Tantric Herbal Vashikaran mantra


तांत्रिक जड़ी-बूटी वशीकरण प्रयोग, प्रकृति मंे पाए जाने वाले कई पेड़-पौधों में बेहद चमत्कारी औषधीय गुण पाए जाते हैं, तो कईयों की जडी-बूटी में वशीकरण की जादूई शक्ति छिपी है। कुछ के उपयोग तांत्रिक प्रयोग लिए किए जाते हैं, जिनसे किसी भी व्यक्ति को आसनी से वश में किया जा सकता है। इनमें किस्मत पलटने की अद्भुत क्षमता होती है।

तांत्रिक जड़ी-बूटी वशीकरण प्रयोग

ये भले ही दुर्लभ हों, लेकिन इनका उपयोग बहुत ही आसान है। तांत्रिक विद्या में सिद्धि देने वाले कुछ जड़ी-बुटियों में गुलतुरा से दिव्यता मिलती है, तो तापसद्रुम से भूत-पिशाच और ग्रहों के बूरे प्रभाव को खत्म किया जा सकता है। भोजपत्र में ग्रह बाधाएं दूर करने की शक्ति है। सहदेई, गोरोचन, अपामार्ग और विष्णुकांता में सम्मोहन की क्षमता है। इनके संक्षिप्त विवरण इस प्रकार हैंः-

सहदेईः बहुत ही साधारण सा दिखने वाला छोटा और कोमल पौधा सहदेई के कई तांत्रिक महत्व हैं। वैदिक मान्यता के अनुसार इसे देवी का दर्जा प्राप्त है। इस कारण इसे तांत्रिक साधना और मंत्र जाप से अभिमंत्रित करने के बाद वशीकरण से लेकर धनवृद्धि आदि में उपयोग किया जाता है।

इस पौधे को उपयोग मंें लाने से पहले मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया जाता है। इस कार्य को किसी भी रवि-पुष्य योग के दिन सूर्योदय से पहले घर लाकर उसे पंचामृत से स्नान के बाद विधिवत षोडशोपचार पूजा करनी चाहिए। इसका पूजन मंत्र हैः- ऊँ नमो भगवती सहदेवी सदबलदायिनी सर्वंजयी कुरु कुरु स्वाहा!

  • वशीकरण प्रयोगः सहदेई के पूजन के बाद इसके रस में शुद्ध केसर और गोरोचन मिलाकर गाली बना लेनी चहिए। इस तरह यह गोली वशीकरण और विजयी दिलाने के लिए जादूई टोटके जैसा अचूक असर करता है। गोली को गंगाजल में घिसकर तिलक लगाने और वश में किए जाने वाले व्यक्ति के समझ जाने से उसका वशीकरण सुनिश्चत होगा। इस उपाय के साथ वशीकरण मंत्र का 108 बार जाप भी किया जाना चाहिए। वह मंत्र हैः- ऊँ नमो नारायणाय सर्वलोकान् मम वशं कुरु कुरु स्वाहा!
  • वशीकरण के लिए दूसरा प्रयोग इसकी जड़ को गंगाजल में घिसकर आंख में काजल की तरह लगाकर किया जाता है। ऐसा करने से यह मोहक प्रभाव देता है।
  • यदि तुलसी के बीज को सहदेवी के रस में पीसकर ललाट पर तिलक लगाया जाए तो उसे देखने वाला सम्मोहित हुए बगैर नहीं रह पाता है।
  • यदि सहदेई के रस में अपामार्ग-ओंगा, भांगरा, लाजा और धान के छिलके को पीसकर तिलक किया जाए, उसमें किसी को भी सम्मोहन करने की चुंबकीय शक्ति आ जाती है।
  • सहदेई को छाया में सुखाकर उसके चूर्ण को पान में डालकर जिस किसी को खिलाया जाए उसका वशीकरण हो जाता है।
  • सहदेई को अपामार्ग के साथ लोहे के बर्तन में रखकर पीस लिया जाए और उसका तिलक मस्तक पर लगाया जाए तो उसे देखने वाला व्यक्ति निश्चित तौर पर सम्मोहित हो जाता है।
  • अपामार्गः- इसे ही चिरचिटा और जटजीरा के नाम से भी जाना जाता है। छोटा से अपामार्ग खेतों या झाड़ियों में पाया जाता है तथा इसके विविध तांत्रिक प्रयोग से वशीकरण किया जा सकता है। अश्विनी नक्षत्र में अपामार्ग की जड़ लाएं और इसे ताबीज में भर दें। इस ताबीज को पहनकर वश में किए जाने वाले व्यक्ति के पास जाएं। उसक वशकरण होकर रहेगा। यह ताबीज एक साथ कई लोगों का वशीकरण कर सकता है।

