Gorochan se vashikaran


त्राटक साधना सिद्धि/लाभ/नुकसान, त्राटक से सम्मोहन, त्राटक साधना कैसे करे- जिस प्रकार आम जीवन में इंसान तरक्की के लिए विभिन्न क्षेत्रों को अपनाता है उसी प्रकार आध्यात्मिक जीवन के उत्थान हेतु भी इंसान अपनी रुचि के अनुसार क्षेत्र चुनता है| जैसे – तंत्र-मंत्र, ज्योतिष, भक्ति, योग| त्राटक सिद्धि योग का एक हिस्सा है जो विशेष प्रकार की ध्यान विधि पर आधारित है| यद्यपि आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने के लिए सभी क्षेत्रों में ध्यान पर बल दिया गया है| जैसे भक्ति में भी भक्ति ईश्वर के ध्यान में लीन रहता है| तंत्र मंत्र में मंत्र सिद्धि हेतु किसी निश्चित विषय पर ध्यान केन्द्रित करना होता है| ध्यान की अवस्था में मनुष्य की समस्त ऊर्जा एक दिशा में प्रवाहित होने लगती है और वही साधना को परिणाम तक पहुंचाती है|

त्राटक सम्मोहन साधना

त्राटक साधना पूरी तरह ध्यान पर ही आध्रारित है| शब्द व्युत्पत्ति की दृष्टि से किसी विषय पर एकटक दृष्टि रखना त्राटक कहलाता है| अष्टांगिक योग के आठ चरणों में सबसे अंतिम ध्यान है| ध्यान के कई प्रकार बताए गए हैं, इनमे त्राटक सर्वोत्कृष्ट माना जाता है क्योंकि आम जीवन जीने वाले भी इस विधि से अनेक विशेष गुणो से सम्पन्न हो सकते हैं| ध्यान नेत्र खोलकर भी की जा सकती है और नेत्र बंद करके भी| बंद नेत्र द्वारा किए जाने वाले ध्यान में किसी आराध्य छवि की कल्पना होती है| परंतु नेत्र खोलकर किए जाने वाले ध्यान में किसी आराध्य को होना आवश्यक नहीं है| बल्कि अपने सामने किसी वस्तु को एकटक देखते हुए उसके द्वारा मूर्त से अमूर्त तक पहुँचते हैं| सांख्य-योग दर्शन शास्त्र के अनुसार मनुष्य के शरीर में ही ब्रम्ह का वास है, जिन्हें प्राप्त करने के लिए योग क्रिया की जाती है| कुंडली जागृत होते ही इंसान ‘अहम ब्रम्हास्मि’ का बोध कर लेता है| ठीक उसी प्रकार त्राटक द्वारा साधक उस दिव्य दृष्टि को प्राप्त करता है, जो सूक्ष्म रूप से प्रत्येक मनुष्य में है परंतु सुप्त रूप में|

त्राटक साधना अत्यंत सरल है परंतु साधक में कुछ विशेष गुणो का होना आवश्यक है जैसे –

  • साधना के प्रति निष्ठा हो
  • शारीरिक रूप से स्वस्थ हो
  • व्यभिचारी न हो
  • यम, नियम का पालन करने वाला हो
  • तामसिक भोजन का रसिक न हो
  • त्राटक साधना कैसे करें

इस साधना के कई प्रकार है| कुछ प्रमुख प्रकारों का वर्णन नीचे दिया जा रहा है| आप अपनी रुचि के अनुसार इनमे से कोई एक चुन सकते हैं| एक बार मे एक ही विधि चुने| उक्त विधि कष्टप्रद हो तो कुछ दिन विश्राम करें| पुनः अन्य विधि से प्रारम्भ करें|

  • एकान्त कक्ष में एक ऐसा कैनवास रखें जिसमे काले पृष्ठभुमि पर लाल अथवा सफ़ेद बिन्दु हो| स्नान के बाद प्रातः काल स्वच्छ आसन पर बैठें तथा उस बिन्दु पर अपना ध्यान केन्द्रित करें| कुछ देर बार वह बिन्दु चमकीली नज़र आएगी| आपको अपने शरीर का भान समाप्त हो जाएगा| प्रारम्भ में एक मिनट का लक्ष्य रखें| फिर इसे धीरे धीरे बढ़ा दें|
  • दूसरी विधि में ध्यान के लिए दीपक का सहारा लिया जा सकता है| आकार में बड़े दीपक को जलाकर उसके समक्ष बैठ जाएँ तथा उस पर ध्यान केन्द्रित करें| ध्यान से पहले कक्ष की बत्ती बुझा दें| ध्यान रखें लौ में किसी प्रकार का कंपन न हो| प्रारम्भ में ध्यान भटकते ही छोड़ दें| अगले दिन पुनः प्रयास करें|
  • तीसरी विधि में आईने की सहाता से त्राटक साधना की जा सकती है| आईना कम से कम 6 इंच चौड़ा तथा 8 इंच लंबा हो तो अतिउत्तम| एकांत कक्ष में बैठकर आईना अपने सामने रखें तथा खुद से नज़र मिलाएँ| धीरे-धीरे अपनी ही आँखों की पुतलियों पर ध्यान केन्द्रित करें| एक स्थिति ऐसी आएगी जिसमे आपको खुद का चेहरा दिखाई देना बंद हो जाएगा| अंत में वह पुतली भी नहीं दिखेगी|
  • चौथी विधि में सूर्य को अर्घ्य देने के बाद उगते हुए सूर्य पर ध्यान केन्द्रित करें| स्मरण रखें ध्यान केन्द्रित करें का आशय उसे एक तक देखते रहने से हैं| इस त्राटक विधि से सूर्य की लालिमा साधक को कान्ति प्रदान करती है तथा स्वाभाविक ऊर्जा से भर देती है|
  • इसके अलावा सरलता से उपलब्ध किसी भी वस्तु को एकटक देखते हुए यह साधना की जा सकती है| जैसे दीवार पर टंगी कोई तस्वीर, गमला आदि|

