजन कराएं |
  • एक मुट्ठी चावल ले | इसे सात बार साफ पानी से धो लें | अब इसे आप इसे भगवान शिव को चढ़ाएं | ऐसा हर सोमवार को करें | आपके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे और धन-संपत्ति की प्राप्ति होगी |
जिन लोगों की कुंडली में होते हैं ये खास योग, उन्हें मिलती है सुंदर पत्नी

जिन लोगों की कुंडली में होते हैं ये खास योग, उन्हें मिलती है सुंदर पत्नी

किशोरावस्था से ही लड़के भावी जीवनसाथी के लिए सपने बुनने लगते हैं, सुन्दर पत्नी की चाह तो सभी को होती है, शायद ही कोई ऐसा हो जिसे सामान्य रंगरूप वाली पत्नी चाहिए| कल्पना में एक रेखाचित्र होता है जिसमें अपनी मर्जी से शादी होने तक रंग भरने का सिलसिला चलता रहता है| किसी को ऐसी पत्नी चाहिए जो पूरी तरह उसी के प्रति समर्पित हो, किसी को धनी पत्नी चाहिए तो किसी को कुछ और| वास्तविकता इससे परे होती है, यह नियति तय करती है कि किसे कैसी पत्नी मिलेगी| कुंडली के योग, पूर्वजन्म का प्रेम, संचित पुण्य जैसे कई कारक इसमें महत्वपूर्ण योगदान देते हैं|

कुंडली में सुन्दर पत्नी के योग

वैसे वैवाहिक जीवन के प्रारंभ में ही पत्नी का सुन्दर होना मायने रखता है| घर गृहस्थी चल निकलने के बाद यह बात गौण हो जाती है| कई असुंदर लडकियां भी अपने व्यवहार से पति का मन मोह लेती हैं| इसलिए यह बात ध्यान रखें सूरत से कहीं ज्यादा सीरत महत्वपूर्ण है| तथापि कुंडली में कुछ ऐसे योग बनते हैं जिससे पता लगाया जा सकता है कि भावी पत्नी सुन्दर होगी अथवा नहीं| कुछ प्रमुख योग का विवरण इस प्रकार है –

  • पत्नी के सौन्दर्य के सम्बन्ध में जानना हो तो लड़के की कुंडली में सातवें भाव को ध्यान से देखना चाहिए| अगर सातवें भाव का स्वामी कोई शुभ ग्रह हो और वह उसी भाव में उपस्थित हो, उस पर किसी क्रूर ग्रह की दृष्टि भी न हो तो पत्नी सुन्दर सौम्य और सुशील मिलती है|
  • सातवें भाव का स्वामी ग्यारहवें भाव में उपस्थित हो तो इस स्थति में भी रूपवती पत्नी मिलती है|
  • क्शारीरिक सम्बन्ध कैसे रहेंगे यह कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति से तय होता है, यदि वह उच्च भाव में है तो निसंदेह शयनकक्ष का माहौल मधुर और प्रेमिल रहेगा| सप्तम भाव में शुक्र उपस्थित रहे तो पत्नी सुन्दर मिलने की संभावना प्रबल रहती है| अगर सूर्य तुला या मकर राशि का न हो तो सातवें में भाव में शनि, राहू, केतु के होने से भी फर्क नहीं पड़ता| इसके लिए जानकार कुंडली विशेषज्ञ से परामर्श ली जा सकती है|
  • अगर सातवें भाव में वृषभ या तुला राशि हो, तो इस स्थिति में भी सुन्दर पत्नी मिलती है| ऐसा होने पर शादी के बाद किस्मत बुलंद हो जाती है, चमत्कारिक रूप से भाग्योदय होता है| इसके पीछे कारण यह है कि पत्नी सुन्दर होने के साथ चतुर, मधुर वचन बोलने वाली, कला से प्रेम करने वाली और संस्कारी होती है| ऐसा जीवन साथी मिले तो भाग्योदय होना स्वाभाविक ही है|