संखाहुली की जड़ः यदि आप विपरीत लिंग वाले व्यक्ति का वशीकरण चाहते हैं तो संखाहुली की जड़ का इस्तेमाल करें। इसे पाए जाने वाले स्थान से भरणी नक्षत्र में लाएं और ताबीज बनाएं। ताबीज को गले में पहनें और व्यक्ति के पास जाएं। उसके पास जाते ही वह आपसे सम्मोहित हो जाएगा। यह प्रयोग विशेष कर वैसे प्रेमियों और दंपतियों के लिए उपयोगी होता है, जिनके प्रेम – संबंध में खटास आ जाती है। वे इसका उपयोग कर एक-दूसरे के प्रति जबरदस्त आकर्षण पैदा कर सकते हैं।

सुदर्शन और कांकरसिंही की जड़ः इसके बारे में संस्कृत में एक श्लोक हैः- करे सौदर्शनं बध्वा राजप्रियो भवेत! संही मूले हरेत्पुष्ये कटि बध्वा नृपप्रियः!! अर्थात सुदर्शन की जड़ को हाथ में बांधने वाला व्यक्ति राज को सम्मोहित कर सकता है। यानी कि वह व्यक्ति राजा का प्रिय बन जाता है। यहां मौजूदा दौर राजा का अर्थ मंत्री और सर्वोच्च पद पर बैठा अधिकारी से है। इसी तरह से कांकरसिंही की जड़ को पुष्य नक्षत्र में लाकर कमर में बांधने से भी श्रेष्ठ व्यक्ति को सम्मोहित किया जा सकता है।

काकजंघाः जंगली पौधा काकजंघा का उपयोग वशीकरण में तांत्रिक विधि के साथ किया जाता है, लेकिन इसके कुछ टोटके भी हैं।

  • काकजंघा के साथ काले कमल, भवरें के दोनों पंख और पुष्कर की जड़ को पीसकर चूर्ण बनाया जाता है। उसका तिलक लगाने वशीकरण किया जाता है।
  • इसके अतिरिक्त काकजंघा के साथ कमल की जड़, महुआ, लजालू और स्वीकार्य को मिलाकर बनाए गए मिश्रण का तिलक भी वशीकरण के लिए उपयोगी होता है।
  • जिस किसी को चंदन, तगर, कूठ, प्रियंगु, नागकेसर और काले धतूरे के काकाजंघा को मिलाकर बनाए चूर्ण अभिमंत्रित कर एक सप्ताह तक खिला दिया जाए, वह व्यक्ति हमेशा के लिए वशीभूत हो जाएगा।
  • काकजंघा, तगर, केसर, कमल को पीसकर स्त्री के मस्तिष्क पर लगाया जाए और पैर के नीचे डाली जाए, वह निश्चित तौर पर वशीभूत हो जाएगी।
  • हत्था जोड़ीः यह एक ऐसी दुर्लभ जड़ी है, जिसे लेकर कई भ्रांतियां हैं। एक भ्रांति इसके किसी जीव की हड्डी होने को लेकर भी है। अन्य गलतफहमियां इसके तांत्रिक प्रयोग के संबंध में है। हालंकि इसका उपयोग मुकदमा जीतने, शुत्रुता दूर करने, दरिद्रता मिटाने आद के अतिरिक्त वशीकरण में भी प्रमुखत से किया जाता है।

इन सभी के लिए विशेष तांत्रिक साधना की जाती है। इसे सिद्धि के बाद लाल रंग के कपड़े में बांधकर घर के किसी सुरक्षित स्थान में रख दिया जाता है। तिजोरी में रखने धन की बढ़ोत्तरी होने के साथ-साथ विपत्तियों से छुटकारा मिलता है।

बेला की जड़ः सफेद फूलों वाले इस पौधे की जड़ से किसी व्यक्ति का विशेष का नहीं, बल्कि स्त्री और पुरुष के बीच एक-दूजे के प्रति अकर्षण बढ़ाने और वैवाहिक बाधा को दूर करने के लिए किया जाता है। इसकी एक और जाति मोगरा या मोतिया है,

जिसके फूल मोती जैसे गोल होते हैं। स्त्री को बेला की जड़ अपने पास गुरुवार को रखना चाहिए जबकि पुरुष को इसे शुक्रवार को धारण करना चाहिए। बेला के फूलों का उपहार सम्मोहन बढ़ाता है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s