सावधानी

  • किसी भी विधि से यह साधना करें लेकिन ध्यान रखे साधना के लिए बैठते वक्त पेट न तो पूरी तरह खाली हो ना पूरी तरह भरा हो| खाली पेट गैस बनाता है, पेट दर्द की शिकायत हो सकती है| इसलिए थोड़ा बहुत खाकर बैठना नुकसान नहीं करता| परंतु पूरी तरह भरे पेट से बैठना और एकाग्र होना भी संभव नहीं होता|
  • यदि परिवार के मध्य रहते हो तो घर के सभी सदस्यों को पता होना चाहिए कि इस वक्त आपको आवाज नहीं देना है| फोन अलार्म आदि बंद रखें| यहाँ तक कि दरवाजे पर दस्तक होने पर कौन द्वार खोलेगा यह भी सुनिचित कर लें|
  • जल्दी जल्दी साधना विधि न बदले| जिस विधि का चुनाव करें उस पर कम से कम छह महीने परिश्रम करें|

त्राटक साधना से लाभ

त्राटक साधना तंत्र मंत्र से सर्वथा भिन्न मार्ग है| इसे किसी निश्चित दिन, निश्चित रंग के कपड़े प्रसाद धूप दीप अगरबत्ती से कुछ भी लेना देना नहीं है| इसकी सफलता सड़क के आत्म शक्ति पर निर्भर करती है| जिसे अंग्रेजी में विल पावर कहा जाता है| यह एक सतत प्रक्रिया है| इसलिए दो-माह चार माह की सीमा में बांधने के बजाय इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें| जिस प्रकार बैटरी कुछ दिन बाद फ्यूज हो जाती है, उसी प्रकार इस साधना के बाद प्राप्त हुआ ओज धीरे धीरे मद्धम पड़ जाता है| यह ओज बनी रहे इसलिए प्रतिदधि थोड़ी ही देर के लिए सही त्राटक अवश्य करें| ध्यान रखने योग्य बात यह है कि किसी भी विधि से यह साधना करने पर लाभ और नुकसान एक समान ही है|

  • इस साधना से चेहरे पर कान्ति आती है| व्यक्तित्व में आकर्षण उत्पन्न होता है| नेत्र में इतना तेज आ जाता है कि किसी को देखते ही वह सम्मोहित हो जाता है| यह सम्मोहन तंत्र-मंत्र से प्राप्त सम्मोहन शक्ति से पृथक है| इसे सौम्य सम्मोहन कह सकते हैं जो आपमे आई सकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से उत्पन्न होता है|
  • स्वभाव में आमूल चूल परिवर्तन हो जाता है| पहले बात बात पर उत्तेजित होने वाला इंसान इस साधना के बाद धीर गंभीर और सोच समझकर निर्णय लेने वाला बन जाता है|
  • इस साधना के बाद एकाग्रता अत्यधिक बढ़ जाती है| छात्रों के लिए यह साधना रामबाण है| त्राटक अभ्यास के बाद कठिन से कठिन विषय पर ध्यान केन्द्रित करना सरल हो जाता है|

त्राटक साधना से नुकसान

विश्व में जितनी भी वस्तु अथवा विषय है उसके दो पहलू होते हैं| इन्हें अपनाने से पूर्व दोनों पहलुओं पर विचार कर लेना जरूरी होता है| यद्यपि यह साधना अत्यंत सरल है| मात्र इच्छा शक्ति के दम पर साधक अनेक विशिष्ट गुणो का स्वामी बन सकता है| तथापि त्रुटि होने पर कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जैसे –

साधना काल में अचानक तेज ध्वनि होने पर साधक अचेत हो सकता है| यहाँ तक कि हृदय गति रुक भी सकती है|
लगातार एकटक देखने से कभी-कभी आंखो में समस्या आने लगती है| आँसू निकल आते हैं या साधना के तुरंत बाद देखने में समस्या आने लगती है| दो चार दिन साधना करने के बाद नेत्रा चिकित्सक से इसके प्रभाव की जांच करवाएँ| यदि पहले से नेत्र संबंधी समस्या हो तो यह साधना न करें|

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