पतिव्रता पत्नी योग

सबसे पहले पतिव्रता शब्द के अर्थ को समझे, इसे हम प्राचीन मान्यता के अनुसार ग्रहण नहीं कर सकते| प्राचीन काल में स्त्रियाँ अपने को पतिव्रता सिद्ध करने के लिए पति की मृत्यु के बाद उसकी चिता पर बैठकर आत्मदाह कर लेती थीं| आज यह संभव नहीं है| वर्तमान में इसका अर्थ व्यापक है अर्थात ऐसी पत्नी जो अपने पति को समझे, उसकी परेशानी को समझे, विवाहेत्तर सम्बन्ध बनाने की कुप्रवृत्ति न हो, कठोर वचन न बोलती हो और किसी भी परिस्थिति में पति को त्यागने का विचार मन में न लाती हो| इसके साथ ही पतियों की जिम्मेदारी होती है कि सहचरी की भावनओं को समझे, उसके साथ हिंसक व्यवहार न करे, उसे नीचा न दिखाए आदि| कुछ लड़कियों के कुंडली में ही यह दर्ज होता है कि वह पति के प्रति समर्पित रहेगी चाहे कुछ भी हो जाए वह साथ नहीं छोड़ेगी| उदाहरण के लिए कुछ प्रमुख योगों का विवरण इस प्रकार है –

  • अगर सप्तम भाव का स्वामी चौथे भाव में या दसवें भाव में उपस्थित हो तो वह लड़की अपने पति से बहुत प्यार करती है|
  • सप्तम भाव का स्वामी गुरु के साथ हो या फिर सातवें भाव में ही उपस्थित हो साथ ही गुरु पर शुक्र या बुद्ध की दृष्टि हो तो लड़की जीवन भर अपने पति से बंधी रहती है|
  • लग्नेश और शुक्र एक साथ रहे साथ ही उन पर गुरु की दृष्टि हो तो लड़की अपने पति के अलावा किसी अन्य के बारे में सोच भी नहीं सकती|
  • सप्तमेश उच्च स्थिति में गुरु के साथ हो, और चौथे भाव का स्वामी किसी भी दो शुभ ग्रह के बीच उपस्थित हो तो यह स्थति भी आदर्श है| जन्मकुंडली में ऐसा योग होने का अर्थ है कि लड़की जीवन भर अपने पति के प्रति ईमानदार रहेगी और उसी से प्रेम करेगी|
  • अगर सातवें भाव में मंगल शुक्र के नवांश और उन पर किसी शुभ गृह की दृष्टि भी हो तो ऐसी लड़की अपने पति से बहुत प्रेम करती है|

मनचाही पत्नी पाने के उपाय

कहते हैं –हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले| यानी बात बात जीवनसाथी की हो तो लड़कों का मन अनंत कल्पनाओं से भर जाता है| इसलिए सबसे पहले अपने स्वाभाव का, जीवन शैली, आर्थिक स्थिति आदि के बारे में विचार करते हुए सोचें कि किस प्रकार की स्त्री के साथ आप निभा पाएंगे, एक तरफ़ा अपेक्षा जीवन को दुखो से भर देता है| इसलिए व्यावहारिक सोच रखते हुए तय करें आपको कैसी पत्नी चाहिए और निम्नलिखित उपाय करें –

एक पीढ़े पर नया लाल कपड़ा बिछा दें, उस पर देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें या चित्र रखे, पंचोपचार विधि से पूजा करें, लाल गुलाब इत्रादि अर्पित करें और मंत्र का जाप करें –

पत्नीं मनोरमां देहि, मनोवृत्तानुसारिणीम
तारिणी दुर्ग संसारसागरस्य कुलोद्भावाम||

मनचाही पत्नी पाने के लिए सुन्दर काण्ड का पाठ भी लाभकारी होता है| किसी पीढ़े को धो कर उस पर नया लाल कपड़ा बिछा लें उस पर हनुमानजी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें और लगातार नौ दिनों तक पाठ करें| इसमें भी पहले दिन एक बार दूसरे दिन दो बार तीसरे दिन तीन बार, इसी क्रम से नौवें दिन नौ बार पाठ करें| गुड़ चने का भोग लगाएं| इस पूजा से बार बार सगाई टूट रही हो तो भी सुन्दर सुशील पत्नी मिलती है|
अंततः कुछ बातों का ध्यान रखें कि असंभव गुणों से युक्त स्त्री पत्नी के रूप कल्पना न करें निराशा होगी तथा खुद को भी परखें| तालमेल सहयोग और प्रेम अपनी तरफ से भी रखें जीवन सुखमय रहेगा|

तलाक के कारण और निवारण

तलाक के कारण और निवारण

तलाक यानी वैधानिक रुप से शादी के बाद अलगाव| भारतीय समाज में तलाक की अवधारणा कभी नहीं रही| प्राचीन काल की सामाजिक व्यवस्था भी कुछ ऐसी थी जिसमें लोग कई शादियाँ करते थे| हरे पत्नी जीवन भर साथ निभान के लिए प्रतिबद्ध होती थी| मध्य काल में सती होने की कुपरम्परा भी विकसित होने लगी|

तलाक के ज्योतिषीय कारण उपाय

आज भी तलाक को लेकर भारतीय समाज सहज नहीं है| इसे एक विडंबना के तौर पर ही देखा जाता है| पुरुषों के लिए फिर भी समाज में थोड़ी सी उदारता देखी जा सकती है| उनके लिए फिर से रिश्ते आने लगते हैं| लेकिन तलाकशुदा महिलाओं को यह समाज आज भी अच्छी नज़र से नहीं देखता| लोग सोचते हैं जरुर इसी में कोई खोट रही होगी| दरअसल यह इतनी भी बुरी चीज़ नहीं है| कई इंसान अपने आप में अच्छे होते हैं लेकिन अपने सहचर के लिए क्रूर बन जाते हैं| ऐसा भी नहीं कि यह क्रूरता सिर्फ पुरुष ही करते हैं| कई स्त्रियाँ भी अपनी जिद, वर्चस्व ओर क्रूरता के कारण पतियों का जीवन नरक बना देती है| एक तीसरी स्थिति है जिसमें शुरू से ही पतिपत्नी के बीच ताल मेल नहीं बैठ पाते| ऐसे दंपत्ति शिक्षित और योग्य होते हैं| अब ऐसे में किसी को यह नहीं कहा जा सकता है कि इस रिश्ते जबरदस्ती निभाना ही है| मतभेद का स्तर जब बढ़ने लगता है तब जिन्दगी से खुशियाँ कपूर की तरह उड़ जाती हैं| ऐसा बुद्धिजीवी दम्पत्तियों के बीच होता है| ऐसे लोग समझदारी दिखाते हुए एक दुसरे से अलग हो जाते हैं और जीवन भर दोस्त बने रहते हैं| उदाहरण के लिए अभिनेत्री राखी और गुलजार, वर्तमान में ऋतिक रौशन और सुजैन|

अब इस उदाहरण के सन्दर्भ में कहा जा सकता है कि ये बड़े लोग हैं, उच्च वर्ग के हैं इन्हें किसी सामाजिक तौर तरीके से लेना देना नहीं होता| इस तर्क को भी मान लें तो आज मधमम वर्ग में भी ऐसे पढ़े लिखे लोगों कि जमात तैयार हो रही है जो तलाक को हौवा नहीं समझते| जब साथ रहना मृत्यु तुल्य कष्ट दें तो अलग होना बेहतर| यह नज़रिए का प्रश्न है| साथ ही विचार करने का भी| कई लोगों ने बचपन में अपनी माँ को पिता से बुरी तरह प्रताड़ित होते हुए देखा होगा| क्या उनके मन में यह बात नहीं आई होगी कि काश मेरी माँ इस जालिम पिता के अत्याचार से मुक्त हो पाती| इस तरह अगर तलाक के कारणों पर विचार करें तो कुछ कारणों को निर्विवाद रूप से समझ सकते हैं –

  • पति या पत्नी अथवा दोनों का एक दूसरे के प्रति हिंसक व्यवहार|
  • शिक्षित पति पत्नी में अहं का टकराव
  • शिक्षित पति पत्नी के बीचअत्यधिक वैचारिक मतभेद
  • विवाहेत्तरसम्बन्ध
  • दोनों में से किस एक का शराबी जुआरी होना(आज के परिपेक्ष्य में हम यह नहीं कह सकते कि शराबीसिर्फ पति हो सकता है|
  • दंपत्ति के बीच दोनों के परिजनों का हस्तक्षेप

ये ऐसे कारण है जो आजकल ज्यादातर तलाक के कारण बन रहे हैं| ऐसी स्थिति में साथ बैठकर आपस में बात कर समस्या का निबटारा किया जा सकता है| लेकिन यह लगे कि साथ रहकर दोनों एक दूजे को सिर्फ दुःख ही दे रहे हैं तो ऐसे में तलाक समझदारी है| ऐसे में निसंदेह बच्चे त्रिशंकु में लटक जाते हैं| माता पिता दोनों कहते हैं कि मैं बच्चों से प्यार करता हूँ/करती हूँ लेकिन दरअसल वह बच्चों को दुःख ही दे रहे होते हैं| वैसेकिसी अदालत में तलाक का फैसला देते हुए बच्चों के बारे में एक जज ने कहा था कि हमेशा लड़ते झगड़ते माता पिता की बजाय प्यार करने वाले और ध्यान रखने वाले माता या पिता कोई एक ही भले|

भारतीय ज्योतिष शासन में ग्रहोंकी कुछ ऐसी स्थितियों का विश्लेषण किया जाता है जो तलाक के लिए उत्तरदायी होते हैं| वैसे तो हर इंसान जिस प्रकार अलग अलग होता है उसी प्रकार उसकी कुंडली भी ख़ास होती है| लेकिनग्रहोंके कुछ समीकरण ऐसे भी होते हैं जो यदि जन्म कुंडली में है तो प्रायः तलाक की स्थिति बनती है| जैसे-

तलाक के ज्योतिषीय कारण

  • अगर जन्म कुंडली में लग्न के स्वामी और चन्द्रमा से सप्तम भाव काग्रह(शुक्र) अगर पीड़ित हो तो अलगाव की संभावना बनती है|
  • अगर कुंडली में चौथे भाव के स्वामी छठवें भाव में स्थित होया इसके ठीक उलट छठे भाव के स्वामी चौथे भाव में आ जाएं तो तब अलगाव का मामला अदालत तक जा पहुँचता है|
  • राहू केतु शनि आदि क्रूर ग्रह अलगाव के कारण माने जाते हैं| अगर इन ग्रहों का प्रभाव सातवें या सातवें और आठवें दोनों भाव पर एक साथ पड़ रहा हो तो तलाक की नौबत आ जाती है|
  • अगरजन्म कुंडली में शनि अथवा शुक्र, राहू लग्न में स्थित हो तो अलागाव की संभावना जबरदस्त होती है|
  • शुक्रसे छठे, आठवेंया फिर बारहवें भाव में अगर क्रूरग्रह उपस्थित हो तो तलाक की स्थिति बनती है|
  • सातवें और बारहवें भाव के स्वामी आपस में राशि परिवर्तन कर रहे हो या फिर दोनों में से कोई राहू के साथ परिवर्तन कर रहा हो तो यह स्थिति भी तलाक का कारणहै|
  • जन्म कुंडली में अगर छठे भाव के स्वामी वक्री हो तो तलाक का मामला कोर्ट में लम्बे समय तक चलता है|
  • अगर कोई ग्रह वक्री हो और उसकी दृष्टि शुक्र पर हो तब भी कोर्ट में मामला लम्बे समय तक अटका रहता है|

इसलिए अगर दाम्पत्य जीवन में सबकुछ ठीक न चल रहा हो तो एक बार योग्यज्योतिषीकी सलाह अवश्य लें| हो सकता है कुंडली दोष की वजह से जीवन में हलचल मच रही हो| योग्य गुरु यथेष्ट उपाय भी बताते हैं| जब कोई उपाय शेष न रहे तब कोर्ट तो है ही|

जानें स्त्री की कुंड़ली में कैसे बनता है व्यभिचारी योग

जानें स्त्री की कुंड़ली में कैसे बनता है व्यभिचारी योग

कुंडली में चरित्रहीनता वेश्यावृत्ति व्यभिचार के योग, किसी भी स्त्री-पुरुष के बारे तमाम अच्छी-बुरी बातें और आदतों की जानकारी उसके जन्मकुंडली से मालूम की जा सकती है।

कुंडली के ज्योतिषीय विश्लेषण से न केवल उसके आचरण और स्वभाव का पता चलता है, बल्कि उसके चारित्रिक भटकाव या बदलाव की भी भविष्यवाणी की जा सकती है।

खासकर किसी स्त्री की काम वासना, चारित्रहीनता, व्यभिचार या वेश्यावृति संबंधी तमाम तरह की जानकारियां कुंडली के ग्रह योगों से पता चलता है। एक नजर कुछ वैसे ग्रहयोग के बारे में जानते हैं, जिनकी वजह से स्त्री के चारित्रिक पतन की आशंका बनती है।

कुंडली में चरित्रहीनता वेश्यावृत्ति व्यभिचार के योग

ज्योतिष की मान्यता के अनुसार इस संबंध में स्त्री की कुंडली के सातवें, आठवें और दसवें भाव के आधार पर शुक्र, मंगल और चंद्रमा के दोषपूर्ण योग का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।क्योंकि इन भावों में बुध या शुक्र के होने की स्थिति में स्त्री के गैरपुरुष संबंध बन सकते हैं, या फिर वह वेश्यावृति में जा सकती है। इसके महत्वपूर्ण ज्योतिषीय तथ्य इस प्रकार हैंः-

शुक्र ग्रहः ज्योतिष में व्यक्ति में वासना और भोग-विलास का कारण शुक्र ग्रह को माना गया है। इसके अत्यधिक प्रभाव से उसमें विलासिता और कामुकता के गुण आ जाते हैं। यह मंगल और चंद्र के साथ मिलकर उत्तेजना बढ़ा देता है। किसी स्त्री की जन्म कुंडली में यदि शुक्र ग्रह चंद्रमा के साथ नीच राशि में स्थित हो, तो यह क्रूर माने गए मंगल ग्रह के साथ मिलकर उसे चारिहीनता की ओर ले जाता है। अर्थात मंगल शुक्र ग्रह को अपने प्रभाव में लेने के बाद उस स्त्री को यौन आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए बाध्य करता है और वह चारित्रिक सीमा को बेहिचक लांघ जाती है।

नीच का शुक्रः यदि किसी की कुंडली में शुक्र ग्रह मेष, सिंह, धनु, वृश्चिक में हो या फिर वह नीच के भाव में रहे तथा मंगल, राहु, केतु या शनि के साथ योग करे तो उस व्यक्ति में अत्यधिक यौन-कामना की इच्छा जागृत हो जाती है। वैसी स्त्री वैवाहिक संबंध की मार्यादा को तोड़ देती है।

राहु-केतुः कुंडली में शुक्र-मंगल का योग यानि कि मंगल का शुक्र की राशि में स्थित होने के साथ-साथ यदि उनका योग राहू-केतु के लग्न या लग्नेश के साथ हो जाता है तब वह वासनपूर्ति के लिए अपराध करने तक से नहीं चूकता है। ऐसी स्त्री कई के साथ शारीरिक संबंध बनाने में जरा भी नहीं हिचकती है। उनपर चरित्रहीनता का आरोप लग जाता है, या फिर वह वेश्यवृति के दलदल में धंस जाती है।

चंद्रमा और शुक्रः जिस किसी स्त्री की कुंडल में तुला राशि के साथ चंद्रमा और शुक्र के योग हो जाते हैं उसकी काम वासना कई गुणा बढ़ जाती है। यह योग अगर राहू या मंगल से प्रभावित हो जाए तब वह स्त्री काम-वासना पूर्ति के लिए किसी भी हद तक चली जाती है।

नवांश कुंडलीः जिस किसी भी स्त्री की नवांश कुंडली में शनि शुक्र की राशि में और शुक्र शनि की राशि में रहे तो उसकी यौन आकांक्षा बढ़ जाती है। इसी तरह से यदि शुक्र मंगल की राशि में और मंगल शुक्र की राशि में रहे तब वैसी स्त्री परपुरुष से संबंध बनाने का मौका निकाल ही लेती है।

बुध और शुक्रः स्त्री की कुंडली के अनुसार उसके सातवें भाव में बुध के साथ शुक्र के आ मिलने से वह गुप्त अनैतिक तरीके से काम-वसना पूर्ति करती है। इसके लिए चारित्रिक लांछन की चिंता से बेखबर किसी भी हद तक जा सकती है।

शुक्र और मंगलः जिस किसी स्त्री की कुंडली के तीसरे भाव में शुक्र स्थित हो और वह मंगल से प्रभावित हो जाए, तथा छठे भाव में मंगल की राशि होने के साथ-साथ चंद्रमा बारहवें स्थान पर रहे तब उसमें यौनाचार की चरित्रहीनता आ जाती है। कुंडली के सप्तम भाव में मंगल चारित्रिक दोष पैदा करने वाला साबित होता है। इस दोष से ग्रसित स्त्री या पुरुष को नाजायज संबंध रखने वाले जीवनसाथी मिलने के योग बन बन जाते हैं।

शनि-मंगलः स्त्री की कुंडली में यदि शनि लग्न में स्थित हो तो उसमें वासन की अधिकता रहती है। शनि के साथ मंगल के योग होने पर उसकी यौनआकांक्षा प्रबल हो जाती है। शनि का दशवें स्थान पर होना भी स्त्री की कामुकता को बढ़ता है, जबकि शनि के चैथे भाव में होने पर वह यौनाचार करने के लिए बाध्य हो जाती है। शनि शुक्र, मंगल और चंद्रमा के साथ योग कर व्यक्ति की कामुकता को काफी बड़ा कर देता है।

चंद्रमाः कुंडली में चंद्रमा के विभिन्न स्थान में होने से वह व्यक्ति की कमुकता को प्रभावित करता है। विशेषकर यदि चंद्रमा स्त्री की कुंडली के अनुसार बारहवें भाव में मीन राशि में हो, तब वैसी स्त्री कई पुरुषों के साथ यौन संबंध बना लेती है। चंद्रमा के नौंवे भाव मंे होने की स्थिति में स्त्री व्यभिचार करने के लिए प्रेरित हो जाती है। यानि कि यदि स्त्री की कुंडली मंे यदि चंद्रमा उच्च का हो तब उसे प्रेम-प्रसंग में सफलता मिलती है, लेकिन नीच की स्थिति में होने और दूसरे ग्रहों के शुभ नहीं हाने पर वह देह-व्यापर की ओर रूख कर सकती है।

सप्तम भाव में चंद्रमाः जन्म कुंडली के सप्तम भाव में चंद्रमा होने और उसके शनि के साथ योग बनाने की स्थिति में वैसी स्त्री अपने जीवनसाथी के साथ प्रेम नहीं कायम कर पाती है। उसके प्रेम-संबंध दूसरे पुरुष के साथ बना रहता है।

शनि और राहुः ज्योतिष के अनुसार इन दोनों ग्रहों का योग अच्छा नहीं माना जाता है। खासकर किसी स्त्री की जन्मकुंडली के लिए तो बिल्कुल ही नहीं। इस योग के कारण प्रभावित स्त्री वेश्यावृति के प्रभाव में आ सकती है और कष्टमय जीवन गुजारती है।

सप्तम में राहुः कुंडली के सप्तम भाव में राहु होने पर स्त्री विवाह के बाद अवैध संबंध बना लेती है। यहां तक कि इस दोष के कारण उसे जीवनसाथी भी कई के साथ अवैध संबंध कायम रखने वाला मिलता है। ऐसे लोग दांपत्य जीवन के प्रति लापरवाह होते हैं।

सूर्यः जन्म कुंडली का सप्तम भाव व्यक्ति की कामुकता और विवाहेत्तर संबंध को दर्शाता है। ऐसे में यदि स्त्री की कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो उसके नाजायज संबंध बन सकते हैं। या फिर उसे अनैतिक संबंध बनाने वाला जीवनसाथी मिल सकता है।